Gajar Ka Halwa : सर्दियों की शुरुआत के साथ ही पहाड़ी मंडियों और दून की दुकानों पर मीठी, गहरे लाल रंग की देसी गाजर आने लगती है। उत्तर भारत की पारंपरिक रसोई में गाजर का हलवा किसी त्योहार या मेहमाननवाज़ी का सबसे भरोसेमंद मीठा माना जाता है। इसे बिना बाज़ार के खोए (मावा) के, सिर्फ शुद्ध दूध और धीमी आंच की भुनाई से बनाया जाए, तो इसका स्वाद और खुशबू दोनों कई गुना बढ़ जाते हैं।
गाजर का हलवा के लिए सामग्री (6 लोगों के लिए)
- लाल गाजर (कद्दूकस की हुई): 1 किलो
- फुल क्रीम दूध: 1 लीटर
- देसी घी: 4 बड़े चम्मच (लगभग 60 ग्राम)
- चीनी: 1 कटोरी (लगभग 180 से 200 ग्राम)
- हरी इलायची: 5-6 (ताजी कुटी हुई)
- काजू: 10-12 (दो टुकड़ों में कटे हुए)
- बादाम: 10-12 (बारीक कतरे हुए)
गाजर का हलवा बनाने का तरीका
- गाजर को छीलकर पानी से धो लें, सूती कपड़े से सुखाएं और मध्यम छेद वाले कद्दूकस से कस लें।
- भारी तले की चौड़ी कड़ाही में कद्दूकस की हुई गाजर और 1 लीटर फुल क्रीम दूध डालें, फिर मध्यम आंच पर उबाल आने दें।
- आंच को मध्यम से धीमा करें और बीच-बीच में खुरचते हुए 35 से 40 मिनट तक पकाएं, जब तक कि सारा दूध सूख न जाए और गाजर गल न जाए।
- दूध पूरी तरह सूख जाने पर चीनी डालें; चीनी पिघलकर चाशनी छोड़ेगी, इसलिए आंच मध्यम रखकर लगातार चलाते हुए 8 से 10 मिनट तक सारा पानी सुखाएं।
- अब कड़ाही में 3 बड़े चम्मच देसी घी डालें और मध्यम आंच पर 10 से 12 मिनट तक हलवे को अच्छी तरह भूनें, जब तक उसका रंग गहरा लाल न हो जाए और किनारों से घी न छूटने लगे।
- एक छोटे पैन में बचा हुआ 1 चम्मच घी गरम करें, उसमें काजू और बादाम को हल्का सुनहरा होने तक तलें।
- भुने हुए मेवे और कुटी हुई हरी इलायची हलवे में डालकर मिलाएं, 2 मिनट चलाएं और गैस बंद कर दें।
गाजर का हलवा चिपचिपा या गीला न बने, इसके लिए 3 बातें
दूध सूखने से पहले चीनी डालने की गलती कभी न करें। अगर दूध मौजूद रहते ही चीनी डाल दी जाएगी, तो गाजर कड़ी हो जाएगी और दूध फटने की संभावना बढ़ जाती है। हमेशा दूध के पूरी तरह खोया बनने के बाद ही चीनी मिलाएं।
हलवे का गाढ़ापन ठीक न होने पर वह प्लेट में पानी या चाशनी छोड़ने लगता है। अगर चीनी डालने के बाद हलवा गीला रह जाए, तो घबराएं नहीं। आंच थोड़ी तेज करें और कड़ाही के तले से लगातार चलाते हुए अतिरिक्त चाशनी को पूरी तरह सुखा लें।
गाजर को कभी भी मिक्सी में न पीसें और न ही बहुत महीन कद्दूकस करें। महीन गाजर पकने के बाद पेस्ट बन जाती है। मध्यम छेद वाले कद्दूकस से कसा लच्छा ही हलवे को सही दानेदार बनावट देता है।
क्षेत्रीय बदलाव और सुरक्षित रखने का तरीका
उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में इसे धीमी आंच पर लोहे की कड़ाही में पकाया जाता है, जिससे इसका रंग और भी गहरा निखरता है। अगर आपके पास फुल क्रीम दूध का समय कम है, तो आप आधा लीटर दूध के साथ 150 ग्राम ताजा खोया (मावा) भूनकर मिला सकते हैं। जो लोग चीनी कम खाते हैं, वे चीनी की मात्रा 150 ग्राम तक घटा सकते हैं क्योंकि सर्दियों की लाल गाजर में प्राकृतिक मिठास काफी होती है।
यह हलवा फ्रिज में एयरटाइट डिब्बे के अंदर 7 से 8 दिनों तक बिल्कुल ताजा रहता है। जब भी परोसना हो, तवे या पैन में आधा चम्मच दूध का छींटा देकर हल्का गरम कर लें, हलवा दोबारा ताजा जैसा नरम हो जाएगा।
गरमा-गरम गाजर के हलवे को कतरे हुए बादाम से सजाकर खाने के तुरंत बाद परोसें।



