देहरादून: Uttarakhand Power Corporation Limited (UPCL) ने बिजली खरीद प्रबंधन में एक नई नजीर पेश की है। निगम ने पारंपरिक तरीकों को छोड़ते हुए डेटा एनालिटिक्स और मार्केट इंटेलिजेंस का इस्तेमाल किया, जिसका सीधा फायदा राज्य के वित्तीय ढांचे को मिला है।
देहरादून मुख्यालय से जारी आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 के पहले 9 महीनों (अप्रैल-दिसंबर 2025) में निगम ने बिजली खरीद लागत में 160 करोड़ रुपये से अधिक की बचत की है। इतना ही नहीं, रिन्यूएबल एनर्जी सर्टिफिकेट (REC) की ट्रेडिंग के जरिए निगम के खाते में 125 करोड़ रुपये की अतिरिक्त आय भी आई है।
महंगे पोर्टल को छोड़ा, एक्सचेंज से खरीदी सस्ती बिजली
UPCL की इस वित्तीय सफलता का मुख्य आधार बिजली खरीद की बदलती रणनीति रही। निगम ने महंगी दीर्घकालिक समझौतों पर निर्भर रहने के बजाय पावर एक्सचेंज के लचीलेपन का लाभ उठाया। आंकड़ों पर गौर करें तो इंडियन एनर्जी एक्सचेंज (IEX) पर डे-अहेड मार्केट (DAM) में बिजली की औसत कीमत ₹3.85 प्रति यूनिट रही, जो पिछले साल से 14% कम थी। वहीं, रियल-टाइम मार्केट (RTM) में यह कीमत 16% गिरकर ₹3.56 प्रति यूनिट दर्ज की गई।
UPCL प्रबंधन ने शुरुआत में केंद्र सरकार के DEEP (Discovery of Efficient Electricity Price) पोर्टल पर निविदाएं आमंत्रित की थीं, लेकिन वहां कीमतें काफी ऊंची (लगभग ₹5.50 प्रति यूनिट) मिल रही थीं। इसके विपरीत, निगम ने सूझबूझ दिखाते हुए पावर एक्सचेंज और द्विपक्षीय अनुबंधों के जरिए औसतन ₹3.59 प्रति यूनिट की दर से 850 मिलियन यूनिट बिजली खरीदी। सीधे तौर पर प्रति यूनिट लगभग ₹2 की बचत ने कुल आंकड़े को 160 करोड़ रुपये तक पहुंचा दिया।
दिसंबर की चुनौती और रणनीतिक जीत
पहाड़ी राज्य होने के कारण उत्तराखंड में सर्दियों के दौरान जल विद्युत उत्पादन घट जाता है और हीटिंग लोड बढ़ने से मांग बढ़ जाती है। आमतौर पर इस दौरान निगम को महंगी बिजली खरीदनी पड़ती है। दिसंबर 2025 में DEEP पोर्टल पर बिजली की दरें ₹4.30 प्रति यूनिट चल रही थीं।
UPCL के रणनीतिकारों ने यहां भी पावर एक्सचेंज के LDC (Low Duration Contracts) का सही इस्तेमाल किया और महज ₹3.40 प्रति यूनिट की दर पर बिजली सुरक्षित कर ली। सिर्फ दिसंबर माह में अपनाई गई इस रणनीति ने निगम को 20 करोड़ रुपये की सीधी बचत कराई।
नवीकरणीय ऊर्जा बना कमाई का जरिया
उत्तराखंड एक जल-ऊर्जा समृद्ध राज्य है, जिससे यहां रिन्यूएबल एनर्जी का उत्पादन अच्छा होता है। अपने अनिवार्य नवीकरणीय ऊर्जा दायित्व (RPO) को पूरा करने के बाद भी UPCL के पास अधिशेष ‘ग्रीन एनर्जी’ बचती है।
वित्त वर्ष 2025-26 में निगम ने इसी सरप्लस का फायदा उठाया। UPCL ने लगभग 35 लाख अतिरिक्त नवीकरणीय ऊर्जा प्रमाणपत्र (REC) को बाजार में बेचा। औसतन ₹350 प्रति सर्टिफिकेट की दर से निगम को 125 करोड़ रुपये की शुद्ध आय हुई, जो वित्तीय सेहत सुधारने में बड़ा कदम साबित हुई है।
क्या कहते हैं जिम्मेदार?
UPCL के प्रबंध निदेशक (MD) अनिल कुमार ने इस सफलता का श्रेय वैज्ञानिक दृष्टिकोण को दिया है। उन्होंने कहा कि निदेशक (परियोजना) अजय कुमार अग्रवाल के नेतृत्व में पावर प्रोक्योरमेंट डिवीजन ने मौसम के पूर्वानुमान और डेटा का बेहतरीन विश्लेषण किया।
अनिल कुमार ने बताया, “हमने मांग और आपूर्ति का संतुलन बनाए रखने के लिए वैज्ञानिक नजरिया अपनाया। पावर एक्सचेंज के रियल-टाइम और डे-अहेड मार्केट का सही उपयोग करके हमने न सिर्फ लागत कम की, बल्कि अनिश्चितताओं को भी बेहतर ढंग से प्रबंधित किया। इससे हम राज्य के उपभोक्ताओं को विश्वसनीय और किफायती बिजली देने में सफल रहे हैं।”



















