Health Tips : बदलती जीवनशैली में खुद को फिट रखने के लिए लोग गेहूं की सादा रोटी छोड़कर मल्टीग्रेन आटे को अपना रहे हैं।
गेहूं, मक्का, बाजरा, रागी और सोयाबीन जैसे पोषक तत्वों से भरपूर यह आटा सेहत के लिए जितना अच्छा माना जाता है, इसके दुष्प्रभाव भी उतने ही चौंकाने वाले हैं।
बिना सोचे-समझे और सही मात्रा का ज्ञान न होने पर यह सेहत को सुधारने के बजाय बिगाड़ सकता है।
पाचन तंत्र पर भारी पड़ता है हाई फाइबर
मल्टीग्रेन आटे में फाइबर की मात्रा बहुत अधिक होती है। जिन लोगों का पाचन तंत्र पहले से ही कमजोर या संवेदनशील है, उनके लिए यह आटा मुसीबत बन सकता है।
अत्यधिक फाइबर पेट में गैस, भारीपन और असहजता पैदा करता है। कई बार यह आंतों में फंसकर मल त्याग को मुश्किल बना देता है, जिससे कब्ज की समस्या शुरू हो जाती है।
कैलोरी और वजन बढ़ने का खतरा
अक्सर लोग मल्टीग्रेन को वजन घटाने का जरिया मानते हैं, लेकिन हकीकत इसके उलट हो सकती है। इस आटे से बनी ब्रेड या अन्य बेकरी आइटम में कैलोरी की मात्रा काफी ज्यादा होती है।
हाई फाइबर और कार्बोहाइड्रेट का यह कॉम्बिनेशन अगर सही संतुलन में न लिया जाए, तो यह तेजी से मोटापा बढ़ा सकता है।
एलर्जी और पोषक तत्वों की कमी
मल्टीग्रेन आटे में कई तरह के अनाज मिले होते हैं। इनमें से किसी एक अनाज, जैसे ग्लूटेन वाले गेहूं या सोयाबीन से आपको एलर्जी हो सकती है।
इसके अलावा, अलग-अलग अनाजों के मिश्रण में कुछ ऐसे यौगिक होते हैं जो शरीर में जरूरी खनिजों के अवशोषण को रोक देते हैं।
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि इसे अचानक डाइट में शामिल न करें और साथ में भरपूर पानी पिएं।














