Health Tips : अगर आप उन लोगों में से हैं जो दिनभर डकार लेते रहते हैं या जिन्हें लगातार गैस पास होने की समस्या है, तो सावधान हो जाएं।
हम अक्सर इसे सामान्य प्रक्रिया मान लेते हैं, लेकिन मेडिकल एक्सपर्ट्स के मुताबिक, अगर यह समस्या ‘एक्सेस’ यानी हद से ज्यादा है, तो यह आपके डाइजेशन सिस्टम के खराब होने का सीधा इशारा है।
खाने का तरीका और चबाने का महत्व
इस समस्या की सबसे बड़ी वजह आपके खाने का तरीका है। पाचन की प्रक्रिया पेट में नहीं, बल्कि मुंह में शुरू होती है। जब आप खाने को अच्छी तरह चबाकर निगलते हैं, तो पेट के लिए उसे पचाना आसान होता है।
जल्दी-जल्दी खाने के चक्कर में लोग बड़े टुकड़े निगल लेते हैं। ये बड़े फूड पार्टिकल्स पेट में बिना पचे पड़े रहते हैं, जिससे फर्मेंटेशन (सड़न) शुरू होता है।
यही प्रक्रिया बैड बैक्टीरिया को जन्म देती है, जो फार्ट और डकार का कारण बनते हैं। इसके अलावा, बिना चबाए खाने के साथ आप एक्स्ट्रा हवा भी निगल लेते हैं, जो पेट फूलने की वजह बनती है।
किन चीजों से बनानी होगी दूरी?
अगर गैस की समस्या पुरानी है, तो अपनी डाइट पर नजर डालें। हेल्दी लगने वाली कुछ सब्जियां जैसे गोभी और ब्रोकली भी हर किसी को सूट नहीं करतीं, इन्हें रोजाना खाने से बचें।
इसके अलावा प्रोसेस्ड और पैकेट बंद फूड्स, सोडा वाली ड्रिंक्स, चाय और कॉफी का सेवन कम कर दें। कई लोगों को ‘लैक्टोज इंटोलेरेंस’ की दिक्कत होती है, जिसका उन्हें पता नहीं चलता।
अगर दूध या डेयरी प्रोडक्ट्स लेने के बाद पेट भारी लगता है, तो इन्हें खाना बंद कर दें। यह गैस और डकार का एक बड़ा कारण हो सकता है।
तनाव और घरेलू उपाय
हैरानी की बात है कि आपकी मेंटल हेल्थ का सीधा असर आपके पेट पर पड़ता है। ज्यादा स्ट्रेस लेने से गट बैक्टीरिया पर नकारात्मक असर होता है, जिससे पाचन बिगड़ता है। इसलिए स्ट्रेस कम करने के लिए ब्रीदिंग एक्सरसाइज और मेडिटेशन का सहारा लें।
पाचन शक्ति बढ़ाने के लिए फाइबर से भरपूर फल और सब्जियां खाएं, लेकिन ध्यान रहे कि फाइबर की अधिकता भी कब्ज बढ़ा सकती है।
नेचुरल फर्मेंटेड फूड्स को डाइट में शामिल करें। ब्लोटिंग कम करने के लिए रोजाना सौंफ और अदरक (जिंजर) की चाय पीना एक कारगर उपाय है।
डॉक्टर से कब मिलें? अगर खानपान बदलने के बाद भी दिनभर फार्ट करने और डकार आने की समस्या कम नहीं हो रही, तो इसे हल्के में न लें।
यह आईबीएस (IBS), एसिड रिफ्लक्स या किसी गंभीर फूड एलर्जी का संकेत हो सकता है। ऐसे में मेडिकल चेकअप करवाना ही सही कदम है।














