Health Tips : प्रकृति की गोद में कई ऐसे अनमोल खजाने छिपे हैं जो स्वाद के साथ-साथ सेहत का भी खजाना हैं। ऐसा ही एक फल है ‘हनुमान फल’, जिसे वैज्ञानिक भाषा में ‘एनोना मूरिकाटा’ (Annona muricata) कहा जाता है।
आम बोलचाल में लोग इसे लक्ष्मण फल या खट्टा सोप भी कहते हैं। दक्षिण भारत में बहुतायत में मिलने वाले इस फल का स्वाद काफी अनोखा होता है—बिल्कुल स्ट्रॉबेरी और अनानास के मिश्रण जैसा।
आयुर्वेद में केवल फल ही नहीं, बल्कि इसके पत्ते, छाल, जड़ें और बीज भी कई गंभीर रोगों के इलाज में इस्तेमाल किए जाते हैं।
क्यों कहा जाता है ‘नेचुरल कीमोथेरेपी’?
इस फल की सबसे बड़ी खासियत इसके एंटी-कैंसर गुण हैं। इसमें एंटी-इन्फ्लेमेटरी, एंटीऑक्सीडेंट और एंटीबायोटिक तत्व पाए जाते हैं। इन्हीं गुणों के कारण कई जानकार इसे ‘प्रकृति की कीमोथेरेपी’ कहते हैं।
दावा किया जाता है कि यह फल शरीर में मौजूद कैंसर कोशिकाओं को मारने में मदद कर सकता है, वह भी बिना किसी दुष्प्रभाव (side effects) के।
आयुर्वेद के मुताबिक, हनुमान फल और इसकी पत्तियों का सेवन करीब 12 अलग-अलग तरह के कैंसर सेल्स को हराने की क्षमता रखता है।
महिलाओं की सेहत और यूटीआई में राहत
महिलाओं में यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन (UTI) एक आम समस्या है। हनुमान फल इस समस्या से निपटने में कारगर साबित हो सकता है।
यह विटामिन सी का बेहतरीन स्रोत है, जो यूरिन में अम्लीय स्तर (acidic level) को संतुलित रखता है। इससे संक्रमण का खतरा कम होता है और राहत मिलती है।
दर्द, सूजन और डायबिटीज में असरदार
हनुमान फल में मौजूद एंटी-इन्फ्लेमेटरी गुण शरीर के दर्द और सूजन को कम करते हैं। इसके अर्क से मालिश करने पर जोड़ों के लचीलेपन में सुधार होता है।
साथ ही, इसके एंटीबैक्टीरियल गुण दांतों की सड़न और मसूड़ों की सूजन को दूर रखते हैं।
डायबिटीज के मरीजों के लिए भी यह फल उम्मीद की किरण है। इसमें एंटी-डायबिटिक और हाइपोलिपिडेमिक गुण होते हैं।
शोध बताते हैं कि इसका नियमित सेवन खून में ग्लूकोज के स्तर को नियंत्रित करने में मदद करता है।
इसके अलावा, इसमें मौजूद फाइबर और अन्य पोषक तत्व पाचन तंत्र को मजबूत कर कब्ज जैसी समस्याओं से भी बचाते हैं।














