Health Tips : शरीर का मध्य बिंदु यानी नाभि केवल एक निशान नहीं, बल्कि कई नसों का संगम केंद्र है। प्राचीन चिकित्सा पद्धतियों में माना जाता है कि नाभि का सीधा संबंध शरीर के आंतरिक अंगों से होता है।
यही कारण है कि आयुर्वेद में अलग-अलग स्वास्थ्य समस्याओं के लिए नाभि में विशिष्ट तेल लगाने की सलाह दी जाती है। हालांकि इसके पीछे कोई ठोस वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं, लेकिन सदियों से इसके सकारात्मक परिणाम देखे गए हैं।
पाचन और मांसपेशियों को राहत
अक्सर खराब खान-पान के कारण लोगों को अपच और कब्ज की शिकायत रहती है। ऐसी स्थिति में नाभि में कैस्टर ऑयल लगाना फायदेमंद हो सकता है।
यह न केवल पेट साफ करने में मदद करता है, बल्कि महिलाओं को पीरियड्स के दौरान होने वाले मसल्स क्रैम्प से भी निजात दिलाता है।
यह तेल नसों को रिलैक्स कर शरीर को ऊर्जा प्रदान करने में सहायक माना गया है।
त्वचा और एंटी-एजिंग के लिए असरदार
स्किन को अंदर से मॉइस्चराइज करने के लिए नाभि में तेल लगाना एक बेहतरीन तरीका है। अगर आप चेहरे पर होने वाले कील-मुहासों से परेशान हैं, तो नारियल तेल का उपयोग करना चाहिए।
वहीं, चेहरे पर समय से पहले दिखने वाली झुर्रियों और फाइन लाइन्स को रोकने के लिए बादाम का तेल सबसे बेहतर है। यह त्वचा की नमी को लॉक कर एजिंग इफेक्ट को कम करने का काम करता है।
प्रजनन क्षमता और जोड़ों का दर्द
नाभि का गहरा संबंध फर्टिलिटी से भी जुड़ा है। रोजाना नाभि में तेल लगाने से स्पर्म काउंट बढ़ाने और प्रजनन क्षमता में सुधार करने में मदद मिल सकती है।
इसके अलावा, जो लोग बढ़ती उम्र या कमजोरी के कारण जोड़ों के दर्द से जूझ रहे हैं, उन्हें तिल के तेल का उपयोग करना चाहिए। तिल का तेल हड्डियों और जोड़ों की जकड़न को कम करने में मदद करता है।














