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उत्तराखंड में UCC लागू होने के बाद हलाला पर पहली बड़ी कार्रवाई, कोर्ट पहुंची चार्जशीट

उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता (UCC) के प्रभावी होने के बाद हलाला से जुड़े पहले मामले में हरिद्वार पुलिस ने कोर्ट में चार्जशीट दाखिल कर दी है। बुग्गावाला क्षेत्र की एक पीड़िता द्वारा दर्ज कराए गए इस केस में पति और ससुर समेत अन्य ससुराल पक्ष को नामजद किया गया है।

उत्तराखंड में UCC लागू होने के बाद हलाला पर पहली बड़ी कार्रवाई, कोर्ट पहुंची चार्जशीट

HIGHLIGHTS

  • उत्तराखंड में UCC के तहत हलाला कुप्रथा पर यह पहला आधिकारिक कानूनी एक्शन है।
  • पुलिस ने न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वितीय रुड़की की अदालत में आरोप पत्र पेश किया।
  • केस में UCC 2024 की धारा 32 के साथ BNS और दहेज प्रतिषेध अधिनियम की धाराएं लगाई गई हैं।

हरिद्वार, 14 मई 2026 (दून हॉराइज़न)। हरिद्वार जिले के बुग्गावाला क्षेत्र में करीब दो महीने पहले सामने आए हलाला और प्रताड़ना के चर्चित मामले में पुलिस ने अपनी जांच पूरी कर ली है।

उत्तराखंड समान नागरिक संहिता (UCC) लागू होने के बाद इस तरह का यह प्रदेश का पहला मामला है, जिसमें अब पुलिस ने चार्जशीट दाखिल कर गेंद अदालत के पाले में डाल दी है। पुलिस ने विवेचना के दौरान जुटाए गए तकनीकी साक्ष्यों और बयानों के आधार पर आरोपियों के खिलाफ ठोस आधार मिलने का दावा किया है।

यह मामला बुग्गावाला थाना क्षेत्र की एक महिला की शिकायत से शुरू हुआ था। पीड़िता ने अपने पति और ससुराल वालों पर गंभीर आरोप लगाते हुए बताया था कि निकाह के बाद से ही उसे दहेज के लिए मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा था। महिला का आरोप था कि उसे तीन तलाक दिया गया और फिर हलाला जैसी कुप्रथा के लिए विवश किया गया।

उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता लागू होने के बाद सरकार ने स्पष्ट किया था कि ऐसी कुप्रथाओं के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी, जिसके बाद इस केस को UCC के दायरे में लिया गया।

जांच अधिकारी मनोज कुमार ने शिकायतकर्ता और उसके परिजनों के विस्तृत बयान दर्ज करने के बाद दस्तावेजों की पड़ताल की। इस मामले में पुलिस ने उत्तराखंड समान नागरिक संहिता 2024 की धारा 32(1)(ii) और 32(1)(iii) का प्रयोग किया है, जो हलाला जैसी प्रथाओं को प्रतिबंधित और दंडनीय बनाती हैं।

इसके साथ ही, भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की धारा 115(2) व 85 और मुस्लिम महिला (विवाह पर अधिकारों की सुरक्षा) अधिनियम की धारा 3 और 4 को भी आरोप पत्र का हिस्सा बनाया गया है।

वर्तमान स्थिति स्पष्ट करते हुए एसपी देहात शेखर चंद्र सुयाल ने बताया कि पुलिस ने निर्धारित समय सीमा के भीतर विवेचना पूरी कर न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वितीय रुड़की की अदालत में चार्जशीट भेज दी है। हालांकि, इस मामले में अभी तक किसी भी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हुई है।

एसपी के अनुसार, मुकदमे में शामिल धाराओं की प्रकृति ऐसी है जिनमें तत्काल गिरफ्तारी का अनिवार्य प्रावधान नहीं है, इसलिए कानून सम्मत प्रक्रिया अपनाते हुए बिना गिरफ्तारी के आरोप पत्र दाखिल किया गया है। अब मामले की अगली दिशा अदालत तय करेगी।


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Harpreet Singh

हरप्रीत सिंह पिछले 10 वर्षों से 'दून हॉराइज़न' के साथ जुड़े हुए हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में एक दशक का अनुभव रखने वाले हरप्रीत की उत्तराखंड और अन्य राज्यों की खबरों पर गहरी पकड़ है. उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा में उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय से एमबीए (MBA) की डिग्री हासिल की है. इसके अलावा, उन्होंने भारतीय विद्या भवन, मुंबई से पब्लिक रिलेशंस (जनसंपर्क) में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा भी पूरा किया है. अपने अनुभव और शिक्षा के माध्यम से वे पाठकों तक सटीक और विश्लेषणात्मक खबरें पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

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