हरिद्वार, 28 जून 2026 (दून हॉराइज़न)।
Akhara Parishad Haridwar : आगामी 2027 अर्धकुंभ मेले से ठीक पहले अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के भीतर साधु-संतों की गुटबाजी चरम पर पहुंच गई है। बीती 27 जून की देर शाम हरिद्वार के कनखल स्थित श्री पंचायती शंभू अटल अखाड़े में संतों का भारी जमावड़ा लगा। एक गुट ने अपनी अलग ताकत दिखाते हुए नई राष्ट्रीय कार्यकारिणी के गठन का सीधा ऐलान कर दिया। महानिर्वाणी अखाड़े के सचिव श्रीमहंत रविंद्रपुरी महाराज को इस नई परिषद का अध्यक्ष चुन लिया गया है।
कुल 13 अखाड़ों वाले इस देशव्यापी संत समाज में से 8 अखाड़ों के प्रतिनिधियों ने मंच साझा कर अपना बहुमत साबित करने का कड़ा दावा ठोंक दिया। इस पूरी कवायद में महानिर्वाणी अखाड़ा, निर्मल अखाड़ा, अटल अखाड़ा, बड़ा अखाड़ा और नया अखाड़ा एक मंच पर एकजुट नजर आए। तीन बैरागी अखाड़ों की ओर से दिगंबर, निर्वाणी और निर्मोही अखाड़े के साधु-संतों ने भी बैठक में अपनी भौतिक उपस्थिति दर्ज कराकर इस नए गुट को ताकत दी।
देर रात चली इस बैठक के बाद विभिन्न पदों पर आसीन किए गए संतों की सूची जारी कर दी गई। निर्मोही अखाड़े के श्रीमहंत राजेंद्र दास महाराज को महामंत्री की अहम कुर्सी सौंपी गई है। श्री पंचायती बड़ा अखाड़ा से ताल्लुक रखने वाले महंत दुर्गादास उपाध्यक्ष चुने गए हैं। निर्मल अखाड़े से जसविंदर सिंह शास्त्री को कोषाध्यक्ष और दिगंबर अखाड़े के महंत वैष्णों दास महाराज को मंत्री की जिम्मेदारी दी गई है।
नई कार्यकारिणी में तीन वरिष्ठ संतों को संरक्षक मंडल में जगह मिली है। इनमें नया अखाड़े के श्रीमहंत भगतराम महाराज, महानिर्वाणी अखाड़े के मुरली दास महाराज और महंत ज्ञानदेव सिंह शामिल हैं। महामंडलेश्वर करौली शंकर दास मीडिया संयोजक का जिम्मा संभालेंगे। महंत संजय दास को अखाड़ा परिषद का राष्ट्रीय प्रवक्ता घोषित किया गया है।
नवनिर्वाचित अखाड़ा परिषद अध्यक्ष श्रीमहंत रविंद्रपुरी महाराज ने आठ अखाड़ों के समर्थन को अखाड़ा परिषद गठन का असल आधार बताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि देश के भीतर होने वाले किसी भी कुंभ आयोजन और राष्ट्र से जुड़ी गतिविधियों में यह परिषद सीधे तौर पर अग्रिम मोर्चे पर रहेगी। प्रशासन के साथ दो दिन बाद एक महत्वपूर्ण बैठक तय कर ली गई है। बैठक में जो भी विधिक और प्रशासनिक विषय सामने आएंगे, उन्हें तुरंत सार्वजनिक किया जाएगा।
नवनिर्वाचित मीडिया संयोजक करौली शंकर महाराज ने कहा कि अगले पांच सालों तक यही कार्यकारिणी अस्तित्व में रहेगी। देश में जहां भी कुंभ मेले की व्यवस्थाएं बनेंगी, यह परिषद सीधे सरकार के साथ पत्राचार और समन्वय का काम करेगी।
हरिद्वार में 2027 अर्धकुंभ की तैयारियां शुरू होने से पहले अखाड़ा परिषद सीधे दो फाड़ हो चुकी है। पूर्व में संतों के एक अन्य गुट ने भी अखाड़ा परिषद का गठन किया था। उस गुट में निरंजनी अखाड़े के सचिव श्रीमहंत रविंद्रपुरी महाराज को अध्यक्ष और जूना अखाड़े के श्रीमहंत हरिगिरि महाराज को महामंत्री बनाया गया था। दोनों ही गुट लगातार अपने-अपने बहुमत का कड़ा दावा पेश कर रहे हैं। संतों की यह आपसी रस्साकशी प्रशासन के लिए कुंभ से पहले एक बड़ी चुनौती बन गई है।











