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Anil Ambani-Jeffrey Epstein Leak: व्हाइट हाउस की जासूसी से लेकर गुप्त बैकचैनल तक, ईमेल के पिटारे से निकले चौंकाने वाले राज

कुख्यात अमेरिकी यौन अपराधी जेफ्री एपस्टीन और भारतीय उद्योगपति अनिल अंबानी के बीच हुए सैकड़ों गोपनीय पत्राचार ने वैश्विक गलियारों में हलचल मचा दी है। इन दस्तावेजों से खुलासा हुआ है कि अंबानी ने ट्रंप प्रशासन तक पहुंच बनाने के लिए एपस्टीन की मदद ली थी।

Anil Ambani-Jeffrey Epstein Leak: व्हाइट हाउस की जासूसी से लेकर गुप्त बैकचैनल तक, ईमेल के पिटारे से निकले चौंकाने वाले राज

HIGHLIGHTS

  • 2017 से 2019 के बीच सिग्नल और टेलीग्राम जैसे एन्क्रिप्टेड ऐप्स पर हुई सैकड़ों गुप्त बातचीत।
  • अनिल अंबानी ने पीएम मोदी की अमेरिका यात्रा से पहले जेरेड कुशनर और स्टीव बैनन से मिलने के लिए एपस्टीन का सहारा लिया।
  • आर्थिक संकट के दौरान अंबानी ने $750 मिलियन के 'बैंकप्सी प्रूफ' लोन के लिए भी एपस्टीन से सलाह मांगी थी।

नई दिल्ली, 05 अप्रैल 2026 (दून हॉराइज़न)। कुख्यात अमेरिकी अपराधी जेफ्री एपस्टीन और रिलायंस ग्रुप के चेयरमैन अनिल अंबानी के बीच हुए गुप्त समझौतों और सैकड़ों ईमेल ने अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के काले गलियारों की पोल खोल दी है। जारी हुए आधिकारिक दस्तावेजों के मुताबिक, 2017 से 2019 के बीच दोनों के बीच हुई बातचीत महज व्यापारिक नहीं थी। अंबानी ने ट्रंप प्रशासन की नीतियों और नियुक्तियों की ‘अंदरूनी जानकारी’ हासिल करने के लिए एपस्टीन को अपना जरिया बनाया था।

अमेरिकी न्याय विभाग (DoJ) द्वारा जारी फाइलों से पता चला है कि अनिल अंबानी खुद को भारत सरकार के एक ‘बैकचैनल’ के रूप में स्थापित करना चाहते थे। मार्च 2017 के एक संदेश में अंबानी ने एपस्टीन से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की संभावित अमेरिका यात्रा से पहले मदद मांगी थी। उन्होंने स्पष्ट लिखा था कि दिल्ली में ‘नेतृत्व’ चाहता है कि वे जल्द से जल्द स्टीव बैनन और जेरेड कुशनर से मिलें।

यह रिश्ता सिर्फ कूटनीति तक सीमित नहीं था। जब अनिल अंबानी भारी कर्ज और दिवालियेपन के संकट से जूझ रहे थे, तब उन्होंने एपस्टीन से मदद की गुहार लगाई थी। उन्होंने $750 मिलियन (करीब 6,200 करोड़ रुपये) का व्यक्तिगत ऋण जुटाने के लिए एक ऐसे ‘बैंकप्सी प्रूफ’ (दिवालियापन से सुरक्षित) इंतजाम पर चर्चा की थी, जो कानून की नजरों से बच सके।

एपस्टीन ने अंबानी के सामने खुद को व्हाइट हाउस का सबसे बड़ा जानकार पेश किया था। दिलचस्प बात यह है कि मार्च 2011 में पेरिस में एक डिनर तय हुआ था, जिसमें इजरायल के पूर्व पीएम एहुद बराक भी शामिल होने वाले थे। हालांकि, अंबानी ने अंतिम समय में इसे रद्द कर दिया क्योंकि उन्हें तत्कालीन फ्रांसीसी राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद के साथ रात्रिभोज करना था।

जांच में यह भी सामने आया है कि 2019 में जब पीएम मोदी दोबारा सत्ता में आए, उसके ठीक बाद 23 मई को अंबानी ने एपस्टीन के न्यूयॉर्क स्थित आवास पर मुलाकात की थी। इसके बाद एपस्टीन ने स्टीव बैनन को मैसेज किया था कि उसने मोदी के ‘खास आदमी’ से मुलाकात की है। एपस्टीन ने दावा किया था कि अंबानी इस बात से परेशान थे कि वाशिंगटन में कोई उनसे सीधे बात नहीं कर रहा है।

इन गुप्त संदेशों में भारत में अमेरिकी राजदूत की नियुक्ति को लेकर भी चर्चा हुई थी। अंबानी ने सुझाव दिया था कि जनरल डेविड पेट्रियस को राजदूत बनाया जाना चाहिए। हालांकि, एपस्टीन ने उन्हें पहले ही बता दिया था कि पेट्रियस रेस से बाहर हैं और एशले टेलिस का नाम आगे चल रहा है। अंततः केनेथ जस्टर की नियुक्ति ने एपस्टीन की सूचनाओं की सटीकता पर मुहर लगा दी थी।

दोनों के बीच यह सारा संवाद सिग्नल और टेलीग्राम जैसे प्लेटफॉर्म्स पर होता था ताकि इसे ट्रैक न किया जा सके। दुबई की कंपनी डीपी वर्ल्ड के सुल्तान अहमद बिन सुलायेम ने इन दोनों का परिचय कराया था। एपस्टीन ने अंबानी को ट्रंप के करीबी सहयोगियों थॉमस बैरक जूनियर और स्टीफन बैनन से मिलवाने का वादा किया था, जो बाद में सच भी साबित हुआ।

Shailendra Pokhriyal

शैलेन्द्र पोखरियाल 'दून हॉराइज़न' में वरिष्ठ राष्ट्रीय संवाददाता के तौर पर देश की सियासत और प्रमुख राष्ट्रीय घटनाओं को कवर करते हैं। केंद्र सरकार की नीतियों, संसद के सत्रों और बड़े राजनीतिक घटनाक्रमों पर उनकी गहरी पकड़ है। शैलेन्द्र का उद्देश्य राजनीतिक बयानों और सरकारी फैसलों के पीछे की असली सच्चाई को निष्पक्ष रूप से पाठकों के सामने रखना है। उनका लंबा पत्रकारीय अनुभव उन्हें जटिल राष्ट्रीय मुद्दों का आसान हिंदी में विश्लेषण करने में मदद करता है। वे पूरी तरह से शोध-आधारित (Fact-checked) और जनहित से जुड़ी बेबाक पत्रकारिता करने के लिए जाने जाते हैं।

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