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BJP Foundation Day : दोहरी सदस्यता का वो विवाद, जिसने जन्म दिया दुनिया की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी को

भारतीय जनता पार्टी आज अपना स्थापना दिवस मना रही है, जिसकी नींव 1980 में जनता पार्टी से अलग होकर 'दोहरी सदस्यता' विवाद के बाद रखी गई थी। जनसंघ के रूप में शुरू हुआ यह सफर नेहरू सरकार से डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के इस्तीफे और कश्मीर मुद्दे पर उनके कड़े रुख का परिणाम था।

Published On: April 6, 2026 1:24 PM
BJP Foundation Day : दोहरी सदस्यता का वो विवाद, जिसने जन्म दिया दुनिया की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी को

HIGHLIGHTS

  • 6 अप्रैल 1980 को आधिकारिक तौर पर भाजपा का गठन हुआ और अटल बिहारी वाजपेयी पहले अध्यक्ष बने।
  • जनता पार्टी में आरएसएस (RSS) की सदस्यता को लेकर हुए मतभेद के कारण जनसंघ गुट अलग हुआ।
  • 1951 में जनसंघ की स्थापना दिल्ली के राघोमल माध्यमिक विद्यालय में हुई थी, जिसका पहला चुनाव चिह्न 'दीपक' था।

नई दिल्ली, 06 अप्रैल 2026 (दून हॉराइज़न)। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) आज अपने गौरवशाली इतिहास के 46वें वर्ष (BJP Foundation Day) में प्रवेश कर रही है, लेकिन इस विशाल वटवृक्ष के बीज दशकों पहले जनसंघ के रूप में बोए जा चुके थे। 6 अप्रैल 1980 को भाजपा का उदय महज एक नई पार्टी का गठन नहीं था, बल्कि वैचारिक शुचिता और ‘दोहरी सदस्यता’ के अपमान के खिलाफ एक विद्रोह था।

सत्ता के गलियारों में भाजपा की कहानी तब शुरू होती है जब 1977 में आपातकाल के बाद जनसंघ का विलय जनता पार्टी में हुआ था। जनता पार्टी के भीतर जब आंतरिक कलह बढ़ी, तो समाजवादियों ने जनसंघ पृष्ठभूमि के नेताओं पर निशाना साधा। शर्त रखी गई कि जो जनता पार्टी का सदस्य होगा, वह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से संबंध नहीं रख सकेगा। इस दोहरी सदस्यता के मुद्दे पर समझौता करने के बजाय जनसंघ के नेताओं ने जनता पार्टी से बाहर निकलना बेहतर समझा।

मुंबई के अधिवेशन में जब नई पार्टी की घोषणा हुई, तो इसका नाम ‘भारतीय जनता पार्टी’ रखा गया। दिग्गज नेता अटल बिहारी वाजपेयी को पार्टी की कमान सौंपी गई और वे 1986 तक इसके पहले अध्यक्ष रहे। हालांकि, इस पूरी कहानी का मूल आधार 1951 में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी द्वारा रखी गई भारतीय जनसंघ की नींव थी।

डॉ. मुखर्जी उस समय जवाहर लाल नेहरू की कैबिनेट में श्रम मंत्री के तौर पर कार्यरत थे। कश्मीर के विलय, अनुच्छेद 370, अलग झंडे और अलग संविधान के प्रावधानों ने उन्हें झकझोर कर रख दिया था। नेहरू सरकार की नीतियों के विरोध में उन्होंने कैबिनेट से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद एक मजबूत राजनीतिक विकल्प की तलाश में उन्होंने तत्कालीन आरएसएस सरसंघचालक श्री गुरुजी से संपर्क साधा।

21 अक्टूबर 1951 को दिल्ली के राघोमल माध्यमिक विद्यालय में एक साधारण समारोह के बीच भारतीय जनसंघ की स्थापना हुई। भगवा रंग का झंडा और ‘दीपक’ चुनाव चिह्न तय किया गया। 1952 के पहले आम चुनाव में जनसंघ ने सबको चौंकाते हुए 3.06 प्रतिशत वोट हासिल किए। इस चुनाव में पार्टी के तीन सांसद जीते, जिनमें खुद डॉ. मुखर्जी शामिल थे।

दिलचस्प तथ्य यह है कि गठबंधन की राजनीति जिसे आज एनडीए (NDA) कहा जाता है, उसका बीज भी तभी पड़ गया था। संसद में उन तीन सांसदों के साथ अकाली दल, हिंदू महासभा और द्रविड़ कड़गम जैसे दलों ने मिलकर ‘नेशनल डेमोक्रेटिक फ्रंट’ बनाया।

38 सांसदों वाला यह गुट सदन में मुख्य विपक्षी ताकत बना और डॉ. मुखर्जी देश के पहले (अनौपचारिक) नेता प्रतिपक्ष कहलाए। शून्य से शिखर तक का यह सफर आज भाजपा को दुनिया के सबसे बड़े राजनीतिक संगठन के रूप में स्थापित कर चुका है।


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Amit Gawri

अमित गावरी 'दून हॉराइज़न' में राष्ट्रीय समाचार लेखक के रूप में देश भर की ब्रेकिंग न्यूज़ और महत्वपूर्ण घटनाओं को प्रमुखता से कवर करते हैं। चुनाव, सरकारी योजनाओं और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े विषयों पर उनकी खास विशेषज्ञता है। अमित हमेशा तथ्यों की गहराई में जाकर रिपोर्टिंग करते हैं, ताकि पाठकों को किसी भी खबर का हर पहलू स्पष्ट रूप से समझ आ सके। क्लिकबेट से दूर रहकर, वे अपनी खबरों में सटीकता और विश्वसनीयता (Trust) बनाए रखते हैं। उनका जर्नलिस्टिक अप्रोच हमेशा जनसरोकार और सटीक सूचना देने पर ही केंद्रित रहता है।

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