ऋषिकेश, 3 जून 2026 (दून हॉराइज़न)। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बुधवार को ऋषिकेश स्थित चारधाम ट्रांजिट कैंप (Chardham Yatra 2026) का औचक निरीक्षण किया।
इस दौरान उन्होंने यात्रियों की रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया, स्वास्थ्य जांच और ठहरने की व्यवस्थाओं का बारीकी से जायजा लिया। मुख्यमंत्री ने प्रशासनिक अधिकारियों को सख्त हिदायत दी कि किसी भी श्रद्धालु को पंजीकरण के लिए लंबा इंतजार न करना पड़े।
मैदानी इलाकों में पड़ रही भीषण गर्मी का असर यात्रा मार्गों पर भी है। इसे ध्यान में रखते हुए सीएम धामी ने ट्रांजिट कैंप में तत्काल प्रभाव से अतिरिक्त कूलर लगाने और पेयजल की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। भीड़ प्रबंधन की समीक्षा करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।
‘अतिथि देवो भव:’ के भाव से करें काम
निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री ने ट्रांजिट कैंप में तैनात स्वास्थ्य कर्मियों, पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों से भी बातचीत की। उन्होंने ड्यूटी पर मौजूद कर्मचारियों को अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखने की सलाह देते हुए कहा कि बाहर से आने वाले हर श्रद्धालु के साथ ‘अतिथि देवो भव:’ की भावना के साथ व्यवहार किया जाए और उनकी समस्याओं का मौके पर ही समाधान हो।
यात्रियों से लिया सीधा फीडबैक

व्यवस्थाओं को परखने के साथ ही मुख्यमंत्री ने यूपी, एमपी, राजस्थान, महाराष्ट्र और बिहार से आए श्रद्धालुओं से सीधा संवाद किया। कई बुजुर्ग तीर्थयात्रियों ने व्यवस्थाओं पर संतोष जताते हुए मुख्यमंत्री को बेहतर यात्रा संचालन के लिए आशीर्वाद दिया।
आजमगढ़ से आए शुभम और मध्य प्रदेश के ओमप्रकाश जैसे यात्रियों ने ट्रांजिट कैंप की सुविधाओं की तारीफ की। शुभम ने बताया कि यात्रा से लौटने के बाद भी वे बेहतर सुविधाओं के चलते इसी कैंप में रुके हैं। वहीं, उत्तर प्रदेश की कामिनी ने कहा कि कैंप में लगे एलईडी स्क्रीन्स पर रामायण और महाभारत का प्रसारण प्रतीक्षा के समय को भी आध्यात्मिक बना रहा है।
स्थानीय उत्पादों को मिल रहा बाजार
ऋषिकेश का यह ट्रांजिट कैंप सिर्फ यात्रियों के ठहरने का केंद्र नहीं, बल्कि स्थानीय आर्थिकी को भी मजबूत कर रहा है। परिसर में जहां एक तरफ श्रद्धालुओं के लिए निरंतर लंगर सेवा चल रही है, वहीं स्वयं सहायता समूह की महिलाएं स्थानीय हस्तशिल्प और पारंपरिक उत्पादों के स्टॉल लगा रही हैं। इससे महिलाओं को स्वरोजगार का सीधा मौका मिल रहा है और राज्य के पारंपरिक उत्पादों की भी ब्रांडिंग हो रही है।










