देहरादून। देहरादून में मुख्यमंत्री आवास का प्रांगण सोमवार को पूरी तरह होली के रंगों (CM Dhami Holi Milan) और पहाड़ की सुरीली धुनों में डूबा रहा। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने घंटों तक आम और खास के साथ मिलकर गुलाल उड़ाया। इस दौरान साढ़े तीन घंटे से ज्यादा समय तक सीएम जनता के बीच मौजूद रहे। उन्होंने न केवल लोगों से बधाई ली, बल्कि पहाड़ की लोक संस्कृति को बढ़ावा देने वाले कलाकारों के साथ कदम से कदम भी मिलाए।
सुबह से ही मुख्यमंत्री आवास पर लोगों की आवाजाही शुरू हो गई थी। इसमें राजनीति और प्रशासन के दिग्गजों के साथ-साथ बड़ी संख्या में आम नागरिक, माताएं-बहनें और युवा शामिल थे। सीएम धामी ने प्रोटोकॉल किनारे रखकर हर किसी से व्यक्तिगत तौर पर मुलाकात की। इससे पहले उन्होंने बीजेपी प्रदेश कार्यालय में भी कार्यकर्ताओं के साथ जमकर होली खेली थी।
सांस्कृतिक विविधता का अद्भुत संगम
कार्यक्रम की सबसे बड़ी खासियत राज्य के अलग-अलग हिस्सों से आए कलाकारों की जुगलबंदी रही। एक तरफ जौनसार के कलाकार अपनी पारंपरिक वेशभूषा में ‘हारुल’ नृत्य कर रहे थे, तो दूसरी तरफ कुमाऊं की प्रसिद्ध बैठकी और खड़ी होली की तान सुनाई दे रही थी। पौड़ी जिले के दूरस्थ राठ क्षेत्र से आई सांस्कृतिक टोली ने अपनी विशेष प्रस्तुति से सबका ध्यान खींचा। ढोल और मंजीरों की थाप ने माहौल में ऐसी ऊर्जा भरी कि मुख्यमंत्री खुद भी कलाकारों के साथ थिरकने लगे।
कुमाऊं से आए होल्यारों ने जब ‘आओ दगड़ियो, नाचा गावा, आ गई रंगीली होली’ का आह्वान किया, तो पूरा परिसर तालियों से गूंज उठा। वहीं राठ के कलाकारों ने ‘आई डान्ड्यू बसंत, डाली मा मौल्यार’ गाकर ऋतु परिवर्तन और होली के आगमन का संदेश दिया।
लोक संस्कृति को मिल रहा नया मंच

मुख्यमंत्री के इस अंदाज से लोक कलाकार बेहद गदगद नजर आए। कलाकारों का कहना था कि सरकारी स्तर पर इस तरह के आयोजनों से पहाड़ की लुप्त होती परंपराओं को नई संजीवनी मिल रही है। यह महज एक त्योहार नहीं, बल्कि उत्तराखंड की सांस्कृतिक पहचान को सहेजने का एक बड़ा जरिया बन गया है। मुख्यमंत्री ने साफ किया कि लोक संस्कृति ही राज्य की असली पूंजी है।
वैसे, उत्तराखंड में होली की यह परंपरा सदियों पुरानी है। कुमाऊं की बैठकी होली का इतिहास तो चंद राजवंश के दौर से जुड़ा है, जो 15वीं शताब्दी के आसपास शुरू हुई थी। उस समय अल्मोड़ा के महलों से शुरू हुई यह गायकी धीरे-धीरे आम लोगों तक पहुंची। आज सीएम आवास में जौनसार, गढ़वाल और कुमाऊं की परंपराओं का एक साथ दिखना इसी ऐतिहासिक विरासत का आधुनिक विस्तार है। देर शाम तक चली इस मस्ती में हर कोई सराबोर दिखा।









