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Heat Wave in Uttarakhand: दोपहर 12 से 3 बजे तक धूप से बचने की सलाह, स्वास्थ्य सचिव ने दिए ये निर्देश

उत्तराखंड में बढ़ती गर्मी और भारतीय मौसम विभाग की चेतावनी को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने राज्यव्यापी अलर्ट जारी किया है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) ने सभी जिलाधिकारियों और मुख्य चिकित्सा अधिकारियों को अस्पतालों में विशेष व्यवस्था करने और दैनिक रिपोर्टिंग के निर्देश दिए हैं।

Heat Wave in Uttarakhand: दोपहर 12 से 3 बजे तक धूप से बचने की सलाह, स्वास्थ्य सचिव ने दिए ये निर्देश

HIGHLIGHTS

  • जिला और उप-जिला अस्पतालों में कूलिंग सिस्टम और जरूरी दवाओं से लैस विशेष हीटस्ट्रोक कक्ष बनेंगे।
  • 1 मार्च 2026 से ही आईएचआईपी (IHIP) पोर्टल पर हीट वेव से जुड़े मरीजों की दैनिक रिपोर्टिंग अनिवार्य की गई है।
  • अस्पतालों के आईसीयू और संवेदनशील क्षेत्रों में बिजली लोड और फायर फाइटिंग सिस्टम का ऑडिट होगा।
  • सामूहिक आयोजनों, खेल गतिविधियों और उच्च जोखिम वाले समूहों के लिए विशेष दिशा-निर्देश लागू।

देहरादून, 20 May 2026 (दून हॉराइज़न)। उत्तराखंड के मैदानी इलाकों समेत पूरे राज्य में बढ़ते तापमान और संभावित हीट वेव (Heat Wave in Uttarakhand) के खतरे को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह सतर्क मोड में आ गया है।

भारतीय मौसम विभाग (IMD) द्वारा इस सीजन में सामान्य से अधिक तापमान रहने की आशंका जताए जाने के बाद राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) ने राज्य के सभी जिलाधिकारियों (DM) और मुख्य चिकित्सा अधिकारियों (CMO) को विस्तृत गाइडलाइन जारी की है। इस कदम का मुख्य उद्देश्य समय रहते प्रभावी कदम उठाकर हीट स्ट्रोक से होने वाली स्वास्थ्य जटिलताओं और मौतों को रोकना है।

स्वास्थ्य सचिव सचिन कुर्वे ने स्थिति की गंभीरता को स्पष्ट करते हुए कहा कि राज्य सरकार हीट वेव की चुनौती से निपटने के लिए पूरी तैयारी कर चुकी है। सभी जिलों को अलर्ट पर रहने और अस्पतालों में चिकित्सा स्टाफ को प्रशिक्षित करने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने बताया कि निगरानी तंत्र को मजबूत कर रोजाना की रिपोर्टिंग पर ध्यान दिया जा रहा है ताकि किसी भी आपात स्थिति को तुरंत संभाला जा सके।

Heat Wave in Uttarakhand : अस्पतालों के लिए बुनियादी ढांचे और दवाओं के निर्देश

नई एडवाइजरी के तहत प्रदेश के सभी जिला और उप-जिला अस्पतालों में विशेष ‘हीटस्ट्रोक कक्ष’ स्थापित किए जाएंगे। इन कमरों में मरीजों को तुरंत राहत पहुंचाने के लिए कूलिंग सिस्टम, आइस पैक, ठंडे आईवी फ्लूइड (IV Fluids) और वेंटिलेशन की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा गया है। विभाग ने इलाज के लिए ‘पहले ठंडा करें, फिर परिवहन करें’ (First Cool, Then Transport) के प्रोटोकॉल को सख्ती से लागू करने पर जोर दिया है। इसके साथ ही, ओआरएस (ORS), इलेक्ट्रोलाइट्स और गर्मी से जुड़ी अन्य जीवन रक्षक दवाओं का शत-प्रतिशत स्टॉक बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं।

दैनिक रिपोर्टिंग और डेटा ऑडिट अनिवार्य

राज्य में हीट वेव (Heat Wave in Uttarakhand) के प्रभाव की सटीक निगरानी के लिए 1 मार्च 2026 से ही दैनिक रिपोर्टिंग प्रणाली को अनिवार्य कर दिया गया है। सभी जिला इकाइयों को निर्देशित किया गया है कि वे इंटीग्रेटेड हेल्थ इंफॉर्मेशन प्लेटफॉर्म (IHIP) पर हीट से संबंधित मामलों का डेटा नियमित रूप से अपलोड करें।

इसके तहत न केवल मरीजों की जानकारी जुटाई जाएगी, बल्कि गर्मी के कारण होने वाली संदिग्ध मौतों की जांच और डेथ ऑडिट भी किया जाएगा। स्वास्थ्य विभाग ने साफ किया है कि डेटा की गुणवत्ता और समय पर रिपोर्टिंग में किसी भी प्रकार की लापरवाही पर सख्त कार्रवाई होगी।

बिजली लोड और फायर सुरक्षा का ऑडिट

तापमान बढ़ने के साथ ही अस्पतालों में एयर कंडीशनर और अन्य उपकरणों के अत्यधिक इस्तेमाल से बिजली का लोड बढ़ जाता है। इसे देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने सभी चिकित्सालयों के आईसीयू (ICU) और अन्य संवेदनशील वार्डों में इलेक्ट्रिकल लोड ऑडिट कराने को कहा है। इसके साथ ही शॉर्ट सर्किट जैसी घटनाओं से बचाव के लिए स्मोक डिटेक्टर और फायर फाइटिंग सिस्टम की कार्यशीलता की जांच करने के निर्देश भी दिए गए हैं।

सामूहिक आयोजनों और आम जनता के लिए परामर्श

प्रशासन ने आम जनता, विशेषकर शिशुओं, गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और खुले में काम करने वाले मजदूरों को उच्च जोखिम वाली श्रेणी में रखा है। स्वास्थ्य विभाग ने लोगों को दोपहर 12 बजे से 3 बजे के बीच सीधे धूप (Heat Wave in Uttarakhand) में निकलने से बचने, हल्के सूती कपड़े पहनने और लगातार पानी पीते रहने की सलाह दी है। ठंडे क्षेत्रों से मैदानी इलाकों में आने वाले पर्यटकों और स्थानीय लोगों को मौसम के अनुकूल ढलने के लिए 10 से 15 दिन का समय देने की बात कही गई है।

इसके अतिरिक्त, गर्मियों के दौरान होने वाले खेल आयोजनों और अन्य सामूहिक कार्यक्रमों के लिए भी कड़े नियम तय किए गए हैं। दोपहर के समय ऐसे बाहरी आयोजनों को टालने और कार्यक्रम स्थलों पर पर्याप्त पेयजल, ओआरएस, मेडिकल टीम और आइस बॉक्स की उपलब्धता अनिवार्य की गई है।


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Harpreet Singh

हरप्रीत सिंह पिछले 10 वर्षों से 'दून हॉराइज़न' के साथ जुड़े हुए हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में एक दशक का अनुभव रखने वाले हरप्रीत की उत्तराखंड और अन्य राज्यों की खबरों पर गहरी पकड़ है. उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा में उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय से एमबीए (MBA) की डिग्री हासिल की है. इसके अलावा, उन्होंने भारतीय विद्या भवन, मुंबई से पब्लिक रिलेशंस (जनसंपर्क) में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा भी पूरा किया है. अपने अनुभव और शिक्षा के माध्यम से वे पाठकों तक सटीक और विश्लेषणात्मक खबरें पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

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