देहरादून, 4 जुलाई 2026 (दून हॉराइज़न)।
CM Dhami : उत्तराखंड के सियासी गलियारों में आज का दिन एक नया इतिहास लिख रहा है। सूबे के सबसे युवा मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सत्ता की कमान संभालते हुए लगातार 5 साल का कार्यकाल पूरा कर लिया है जो भाजपा के किसी भी मुख्यमंत्री के लिए एक अभूतपूर्व रिकॉर्ड है। आज शनिवार से प्रदेशभर में सेवा पखवाड़ा शुरू हो रहा है। आईडीपीएल-ऋषिकेश में एक भव्य कार्यक्रम के साथ इस अभियान का आगाज किया जाएगा जिसमें मुख्य अतिथि के रूप में लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेनि) शिरकत करेंगे।
प्रदेश के 10वें मुख्यमंत्री के तौर पर धामी 9 जुलाई को एक और बड़ा सियासी किला फतह करने जा रहे हैं। साल 2002 में तत्कालीन कांग्रेस सरकार में नारायणदत्त तिवारी ने 2 मार्च को मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी और उनका कार्यकाल 7 मार्च 2007 तक चला था। तिवारी पूरे 5 साल 5 दिन तक सत्ता पर काबिज रहे। धामी का 5 साल का सफर आज पूरा हो गया। 8 जुलाई को वह एनडी तिवारी के इस लंबे कार्यकाल की बराबरी कर लेंगे। 9 जुलाई की सुबह होते ही उनके नाम सर्वाधिक समय तक उत्तराखंड का मुख्यमंत्री रहने का नया कीर्तिमान हमेशा के लिए दर्ज हो जाएगा।
शुक्रवार को कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक और सौरभ बहुगुणा ने मुख्यमंत्री से शिष्टाचार मुलाकात की। उनके साथ विधायक विनोद चमोली, सरिता आर्या, शक्ति लाल शाह, सहदेव पुंडीर और सुरेश गढ़िया ने भी सीएम को पांच साल पूरे होने पर शुभकामनाएं दीं। धामी ने 4 जुलाई 2021 को भारी राजनीतिक उथल-पुथल के बीच पहली बार राज्य की बागडोर संभाली थी। हाईकमान ने 10 मार्च 2021 को त्रिवेंद्र सिंह रावत को हटाकर तीरथ सिंह रावत को गद्दी सौंपी थी। महज चार महीने के भीतर ही भाजपा के शीर्ष नेतृत्व ने तीरथ की जगह धामी को सत्ता की चाबी सौंप दी।
चुनावी साल में पहाड़ जैसी चुनौतियों का सामना करते हुए धामी हाईकमान की उम्मीदों पर पूरी तरह खरे उतरे। भाजपा ने प्रदेश में हर पांचवें साल सरकार बदलने के पुराने मिथक को तोड़कर प्रचंड बहुमत के साथ सत्ता में वापसी की। विधानसभा चुनाव में खटीमा सीट से अनुकूल नतीजे नहीं आए। हाईकमान ने धामी के नेतृत्व पर फिर से भरोसा जताया और उन्हें दोबारा मुख्यमंत्री बना दिया जो राज्य की राजनीति का एक बेहद अनोखा रिकॉर्ड है। इसके बाद चंपावत उपचुनाव में धामी ने रिकॉर्ड मतों से जीत हासिल कर अपनी ताकत का लोहा मनवाया।
धामी से पहले भाजपा के 6 मुख्यमंत्रियों में से कोई भी अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर सका। अंतरिम सरकार में नित्यानंद स्वामी और भगत सिंह कोश्यारी बीच में ही हट गए। निर्वाचित सरकारों में रमेश पोखरियाल निशंक, बीसी खंडूड़ी, त्रिवेंद्र सिंह रावत और तीरथ सिंह रावत को भी अपना कार्यकाल अधूरा छोड़कर सत्ता से बाहर होना पड़ा। जुलाई 2021 में 45 वर्ष 9 माह 18 दिन की उम्र में पुष्कर सिंह धामी उत्तराखंड के सबसे युवा सीएम बने थे। इससे पहले सबसे कम उम्र में सीएम बनने का ताज डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ के पास था।

पुष्कर सिंह धामी राज्य के ऐसे पहले मुख्यमंत्री बने जो विधायक रहते हुए सीधे सीएम की कुर्सी तक पहुंचे। सूबे के पुराने सभी मुख्यमंत्री मंत्री, सांसद या केंद्र और राज्य सरकार में बड़े संवैधानिक और प्रशासनिक पदों का तगड़ा अनुभव रखते थे। धामी भारतीय जनता युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष रहे और 2012 व 2017 में खटीमा से विधायक चुने गए।
नारायण दत्त तिवारी का राजनीतिक कद बेहद विशाल था जो 1942 में ब्रिटिश विरोधी पोस्टर छापने के आरोप में जेल गए थे। उन्होंने राजीव गांधी सरकार में विदेश मंत्री और केंद्र में वित्त व उद्योग मंत्री जैसे भारी-भरकम पद संभाले। वह तीन बार यूपी के मुख्यमंत्री रहे। तिवारी 2002 से 2007 तक उत्तराखंड के सीएम और 2007 से 2009 तक आंध्र प्रदेश के राज्यपाल रहे।
उत्तराखंड के मुख्यमंत्रियों का अब तक का सफर
- नित्यानंद स्वामी: 09 नवंबर 2000 से 29 अक्टूबर 2001
- भगत सिंह कोश्यारी: 30 अक्टूबर 2001 से 1 मार्च 2002
- नारायण दत्त तिवारी: 02 मार्च 2002 से 7 मार्च 2007
- भुवन चंद्र खंडूड़ी: 07 मार्च 2007 से 26 जून 2009
- रमेश पोखरियाल ‘निशंक’: 27 जून 2009 से 10 सितंबर 2011
- विजय बहुगुणा: 13 मार्च 2012 से 31 जनवरी 2014
- हरीश रावत: 01 फरवरी 2014 से 27 मार्च 2016 (21 अप्रैल 2016 से 22 अप्रैल 2016 और 11 मई 2016 से 18 मार्च 2017)
- त्रिवेंद्र सिंह रावत: 18 मार्च 2017 से 9 मार्च 2021
- तीरथ सिंह रावत: 10 मार्च 2021 से 4 जुलाई 2021
- पुष्कर सिंह धामी: 04 जुलाई 2021 से निरंतर (2022 में दोबारा मुख्यमंत्री बने)










