बदरीनाथ, 4 जुलाई 2026 (दून हॉराइज़न)।
Badrinath Scandal : मोक्षधाम बदरीनाथ धाम के चढ़ावे में हेराफेरी की शिकायत मिलते ही बीकेटीसी ने सख्त रुख अपनाते हुए चार ड्यूटी कर्मचारियों को नोटिस थमा दिया है। मंदिर समिति के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सोहन सिंह रांगड़ ने इन सभी कर्मियों से तीन दिन के भीतर स्पष्टीकरण तलब किया है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए आंतरिक जांच के लिए एक विशेष कमेटी गठित करने की संस्तुति सीधे अध्यक्ष को भेज दी गई है।
धार्मिक संगठन भैरव सेना के संस्थापक अध्यक्ष संदीप खत्री ने सीधा आरोप बीकेटीसी अध्यक्ष के निजी सहायक पर मढ़ा है। 2 जुलाई की एक सीसीटीवी फुटेज में एक कर्मचारी बेहद संदिग्ध परिस्थितियों में दान पेटी के आसपास गतिविधि करता नजर आ रहा है। इस वीडियो के सामने आने के तत्काल बाद संगठन ने प्रबंधन को ज्ञापन सौंपकर विधिक कार्रवाई की मांग उठाई।
सूचनाएं मंदिर समिति के भीतर से ही लीक हुई थीं। सूत्रों का दावा है कि लंबे समय से दान गिनती कक्ष में गड़बड़ी की भनक स्थानीय कर्मचारियों को लग चुकी थी और जैसे ही सीसीटीवी में आपत्तिजनक फुटेज रिकॉर्ड हुई, यह जानकारी गुपचुप तरीके से भैरव सेना तक पहुंचा दी गई। बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने मामले की निष्पक्ष जांच के लिए तत्काल एक जांच समिति गठित करने के स्पष्ट आदेश जारी कर दिए हैं।
द्विवेदी ने निजी सचिव वाले दावे को सिरे से खारिज किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि आरोपित व्यक्ति मंदिर समिति का नियमित कर्मचारी है। यह कर्मचारी पूर्व में बीकेटीसी के तीन अलग-अलग अध्यक्षों के साथ भी वैयक्तिक सहायक के तौर पर अपनी सेवाएं दे चुका है। यदि जांच में कोई भी कर्मचारी दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ कठोरतम दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे को लेकर उठे विवाद के बाद से ही बीकेटीसी प्रशासन हाई अलर्ट पर था। परिसर के भीतर हाई रेज्योल्यूशन वाले आधुनिक कैमरे स्थापित किए गए थे ताकि चप्पे-चप्पे की स्पष्ट रिकॉर्डिंग हो सके। वर्तमान में संदिग्ध फुटेज को जूम करने पर तस्वीर बहुत साफ नहीं उभर रही है। बीकेटीसी प्रबंधन ने मामले की गुपचुप जांच शुरू कर पहचान की पुष्टि के प्रयास तेज कर दिए हैं।

सीईओ सोहन सिंह रांगड़ ने बयान जारी कर सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की है। उन्होंने कहा कि धार्मिक भावनाओं से जुड़े इस प्रकरण में जब तक ठोस तथ्य सामने न आएं, तब तक अपुष्ट अथवा भ्रामक आरोप-प्रत्यारोप से बचना चाहिए। धाम की गरिमा और श्रद्धालुओं की आस्था को ठेस न पहुंचे, इसके लिए जांच प्रक्रिया को पारदर्शी रखा जा रहा है।
बीकेटीसी का विवादों से पुराना नाता
देहरादून मुख्यालय से संचालित बीकेटीसी के लिए विवाद कोई नई बात नहीं है। हालिया दिनों में कई ऐसे गंभीर मामले सामने आए हैं जिन्होंने सीधे तौर पर समिति की साख और कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगाए हैं। लगातार सामने आ रहे इन प्रकरणों से पारदर्शिता को लेकर स्थिति साफ करने की भारी चुनौती खड़ी हो गई है।

- गर्भगृह की दीवारों पर चढ़ाई गई सोने की प्लेटों का रंग उतरने का मामला।
- मंदिर परिसर में दान एकत्र करने के लिए अनधिकृत क्यूआर कोड चस्पा करना।
- बीकेटीसी के निर्धारित बजट का एक बड़ा हिस्सा वीआईपी मेहमाननवाजी पर खर्च करना।
- बीकेटीसी के एक वरिष्ठ पदाधिकारी द्वारा अपनी ही पत्नी को समिति में कर्मचारी नियुक्त करना।
- बीकेटीसी के मंदिरों में आम श्रद्धालुओं से इतर वीआईपी दर्शन के लिए अलग से विशेष व्यवस्था लागू करना।










