धेनकनाल, 06 अप्रैल 2026 (दून हॉराइज़न)। ओडिशा के धेनकनाल जिले में मानवीय संवेदनाओं को तार-तार करने वाला एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने समाज के रक्षक कहे जाने वाले पिता के मुखौटे को उतार फेंका है। रासोल पुलिस थाना क्षेत्र के एक गांव में एक 59 वर्षीय व्यक्ति ने अपनी ही दिव्यांग बेटी को हवस का शिकार बनाया, जिसके बाद पीड़िता ने एक नवजात बच्ची को जन्म दिया है।
सच्चाई का खुलासा तब हुआ जब दिव्यांग युवती के शरीर में आए बदलावों को देखकर परिजनों ने उसे धेनकनाल के एक स्थानीय अस्पताल में भर्ती कराया। डॉक्टरों ने जांच के बाद जब युवती के गर्भवती होने की पुष्टि की, तो परिवार के पैरों तले जमीन खिसक गई। डिलीवरी के कुछ ही घंटों बाद जब कड़ियां जोड़ी गईं और पूछताछ हुई, तो पता चला कि यह घिनौना कृत्य किसी बाहरी का नहीं बल्कि घर के ही मुखिया का है।
पुलिस के मुताबिक आरोपी की पहचान 59 साल के रहाश सेठी के रूप में हुई है। वह लंबे समय से अपनी बेटी की शारीरिक और मानसिक लाचारी का फायदा उठा रहा था। पीड़िता अपनी स्थिति के कारण विरोध करने में असमर्थ थी, जिसका लाभ उठाकर आरोपी इस घिनौने अपराध को अंजाम देता रहा।
घटना की भनक लगते ही पीड़िता की मां ने लोक-लाज की परवाह किए बिना अपने पति के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। उन्होंने रासोल थाने में आरोपी पति के खिलाफ औपचारिक लिखित शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल प्राथमिकी दर्ज की और छापेमारी कर आरोपी रहाश सेठी को दबोच लिया।
पुलिस की शुरुआती तफ्तीश में सामने आया है कि आरोपी ने अपनी हैवानियत को छिपाने की पूरी कोशिश की थी, लेकिन अस्पताल की रिपोर्ट ने सब साफ कर दिया। पुलिस ने आरोपी को स्थानीय अदालत में पेश किया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत के तहत जेल भेज दिया गया है। फिलहाल पुलिस मामले के अन्य तकनीकी पहलुओं और डीएनए टेस्ट जैसी प्रक्रियाओं पर भी विचार कर रही है।
इसी बीच ओडिशा के ही गंजाम जिले से एक और विचलित करने वाली खबर आई है। यहां दुष्कर्म की शिकार एक 20 वर्षीय युवती ने न्याय न मिलने या लोक-लाज के डर से आत्मदाह कर लिया था। पांच दिनों तक एमकेसीजी मेडिकल कॉलेज में जिंदगी और मौत के बीच झूलने के बाद बुधवार रात उसकी मौत हो गई। पीड़िता ने 28 मार्च को एक 21 वर्षीय युवक के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराने के अगले ही दिन खुद को आग लगा ली थी।









