लंदन। ईरान और पश्चिमी देशों के बीच बढ़ते तनाव के बीच भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार की सुरक्षा को लेकर कड़ा रुख अख्तियार किया है। लंदन में अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO) परिषद के 36वें असाधारण सत्र को संबोधित करते हुए यूके में भारत के उच्चायुक्त विक्रम दोराइस्वामी ने साफ किया कि व्यापारिक जहाजों और नागरिक समुद्री बुनियादी ढांचे को निशाना बनाना किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा।
भारत ने इस बात पर गहरा क्षोभ व्यक्त किया कि युद्ध की स्थिति में निर्दोष नाविकों और आम लोगों को निशाना बनाया जा रहा है। दोराइस्वामी ने हमले में जान गंवाने वाले तीन भारतीय नाविकों को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि इस तरह की हिंसा न केवल अनैतिक है, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए भी घातक है।
विशेषज्ञों के अनुसार, होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से होने वाला व्यापारिक आवागमन ऐतिहासिक रूप से 80% तक गिर गया है। जहां पहले प्रतिदिन औसतन 138 जहाज गुजरते थे, वहीं अब यह संख्या सिमट कर रह गई है। भारत के लिए यह स्थिति इसलिए भी गंभीर है क्योंकि देश की ऊर्जा सुरक्षा और एलएनजी (LNG) आपूर्ति का एक बड़ा हिस्सा इसी मार्ग पर निर्भर है।

भारतीय उच्चायुक्त ने डेटा साझा करते हुए बताया कि वर्तमान में लगभग 23,000 भारतीय नाविक इस संकट की जद में हैं। फारस की खाड़ी में फिलहाल 24 भारतीय जहाज मौजूद हैं, जिनमें से 22 होर्मुज जलडमरूमध्य के पश्चिमी ओर फंसे हुए हैं। इन जहाजों पर 600 से अधिक भारतीय चालक दल के सदस्य सवार हैं, जिनकी सुरक्षा सर्वोपरि है।
इस बीच, ब्रसेल्स में हुई यूरोपीय संघ (EU) के 27 देशों के नेताओं की बैठक में भी तनाव कम करने की अपील की गई। यूरोपीय नेताओं ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया है, जिसमें उन्होंने होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा के लिए सैन्य साजो-सामान भेजने का अनुरोध किया था। यूरोपीय संघ ने स्पष्ट किया कि वे इस युद्ध का हिस्सा नहीं बनना चाहते और केवल कूटनीतिक समाधान के पक्षधर हैं।
IMO परिषद ने अपनी बैठक में एक ‘मैरीटाइम सेफ्टी कॉरिडोर’ बनाने के विचार का समर्थन किया है। इसका उद्देश्य प्रभावित क्षेत्रों से व्यापारिक जहाजों को सुरक्षित निकालने के लिए एक अंतरराष्ट्रीय ढांचा तैयार करना है। भारत ने भी अपनी ओर से नाविकों की मदद के लिए 24×7 हेल्पलाइन शुरू की है और भारतीय नौसेना का इंफॉर्मेशन फ्यूजन सेंटर (IFC-IOR) लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है।









