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Emmanuel Macron India Visit 2026 : AI पर भारत-फ्रांस की ऐतिहासिक डील, नई दिल्ली से मैक्रों का बड़ा ऐलान

फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने नई दिल्ली में 'AI इम्पैक्ट समिट 2026' के दौरान भारत और फ्रांस के बीच मजबूत तकनीकी संबंधों पर जोर दिया है। उन्होंने एम्स (AIIMS) में 'इंडो-फ्रेंच सेंटर फॉर एआई इन हेल्थ' का केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा के साथ उद्घाटन किया। दोनों देशों ने एआई के क्षेत्र में अमेरिका और चीन पर निर्भरता कम कर अपनी संप्रभु क्षमता विकसित करने का संकल्प लिया है।

Emmanuel Macron India Visit 2026

HIGHLIGHTS

  1. नई दिल्ली के एम्स में 'इंडो-फ्रेंच सेंटर फॉर एआई इन हेल्थ' (IF-CAIH) का ऐतिहासिक उद्घाटन।
  2. राष्ट्रपति मैक्रों ने स्पष्ट किया कि एआई में अमेरिका और चीन पर पूरी तरह निर्भर नहीं रहेंगे भारत-फ्रांस।
  3. कंप्यूटिंग क्षमता, टैलेंट और पूंजी को एआई इकोसिस्टम के तीन सबसे अहम स्तंभ बताया।
  4. एआई से स्वास्थ्य चुनौतियों का समाधान निकालने के लिए एम्स, आईआईटी दिल्ली और पेरिस ब्रेन इंस्टीट्यूट में अहम करार।

नई दिल्ली, 19 फरवरी 2026। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों (Emmanuel Macron India Visit 2026) बुधवार को नई दिल्ली के दौरे पर रहे। यहां उन्होंने भारत और फ्रांस के बीच आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में एक नई साझेदारी की नींव रखी। नई दिल्ली में आयोजित ‘एआई इम्पैक्ट समिट 2026’ में हिस्सा लेने पहुंचे मैक्रों ने स्पष्ट किया कि भारत और फ्रांस अब एआई तकनीक के लिए केवल अमेरिका या चीन के भरोसे नहीं रहना चाहते।

दक्षिण दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) परिसर में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा और फ्रांसीसी राष्ट्रपति ने संयुक्त रूप से ‘इंडो-फ्रेंच सेंटर फॉर एआई इन हेल्थ’ (IF-CAIH) का उद्घाटन किया। यह पहल चिकित्सा के क्षेत्र में दोनों देशों को ग्लोबल लीडर बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। मैक्रों ने जोर देकर कहा कि दोनों देशों को अपनी संप्रभु एआई क्षमता विकसित करनी होगी ताकि यह तकनीक मानवता के हित में काम कर सके।

दक्षिण दिल्ली के एम्स में भारत-फ्रांस की ऐतिहासिक साझेदारी

राजधानी दिल्ली के सफदरजंग इलाके में स्थित एम्स (AIIMS) में बुधवार का दिन चिकित्सा और तकनीक के ऐतिहासिक गठजोड़ का गवाह बना। राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा ने यहां इंडो-फ्रेंच सेंटर फॉर एआई इन हेल्थ की शुरुआत की। यह विशेष केंद्र एम्स दिल्ली, फ्रांस की सोरबोन यूनिवर्सिटी और पेरिस ब्रेन इंस्टीट्यूट के बीच हुए एक संयुक्त समझौते के तहत स्थापित किया गया है। इस महत्वपूर्ण परियोजना में आईआईटी दिल्ली (IIT Delhi) का भी सीधा शैक्षणिक सहयोग लिया जा रहा है।

इसका मुख्य उद्देश्य एआई आधारित अनुसंधान और क्लिनिकल नवाचार के जरिए जटिल स्वास्थ्य चुनौतियों का सटीक समाधान खोजना है। केंद्र सरकार के मुताबिक, यह स्वास्थ्य के क्षेत्र में भारत-फ्रांस सहयोग का अहम मील का पत्थर है। यह कदम समान और तकनीक-सक्षम स्वास्थ्य समाधानों में विश्व स्तर पर भारत के दृष्टिकोण को मजबूती प्रदान करता है।

अमेरिका और चीन के एआई मॉडल पर निर्भरता खत्म करने की तैयारी

वैश्विक एआई परिदृश्य में फिलहाल अमेरिका और चीन का दबदबा है, लेकिन भारत और फ्रांस इस दौड़ में सिर्फ दर्शक बनकर नहीं रहना चाहते। नई दिल्ली में छात्रों और विशेषज्ञों से बातचीत करते हुए राष्ट्रपति मैक्रों ने कहा कि यूरोप, भारत और फ्रांस में एक ही जुनून है। हम अब अमेरिकी या चीनी मॉडल पर पूरी तरह निर्भर नहीं रहना चाहते। हमें एक व्यापक और संतुलित एआई मॉडल की सख्त जरूरत है। फ्रांसीसी राष्ट्रपति ने कहा कि हमें समाधान का हिस्सा बनना होगा और हमारी कंपनियों तथा शोधकर्ताओं को इसमें सक्रिय भूमिका निभानी होगी। मैक्रों ने माना कि अमेरिका और चीन इस प्रतिस्पर्धा में आगे जरूर हैं, लेकिन भारत और फ्रांस तेजी से इस अंतर को कम कर रहे हैं। दोनों देश अपनी स्वतंत्र तकनीकी क्षमता विकसित करने को लेकर पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं।

कंप्यूटिंग क्षमता, टैलेंट और पूंजी पर फ्रांस का फोकस

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने के लिए मैक्रों ने तीन सबसे जरूरी स्तंभों पर निवेश की आवश्यकता स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि सबसे पहले पर्याप्त डेटा सेंटर और उच्च प्रदर्शन वाले कंप्यूटिंग बुनियादी ढांचे का निर्माण करना होगा। इसके बाद, दोनों देशों को अपने ही घरेलू संस्थानों में विशेषज्ञों और वैज्ञानिकों को प्रशिक्षित करना होगा ताकि बाहरी टैलेंट पर निर्भरता कम हो सके।

तीसरा सबसे अहम हिस्सा पूंजी है, जिसके जरिए नवाचार और नई खोजों को वित्तीय गति दी जा सके। मैक्रों ने जिम्मेदारी पूर्ण शासन की वकालत करते हुए कहा कि एआई का इस्तेमाल मानवता की भलाई के लिए होना चाहिए। इसमें बच्चों की सुरक्षा, एल्गोरिदम में पारदर्शिता और भाषाई तथा सांस्कृतिक विविधता को बनाए रखना सबसे महत्वपूर्ण है। यह ऐसा क्षेत्र है जहां नई दिल्ली और पेरिस का दृष्टिकोण बिल्कुल एक समान है।

‘रश 2026’ के मंच से युवा भारतीय नवप्रवर्तकों से सीधा संवाद

एम्स दिल्ली में इस नए केंद्र का उद्घाटन ‘रेनकॉन्ट्रेस यूनिवर्सिटेयर्स ऐट साइंटिफिक्स डी हौट निव्यू’ (रश) के साथ संपन्न हुआ। यह 18 और 19 फरवरी को एम्स में हो रही अकादमिक और वैज्ञानिक बैठकों की एक विशेष शृंखला है। इसका आयोजन फ्रांसीसी दूतावास के समन्वय से दिल्ली में किया जा रहा है। इस ‘रश 2026’ कार्यक्रम के तहत राष्ट्रपति मैक्रों ने भारतीय युवाओं के साथ सीधा संवाद किया।

उन्होंने दो भारतीय युवा नवप्रवर्तकों प्रियंका दास राजकाकती और मनन सूरी के साथ करीब 30 मिनट तक ‘रश- कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर बातचीत’ नाम के सत्र में हिस्सा लिया। इस दौरान मैक्रों ने युवाओं को एआई के नैतिक उपयोग और भविष्य की तकनीकी चुनौतियों के लिए तैयार रहने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने भरोसा जताया कि भारत के युवा वैज्ञानिक एआई के क्षेत्र में पूरी दुनिया को नई दिशा दिखाने का सामर्थ्य रखते हैं।


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Shailendra Pokhriyal

शैलेन्द्र पोखरियाल 'दून हॉराइज़न' में वरिष्ठ राष्ट्रीय संवाददाता के तौर पर देश की सियासत और प्रमुख राष्ट्रीय घटनाओं को कवर करते हैं। केंद्र सरकार की नीतियों, संसद के सत्रों और बड़े राजनीतिक घटनाक्रमों पर उनकी गहरी पकड़ है। शैलेन्द्र का उद्देश्य राजनीतिक बयानों और सरकारी फैसलों के पीछे की असली सच्चाई को निष्पक्ष रूप से पाठकों के सामने रखना है। उनका लंबा पत्रकारीय अनुभव उन्हें जटिल राष्ट्रीय मुद्दों का आसान हिंदी में विश्लेषण करने में मदद करता है। वे पूरी तरह से शोध-आधारित (Fact-checked) और जनहित से जुड़ी बेबाक पत्रकारिता करने के लिए जाने जाते हैं।

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