नई दिल्ली, 05 अप्रैल 2026 (दून हॉराइज़न)। बदलती अर्थव्यवस्था और आसमान छूती महंगाई ने रिटायरमेंट की प्लानिंग को पूरी तरह बदल दिया है, जहाँ कभी 1 करोड़ रुपये की राशि पर्याप्त मानी जाती थी, अब वह विशेषज्ञों की नजर में कम पड़ने लगी है। वित्तीय सलाहकार अब मध्यम वर्ग के लिए कम से कम 2 करोड़ रुपये के रिटायरमेंट फंड का सुझाव दे रहे हैं ताकि बुढ़ापे में जीवन स्तर से समझौता न करना पड़े।
महंगाई का यह खेल समझना बेहद जरूरी है क्योंकि यदि सालाना महंगाई दर औसतन 5% रहती है, तो आज के 2 करोड़ रुपये की क्रय शक्ति 20 साल बाद घटकर काफी कम रह जाएगी। जानकारों का मानना है कि यदि कोई आज जैसा लाइफस्टाइल दो दशक बाद भी चाहता है, तो उसे वास्तव में 5 करोड़ रुपये से अधिक के कॉर्पस की जरूरत होगी।
रिटायरमेंट का यह बड़ा लक्ष्य हासिल करने के लिए SIP (सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान) सबसे कारगर हथियार बनकर उभरा है। गणना के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति ₹35,000 प्रति माह से निवेश शुरू करता है और हर साल इसमें 10% की बढ़ोतरी (स्टेप-अप) करता है, तो 20 साल की अवधि में वह आसानी से 2 करोड़ रुपये का आंकड़ा छू सकता है।
निवेश की अवधि जितनी लंबी होगी, कंपाउंडिंग यानी चक्रवृद्धि ब्याज का फायदा उतना ही अधिक मिलेगा। उदाहरण के तौर पर, यदि निवेश की समय सीमा 25 या 30 साल कर दी जाए, तो मासिक निवेश की शुरुआती राशि को काफी कम किया जा सकता है, जिससे जेब पर बोझ कम पड़ता है।
शेयर बाजार का उतार-चढ़ाव निवेशकों के लिए सबसे बड़ी चुनौती है, जिसे हालिया बाजार गिरावट में साफ देखा गया है। बाजार में आई करीब 12% की गिरावट एक झटके में 2 करोड़ रुपये के पोर्टफोलियो को 1.77 करोड़ रुपये पर ला सकती है, इसलिए रणनीति में बदलाव समय की मांग है।
जोखिम प्रबंधन के लिए विशेषज्ञों ने ‘ग्लाइड पाथ’ और ‘बकेट स्ट्रैटेजी’ को सबसे सुरक्षित माना है। इसके तहत रिटायरमेंट के करीब आने पर धीरे-धीरे इक्विटी से पैसा निकालकर सुरक्षित डेट फंड्स में डालना चाहिए ताकि बाजार की अस्थिरता आपकी मेहनत की कमाई को न निगल सके।
खर्चों को मैनेज करने के लिए ‘बकेट स्ट्रैटेजी’ का पालन करना फायदेमंद है। इसमें अगले 3 साल के खर्च के लिए लिक्विड फंड, 3 से 7 साल के लिए डेट या हाइब्रिड फंड और 7 साल से अधिक की अवधि वाले लक्ष्य के लिए इक्विटी में निवेश रखना चाहिए।
अक्सर लोग बाजार गिरते ही घबराकर अपनी SIP बंद कर देते हैं या केवल सुरक्षित विकल्पों के चक्कर में महंगाई को मात देने वाले रिटर्न नहीं ले पाते। रिटायरमेंट फंड बनाना मुश्किल नहीं है, बशर्ते निवेश में अनुशासन, धैर्य और पोर्टफोलियो का सही संतुलन बना रहे।










