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रिटायरमेंट पर 1 करोड़ भी पड़ जाएंगे कम? जानें 2 करोड़ का फंड जुटाने का फुल-प्रूफ प्लान

बढ़ती महंगाई के बीच 1 करोड़ का रिटायरमेंट कॉर्पस अब नाकाफी साबित हो रहा है, जिससे निवेशक अब 2 करोड़ रुपये का नया लक्ष्य तय कर रहे हैं। इस फंड को हासिल करने के लिए स्टेप-अप SIP, ग्लाइड पाथ और बकेट स्ट्रैटेजी जैसे वित्तीय साधनों का सही संतुलन बनाना अनिवार्य है।

Published On: अप्रैल 5, 2026 2:16 अपराह्न
रिटायरमेंट पर 1 करोड़ भी पड़ जाएंगे कम? जानें 2 करोड़ का फंड जुटाने का फुल-प्रूफ प्लान

HIGHLIGHTS

  • 5% औसत महंगाई दर के कारण आज के 2 करोड़ की वैल्यू 20 साल बाद काफी कम रह जाएगी।
  • सालाना 10% स्टेप-अप के साथ ₹35,000 की मासिक SIP से 20 साल में 2 करोड़ का लक्ष्य संभव है।
  • बाजार जोखिम से सुरक्षा के लिए रिटायरमेंट से पहले 'ग्लाइड पाथ' रणनीति अपनाना जरूरी है।

नई दिल्ली, 05 अप्रैल 2026 (दून हॉराइज़न)। बदलती अर्थव्यवस्था और आसमान छूती महंगाई ने रिटायरमेंट की प्लानिंग को पूरी तरह बदल दिया है, जहाँ कभी 1 करोड़ रुपये की राशि पर्याप्त मानी जाती थी, अब वह विशेषज्ञों की नजर में कम पड़ने लगी है। वित्तीय सलाहकार अब मध्यम वर्ग के लिए कम से कम 2 करोड़ रुपये के रिटायरमेंट फंड का सुझाव दे रहे हैं ताकि बुढ़ापे में जीवन स्तर से समझौता न करना पड़े।

महंगाई का यह खेल समझना बेहद जरूरी है क्योंकि यदि सालाना महंगाई दर औसतन 5% रहती है, तो आज के 2 करोड़ रुपये की क्रय शक्ति 20 साल बाद घटकर काफी कम रह जाएगी। जानकारों का मानना है कि यदि कोई आज जैसा लाइफस्टाइल दो दशक बाद भी चाहता है, तो उसे वास्तव में 5 करोड़ रुपये से अधिक के कॉर्पस की जरूरत होगी।

रिटायरमेंट का यह बड़ा लक्ष्य हासिल करने के लिए SIP (सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान) सबसे कारगर हथियार बनकर उभरा है। गणना के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति ₹35,000 प्रति माह से निवेश शुरू करता है और हर साल इसमें 10% की बढ़ोतरी (स्टेप-अप) करता है, तो 20 साल की अवधि में वह आसानी से 2 करोड़ रुपये का आंकड़ा छू सकता है।

निवेश की अवधि जितनी लंबी होगी, कंपाउंडिंग यानी चक्रवृद्धि ब्याज का फायदा उतना ही अधिक मिलेगा। उदाहरण के तौर पर, यदि निवेश की समय सीमा 25 या 30 साल कर दी जाए, तो मासिक निवेश की शुरुआती राशि को काफी कम किया जा सकता है, जिससे जेब पर बोझ कम पड़ता है।

शेयर बाजार का उतार-चढ़ाव निवेशकों के लिए सबसे बड़ी चुनौती है, जिसे हालिया बाजार गिरावट में साफ देखा गया है। बाजार में आई करीब 12% की गिरावट एक झटके में 2 करोड़ रुपये के पोर्टफोलियो को 1.77 करोड़ रुपये पर ला सकती है, इसलिए रणनीति में बदलाव समय की मांग है।

जोखिम प्रबंधन के लिए विशेषज्ञों ने ‘ग्लाइड पाथ’ और ‘बकेट स्ट्रैटेजी’ को सबसे सुरक्षित माना है। इसके तहत रिटायरमेंट के करीब आने पर धीरे-धीरे इक्विटी से पैसा निकालकर सुरक्षित डेट फंड्स में डालना चाहिए ताकि बाजार की अस्थिरता आपकी मेहनत की कमाई को न निगल सके।

खर्चों को मैनेज करने के लिए ‘बकेट स्ट्रैटेजी’ का पालन करना फायदेमंद है। इसमें अगले 3 साल के खर्च के लिए लिक्विड फंड, 3 से 7 साल के लिए डेट या हाइब्रिड फंड और 7 साल से अधिक की अवधि वाले लक्ष्य के लिए इक्विटी में निवेश रखना चाहिए।

अक्सर लोग बाजार गिरते ही घबराकर अपनी SIP बंद कर देते हैं या केवल सुरक्षित विकल्पों के चक्कर में महंगाई को मात देने वाले रिटर्न नहीं ले पाते। रिटायरमेंट फंड बनाना मुश्किल नहीं है, बशर्ते निवेश में अनुशासन, धैर्य और पोर्टफोलियो का सही संतुलन बना रहे।

Parul Sharma

पारुल शर्मा 'दून हॉराइज़न' के बिज़नेस सेक्शन की एक अनुभवी आर्थिक एवं व्यापार संवाददाता हैं। राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था, बैंकिंग सेक्टर और पर्सनल फाइनेंस उनकी मुख्य बीट (Beat) है। पारुल को मार्केट के उतार-चढ़ाव और कंज्यूमर ट्रेंड्स का सटीक विश्लेषण करने में खास महारत हासिल है। वह अपनी रिपोर्टिंग में हमेशा प्रामाणिक सरकारी आंकड़ों और विश्वसनीय स्रोतों का ही इस्तेमाल करती हैं। पारुल का मुख्य उद्देश्य बजट, टैक्स नियमों और निवेश से जुड़ी अहम खबरों को बिना किसी लाग-लपेट के सीधे पाठकों तक पहुंचाना है, जिससे आम आदमी का वित्तीय ज्ञान और अधिक मजबूत हो सके।

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