मुंबई। भारतीय शेयर बाजार में लार्ज-कैप कंपनियों को हमेशा निवेश की सबसे सुरक्षित दीवार माना जाता रहा है, लेकिन साल 2026 की मौजूदा परिस्थितियों ने इस धारणा को हिला कर रख दिया है। मध्य पूर्व में जारी युद्ध के हालात और कच्चे तेल की अस्थिर कीमतों के बीच बाजार में मची भगदड़ ने उन पोर्टफोलियो को सबसे ज्यादा चोट पहुंचाई है, जो दिग्गज ‘ब्लू चिप’ शेयरों के भरोसे बैठे थे।
हैरानी की बात यह है कि बीते पांच वर्षों में टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) और इंफोसिस जैसी आईटी कंपनियों ने न केवल निवेशकों को निराश किया है, बल्कि उनके निवेश की वैल्यू में भी बड़ी सेंध लगाई है। ऐतिहासिक आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि लार्ज-कैप इंडेक्स में शामिल कई कंपनियां अपने फंडामेंटल्स मजबूत होने के बावजूद वैश्विक अनिश्चितताओं और सेक्टर-विशिष्ट चुनौतियों के आगे घुटने टेक रही हैं।
आईटी सेक्टर की सबसे बड़ी कंपनी TCS के शुद्ध मुनाफे में पिछले पांच वर्षों के दौरान 8% की वार्षिक वृद्धि (CAGR) देखी गई, लेकिन बाजार ने इसे हाथों-हाथ नहीं लिया। इस अवधि में कंपनी के शेयरों में 20% से अधिक की गिरावट आई है। यही हाल इंफोसिस का भी है, जिसके शेयर 8.88% तक टूट चुके हैं।

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि जेनेरेटिव एआई (GenAI) के उदय ने पारंपरिक सॉफ्टवेयर सेवाओं के अस्तित्व पर सवालिया निशान लगा दिए हैं, जिससे विदेशी संस्थागत निवेशक (FIIs) इन शेयरों से दूरी बना रहे हैं।
अदाणी ग्रीन एनर्जी ने वित्त वर्ष 2025 में 2,001 करोड़ रुपये का शुद्ध मुनाफा कमाकर शानदार रिकवरी की है, लेकिन निवेशकों का भरोसा अब भी डगमगाया हुआ है। पिछले पांच सालों में यह शेयर 26% से ज्यादा नीचे गिर चुका है।
इस गिरावट के पीछे कंपनी का आसमान छूता कर्ज सबसे बड़ा कारण है, जो सितंबर 2025 तक बढ़कर 88,153 करोड़ रुपये के पार पहुंच गया है। कर्ज और इक्विटी का यह असंतुलन निवेशकों को ऊंचे वैल्यूएशन पर खरीदारी करने से रोक रहा है।
पेंट सेक्टर के बेताज बादशाह एशियन पेंट्स के लिए भी राह आसान नहीं रही है। आदित्य बिड़ला समूह के ‘बिरला ओपस’ (Birla Opus) की बाजार में आक्रामक एंट्री ने एशियन पेंट्स के एकाधिकार को कड़ी चुनौती दी है। प्रतिस्पर्धा इतनी बढ़ गई है कि वित्त वर्ष 2025 में कंपनी की कुल बिक्री में 4% की गिरावट दर्ज की गई, जो पिछले 10 सालों में पहली बार हुआ है। पिछले पांच वर्षों में इस दिग्गज शेयर ने निवेशकों को 8.56% का नकारात्मक रिटर्न दिया है।
बीमा क्षेत्र की बड़ी खिलाड़ी एचडीएफसी लाइफ (HDFC Life) भी इस सूची में शामिल है। लंबी अवधि के ग्रोथ दावों के बावजूद कंपनी के शेयर पिछले पांच सालों में 12% से अधिक टूट चुके हैं। कंपनी की प्रॉफिट ग्रोथ मात्र 5% CAGR के आसपास सिमट कर रह गई है, जो इस सेक्टर की उम्मीदों के मुकाबले काफी कम है।
बाजार के जानकारों का कहना है कि इन शेयरों में गिरावट खरीदारी का मौका हो सकती है, बशर्ते निवेशक कंपनी के बढ़ते कर्ज और भविष्य की प्रतिस्पर्धा को बारीकी से समझें।










