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Hariyali Amavasya Surya Grahan : सूर्य ग्रहण के साए में हरियाली अमावस्या, जानें पितृ तर्पण और स्नान-दान का शुभ समय

दून हॉराइज़न ब्यूरो,
Published by: Ganga Updated Tue, 11 Aug 2026 10:16 AM IST

12 अगस्त को लगने वाला पूर्ण सूर्य ग्रहण भारतीय समयानुसार रात में होगा, जिसके कारण भारत में इसका सूतक काल मान्य नहीं रहेगा। ऐसे में श्रद्धालु बिना किसी रुकावट के सुबह हरियाली अमावस्या का स्नान, दान और पितृ तर्पण कर सकते हैं।

Hariyali Amavasya Surya Grahan

Hariyali Amavasya Surya Grahan : सावन महीने की अमावस्या यानी हरियाली अमावस्या का धार्मिक दृष्टि से बहुत खास महत्व है। इस दिन भगवान शिव की पूजा के साथ-साथ पितरों की शांति के लिए स्नान, दान और तर्पण किया जाता है।

इस बार 12 अगस्त को हरियाली अमावस्या के दिन ही पूर्ण सूर्य ग्रहण भी लग रहा है, जिससे कई लोगों के मन में पूजा-पाठ और सूतक काल को लेकर असमंजस बना हुआ है।

अगर आप भी इस बात को लेकर चिंतित हैं कि ग्रहण के कारण अमावस्या की पूजा या तर्पण रुक जाएगा, तो राहत की बात यह है कि ऐसा बिल्कुल नहीं है।

आइए समझते हैं कि भारत में इस ग्रहण का क्या प्रभाव रहेगा और आपको पूजा-विधि कैसे पूरी करनी है।

भारत में ग्रहण का समय और सूतक का सच

भारतीय मानक समय के अनुसार यह सूर्य ग्रहण 12 अगस्त की रात लगभग 9:00 बजे शुरू होगा और 13 अगस्त को तड़के 4:25 बजे समाप्त होगा।

चूंकि ग्रहण के दौरान भारत में रात का समय रहेगा और सूर्य देव दिखाई नहीं देंगे, इसलिए यह ग्रहण देश में अदृश्य रहेगा।

शास्त्रों के अनुसार, जो ग्रहण दिखाई नहीं देता, उसका सूतक काल भी मान्य नहीं होता। इसलिए मंदिरों के कपाट बंद करने या पूजा-पाठ रोकने की कोई जरूरत नहीं है।

अमावस्या पर कैसे करें स्नान और दान?

ग्रहण का प्रभाव भारत में न होने के कारण आप 12 अगस्त की सुबह अपनी दिनचर्या और धार्मिक अनुष्ठान सामान्य रूप से पूरा कर सकते हैं।

पवित्र स्नान: सुबह जल्दी उठकर किसी पवित्र नदी या घर पर ही नहाने के पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करें।

शिव पूजन: सावन की अमावस्या होने के कारण इस दिन शिवलिंग पर जल, बेलपत्र और दूध अर्पित करना बेहद शुभ माना जाता है।

दान-पुण्य: स्नान के बाद सामर्थ्य अनुसार जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र या फल का दान करें।

पितृ तर्पण की आसान विधि

हरियाली अमावस्या पर पूर्वजों की आत्मा की तृप्ति के लिए तर्पण करने की परंपरा है। इसके लिए सुबह स्नान के बाद दक्षिण दिशा की ओर मुंह करके बैठें।

हाथ में जल, काले तिल और कुश लेकर पितरों का स्मरण करें और जल अर्पित करें। श्रद्धापूर्वक किया गया यह छोटा सा कार्य पितरों का आशीर्वाद दिलाता है।

यूरोप समेत दुनिया के कई हिस्सों में भले ही इस दुर्लभ सूर्य ग्रहण को देखने का उत्साह हो, लेकिन भारत में श्रद्धालु बिना किसी संशय के हरियाली अमावस्या के सभी धार्मिक कार्य पूरे उत्साह के साथ कर सकते हैं।

Ganga

गंगा 'दून हॉराइज़न' में धर्म और ज्योतिष संवाददाता के पद पर कार्यरत हैं। उन्हें वैदिक ज्योतिष, पंचांग, व्रत-त्योहार और वास्तु शास्त्र का गहरा ज्ञान और वर्षों का अनुभव है। गंगा का उद्देश्य सिर्फ दैनिक राशिफल बताना नहीं, बल्कि धर्म और अध्यात्म से जुड़ी सटीक, शोध-आधारित और प्रामाणिक जानकारी आम जनमानस तक पहुंचाना है। वह ज्योतिषीय गणनाओं और धार्मिक मान्यताओं का गहराई से विश्लेषण करती हैं। उनकी तथ्यपरक लेखनी पाठकों को अंधविश्वास से दूर रखकर एक सकारात्मक मार्गदर्शन प्रदान करती है, जिससे वे डिजिटल पाठकों के बीच एक बेहद भरोसेमंद नाम बन गई हैं।

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