Hariyali Teej Puja Samagri : सावन का महीना सुहागिन महिलाओं और कन्याओं के लिए बेहद खास होता है। इस महीने की शुक्ल पक्ष तृतीया को हरियाली तीज मनाई जाती है।
यह पर्व दांपत्य जीवन में प्रेम, सुख-समृद्धि और अखंड सौभाग्य की कामना से जुड़ा है। इस दिन महिलाएं निर्जला व्रत रखकर भगवान शिव, माता पार्वती और प्रथम पूज्य श्री गणेश की आराधना करती हैं।
कुंवारी कन्याएं भी मनचाहे वर की प्राप्ति के लिए यह व्रत श्रद्धा से रखती हैं।
इस बार बन रहे हैं 6 विशेष शुभ योग
हरियाली तीज का दिन ग्रहों और नक्षत्रों की स्थिति के हिसाब से बेहद शुभ रहने वाला है। इस दिन पूरे 6 मंगलकारी योग बन रहे हैं, जिससे की गई पूजा का फल कई गुना बढ़ जाता है:
- शिव योग: सुबह 07:09 बजे तक रहेगा।
- सिद्ध योग: सुबह 07:09 बजे से अगले दिन यानी 16 अगस्त की सुबह 05:21 बजे तक रहेगा।
- रवि योग: सुबह 05:50 बजे से 16 अगस्त को तड़के 03:25 बजे तक रहेगा।
इनके साथ ही कुंडली और पंचांग में बुधादित्य योग, त्रिग्रही योग और हंसराज योग का संयोग भी बन रहा है।
हरियाली तीज 2026: तिथि और पूजा का सबसे अच्छा समय
पंचांग के अनुसार तृतीया तिथि की शुरुआत 14 अगस्त की शाम 06:46 बजे से होगी और यह 15 अगस्त को शाम 05:28 बजे समाप्त होगी। उदयातिथि और प्रदोष काल के आधार पर हरियाली तीज का व्रत 15 अगस्त (शनिवार) को ही रखा जाएगा।
हरियाली तीज की मुख्य पूजा शाम के समय यानी प्रदोष काल में की जाती है:
- पूजा का सबसे श्रेष्ठ समय: शाम 07:01 बजे से
- लाभ-उन्नति मुहूर्त: शाम 07:01 बजे से रात 08:22 बजे तक
- राहुकाल समय: सुबह 09:08 बजे से सुबह 10:47 बजे तक (इस समय पूजा या कोई नया कार्य शुरू करने से बचें)
पूजन के लिए पहले से जुटा लें ये सामग्री
हरियाली तीज की पूजा विधि-विधान से करने के लिए सभी जरूरी सामग्री पहले से तैयार रखना बेहतर रहता है।
मूर्तियां और वस्त्र
- भगवान शिव, माता पार्वती और गणेश जी की प्रतिमा/तस्वीर (या शुद्ध मिट्टी)
- शिव जी और गणेश जी के लिए नए वस्त्र व जनेऊ
- माता पार्वती के लिए हरी साड़ी और चुनरी
- सुहाग पिटारी (16 श्रृंगार का सामान):
- सिंदूर, बिंदी, हरी चूड़ियां, कुमकुम
- मेहंदी, आलता (महौर), बिछिया, कंघी, शीशा और इत्र
पूजन एवं अभिषेक सामग्री
- मिट्टी का कलश, कच्चा सूत, पीला कपड़ा और केले के पत्ते
- बेलपत्र, भांग, धतूरा, शमी पत्र, दूर्वा और अक्षत
- पान के पत्ते, सुपारी, जटा वाला नारियल
- गाय का कच्चा दूध, शुद्ध घी, दही, शहद, गंगाजल
- कपूर, धूप, दीपक, रुई की बाती, गुलाल
- हरियाली तीज व्रत कथा और आरती की पुस्तक
पूजा की सरल विधि
सुबह स्नान करके हरे रंग के वस्त्र धारण करें और व्रत का संकल्प लें। शाम को शुभ मुहूर्त में घर के उत्तर-पूर्व कोने या पूजा घर में साफ चौकी पर पीला कपड़ा बिछाएं।
भगवान शिव, मां पार्वती और गणेश जी की स्थापना करें। शिवलिंग का गंगाजल, दूध, दही, घी और शहद से अभिषेक करें। बेलपत्र और धतूरा अर्पित करें।
मां पार्वती को सोलह श्रृंगार और हरी चुनरी चढ़ाएं। धूप-दीप जलाकर हरियाली तीज की व्रत कथा सुनें और अंत में आरती करें।
भद्रा को लेकर भ्रम दूर करें: पारण का समय
कुछ लोगों के मन में भद्रा को लेकर असमंजस रहता है। स्पष्ट कर दें कि 15 अगस्त को पूजा के समय भद्रा का कोई प्रभाव नहीं रहेगा।
भद्रा 16 अगस्त को सुबह 05:05 बजे से शुरू होकर शाम 04:51 बजे तक रहेगी। यह भद्रा पाताल लोक में वास करेगी, जिसका पृथ्वी पर कोई अशुभ प्रभाव नहीं माना जाता।
इसलिए 16 अगस्त की सुबह स्नान और दैनिक पूजा के बाद व्रत का पारण बिना किसी संकोच के किया जा सकता है।











