ताज़ा समाचार देश विदेश क्राइम बिज़नेस खेल मनोरंजन ऑटो गैजेट्स धर्म राशिफल आज का पंचांग
हेल्थ लाइफस्टाइल करियर ट्रेंडिंग

Hariyali Teej Vrat Katha : माता पार्वती को 108 जन्मों बाद कैसे मिले भगवान शिव? जानें हरियाली तीज की पौराणिक कथा

दून हॉराइज़न ब्यूरो,
Published by: Ganga Updated Fri, 14 Aug 2026 10:34 AM IST

सावन मास में आने वाला हरियाली तीज का पर्व पति की लंबी उम्र और सुखद वैवाहिक जीवन के लिए रखा जाता है। मान्यता है कि इस दिन मां पार्वती की 108 जन्मों की कठिन तपस्या के बाद भगवान शिव ने उन्हें पत्नी रूप में स्वीकार किया था।

Hariyali Teej Vrat Katha

Hariyali Teej Vrat Katha : सावन महीने में चारों तरफ फैली हरियाली के बीच हरियाली तीज का त्योहार बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है।

यह पर्व मुख्य रूप से सुहागिन महिलाओं के लिए बेहद खास होता है। इस दिन स्त्रियां अपने पति की लंबी उम्र और सुखी शादीशुदा जिंदगी की कामना के लिए निर्जला व्रत रखती हैं।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह दिन भगवान शिव और माता पार्वती के पुनर्मिलन का प्रतीक है। यही वजह है कि इस व्रत में भगवान शिव और माता पार्वती की एक साथ पूजा की जाती है और उन्हें समर्पित कथा सुनी जाती है।

108 जन्मों का इंतजार और कठोर तपस्या

शिव पुराण में वर्णित पौराणिक कथा के अनुसार, माता पार्वती ने बाल्यावस्था में ही भगवान शिव को अपने पति के रूप में पाने का संकल्प ले लिया था। इसके लिए उन्होंने एक-दो साल नहीं, बल्कि कई जन्मों तक कठिन तपस्या की।

कहा जाता है कि माता पार्वती ने 107 जन्मों तक भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए अनगिनत प्रयास और तप किए, लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली।

इसके बाद अपने 108वें जन्म में उन्होंने हिमालय पर रहकर अन्न-जल का त्याग कर दिया। घने जंगलों और गुफाओं में रहते हुए उन्होंने केवल पत्ते, कंद-मूल खाकर और बाद में सिर्फ हवा के सहारे हजारों सालों तक घोर तप किया।

जब भोलेनाथ ने दिया वरदान

सावन मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को माता पार्वती की इस निश्छल भक्ति और अटूट समर्पण को देखकर भगवान शिव अत्यंत प्रसन्न हुए।

उन्होंने प्रकट होकर मां पार्वती की तपस्या को स्वीकार किया और उन्हें अपनी पत्नी के रूप में अपनाने का वरदान दिया।

चूंकि इसी पावन तिथि पर शिव और पार्वती का मिलन हुआ था, इसलिए माता पार्वती को ‘तीज माता’ के नाम से भी जाना जाने लगा।

तब से लेकर आज तक हरियाली तीज पर सुहागिन महिलाएं इस कथा को पढ़कर और सुनकर अपने सुहाग की रक्षा का आशीर्वाद मांगती हैं।

हरियाली तीज पूजन सामग्री लिस्ट

हरियाली तीज की पूजा के लिए कुछ जरूरी सामग्रियों का होना आवश्यक माना जाता है। पूजा की थाली तैयार करने से पहले यह लिस्ट जरूर देख लें:

श्रृंगार सामग्री: सिंदूर, मेहंदी, हरी चूड़ियां, बिंदी, महावर (आलता), काजल, कंघी और आभूषण।

भगवान के वस्त्र: माता पार्वती के लिए लाल या हरी चुनरी और भगवान शिव के लिए नए वस्त्र।

प्राकृतिक और पूजा की वस्तुएं: मूर्ति बनाने के लिए गीली काली मिट्टी या बालू, बेलपत्र, धतूरा, शमी पत्र, केले का पत्ता और फूल।

भोग सामग्री: पंचामृत, मौसमी फल और पारंपरिक मिठाइयां जैसे घेवर या ठेकुआ।

इस दिन का खास महत्व

हरियाली तीज के दिन महिलाएं पारंपरिक रूप से हरे रंग के कपड़े और चूड़ियां पहनती हैं। हाथों में मेहंदी सजाने, झूला झूलने और लोकगीत गाने की पुरानी परंपरा आज भी बड़े चाव से निभाई जाती है।

मान्यता है कि जो सुहागिन महिला सच्चे मन से इस दिन व्रत रखकर पूजन सामग्री अर्पित करती है, उसके घर में हमेशा सुख-समृद्धि बनी रहती है।

Ganga

गंगा 'दून हॉराइज़न' में धर्म और ज्योतिष संवाददाता के पद पर कार्यरत हैं। उन्हें वैदिक ज्योतिष, पंचांग, व्रत-त्योहार और वास्तु शास्त्र का गहरा ज्ञान और वर्षों का अनुभव है। गंगा का उद्देश्य सिर्फ दैनिक राशिफल बताना नहीं, बल्कि धर्म और अध्यात्म से जुड़ी सटीक, शोध-आधारित और प्रामाणिक जानकारी आम जनमानस तक पहुंचाना है। वह ज्योतिषीय गणनाओं और धार्मिक मान्यताओं का गहराई से विश्लेषण करती हैं। उनकी तथ्यपरक लेखनी पाठकों को अंधविश्वास से दूर रखकर एक सकारात्मक मार्गदर्शन प्रदान करती है, जिससे वे डिजिटल पाठकों के बीच एक बेहद भरोसेमंद नाम बन गई हैं।

Leave a Comment