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Hariyali Teej Vrat Vidhi : पहली बार रख रही हैं हरियाली तीज का व्रत? पूजा से पहले जान लें ये जरूरी नियम और सही विधि

हरियाली तीज का व्रत विवाहित महिलाओं के लिए बेहद खास और पवित्र माना जाता है। अगर आप पहली बार यह व्रत रखने जा रही हैं, तो सही पूजा विधि, सामग्री और परंपराओं का ध्यान रखकर इसे बेहद फलदायी बना सकती हैं।

Published On: August 14, 2026 10:47 AM
Hariyali Teej Vrat Vidhi

Hariyali Teej Vrat Vidhi : सावन का महीना आते ही प्रकृति के साथ-साथ हमारे त्योहारों में भी एक खास रौनक़ देखने को मिलती है। इसी मौसम में आने वाली सावन मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को हरियाली तीज के रूप में मनाया जाता है।

यह पर्व भगवान शिव और माता पार्वती के पुनर्मिलन का प्रतीक माना जाता है। सुहागिन महिलाएं अपने अखंड सौभाग्य और सुखी शादीशुदा जिंदगी की कामना के लिए यह व्रत रखती हैं, जबकि कुंवारी लड़कियां अच्छे वर की प्राप्ति के लिए यह पूजा करती हैं।

अगर इस साल आप पहली बार हरियाली तीज का व्रत उठाने जा रही हैं, तो मन में कई तरह के सवाल होना स्वाभाविक है। व्रत का फल पूरी तरह से मिले, इसके लिए पूजा को सही विधि और परंपरा के अनुसार करना जरूरी होता है।

आइए जानते हैं कि इस दिन आपको सुबह से लेकर शाम तक किस तरह पूजा और नियम का पालन करना चाहिए।

हरियाली तीज पर क्यों खास है मायके का ‘सिंधारा’?

हरियाली तीज की सबसे खूबसूरत परंपराओं में से एक है ‘सिंधारा’। इस दिन मायके पक्ष की तरफ से बेटी के घर सुहाग का सामान भेजा जाता है।

सिंधारे में क्या होता है: इसमें हरे रंग की साड़ी, चूड़ियां, मेहंदी, मिष्ठान और श्रृंगार का सामान शामिल होता है।

पहनावे का नियम: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, तीज के दिन मायके से आई साड़ी और श्रृंगार सामग्री का उपयोग करना बहुत शुभ माना जाता है। सावन के इस पर्व में हरे रंग के कपड़े पहनना प्रकृति और सौभाग्य दोनों का प्रतीक है।

सोलह श्रृंगार और मेहंदी का महत्व

हरियाली तीज पूरी तरह से सौंदर्य, प्रेम और रिश्तों में मिठास का पर्व है। इस दिन महिलाओं का सोलह श्रृंगार करना बहुत खास माना गया है।

मेहंदी रचाएं: तीज से एक दिन पहले या तीज की सुबह हाथों में मेहंदी लगाना शुभ माना जाता है।

झूला और सहेलियों संग उत्सव: इस दिन महिलाएं एक साथ इकट्ठा होकर लोकगीत गाती हैं, झूला झूलती हैं और खुशियां बांटती हैं।

पहली बार व्रत कर रही हैं? जानें स्टेप-बाय-स्टेप पूजा विधि

यदि आपका पहला व्रत है, तो पूजा की तैयारी पहले से करके रखें ताकि ऐन मौके पर हड़बड़ाहट न हो।

सुबह की शुरुआत और संकल्प: सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ कपड़े (विशेषकर हरे रंग के) पहनें। इसके बाद हाथ में जल लेकर व्रत रखने का मन से संकल्प लें।

पूजा की तैयारी: शुभ मुहूर्त में घर के मंदिर को साफ करें। एक चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाकर भगवान शिव और माता पार्वती की मूर्ति या चित्र स्थापित करें।

पूजा सामग्री अर्पण: माता पार्वती को सोलह श्रृंगार की सामग्री अर्पित करें। भगवान शिव को जल, कच्चा दूध, बेलपत्र, भांग, धतूरा, अक्षत और फूल चढ़ाएं।

कथा और आरती: धूप-दीप जलाकर हरियाली तीज की व्रत कथा पढ़ें या सुनें। अंत में शिव-पार्वती की आरती करें।

सास का आशीर्वाद और व्रत खोलने का सही तरीका

इस त्योहार में परिवार के बड़ों के प्रति आदर और स्नेह व्यक्त करने की सुंदर परंपरा है।

सुहाग सामग्री का दान: पूजा संपन्न होने के बाद, अपने घर की सास या जेठानी को सुहाग का सामान (कपड़े, मिठाई, श्रृंगार सामग्री) भेंट स्वरूप देकर उनके चरण स्पर्श करें और आशीर्वाद लें।

व्रत कैसे खोलें: शाम की पूजा और कथा पूरी होने के बाद, महिलाएं अपने पति के चरण स्पर्श करके उनका आशीर्वाद लेती हैं। इसके बाद ही जल ग्रहण करके अपना व्रत पूर्ण करती हैं।

इन बातों का रखें खास ध्यान

पहली बार व्रत रख रही हैं तो अपनी सेहत का भी ध्यान रखें।

अगर निर्जला व्रत रखना संभव न हो, तो अपने घर की परंपरा के अनुसार फलाहार या फलाहारी जल का उपयोग कर सकती हैं।

मन में किसी के प्रति नकारात्मक विचार न लाएं और शांत मन से पूजा करें।

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Ganga

गंगा 'दून हॉराइज़न' में धर्म और ज्योतिष संवाददाता के पद पर कार्यरत हैं। उन्हें वैदिक ज्योतिष, पंचांग, व्रत-त्योहार और वास्तु शास्त्र का गहरा ज्ञान और वर्षों का अनुभव है। गंगा का उद्देश्य सिर्फ दैनिक राशिफल बताना नहीं, बल्कि धर्म और अध्यात्म से जुड़ी सटीक, शोध-आधारित और प्रामाणिक जानकारी आम जनमानस तक पहुंचाना है। वह ज्योतिषीय गणनाओं और धार्मिक मान्यताओं का गहराई से विश्लेषण करती हैं। उनकी तथ्यपरक लेखनी पाठकों को अंधविश्वास से दूर रखकर एक सकारात्मक मार्गदर्शन प्रदान करती है, जिससे वे डिजिटल पाठकों के बीच एक बेहद भरोसेमंद नाम बन गई हैं।

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