हेल्थ डेस्क, 05 अप्रैल 2026 (दून हॉराइज़न)। भागदौड़ भरी जिंदगी और खराब खान-पान से उपजी शारीरिक कमजोरी को दूर करने में दूध और छुहारे का आयुर्वेदिक (Ayurvedic Energy Booster) मेल किसी चमत्कार से कम नहीं है।
आयुर्वेदमें इस संयोजन को ‘बल्य’ की श्रेणी में रखा गया है, जिसका सीधा अर्थ है वह आहार जो शरीर को ओज और प्राणशक्ति प्रदान करे। बाजार में मिलने वाले कृत्रिम सप्लीमेंट्स के बजाय विशेषज्ञ सदियों पुराने इस नुस्खे को प्राथमिकता देते हैं।
छुहारा अपनी मिठास और गर्म तासीर के लिए जाना जाता है, वहीं दूध एक संपूर्ण आहार है जो शरीर को शीतलता और तृप्ति देता है।
जब इन दोनों को एक साथ उबाला जाता है, तो इनके औषधीय गुण कई गुना बढ़ जाते हैं, जो शरीर की सातों धातुओं (रस, रक्त, मांस, मेद, अस्थि, मज्जा और शुक्र) को गहराई से पोषित करते हैं।
दुबलेपन की समस्या से जूझ रहे लोगों के लिए यह मिश्रण प्राकृतिक वजन बढ़ाने वाली दवा की तरह काम करता है। यह न केवल मांसपेशियों का घनत्व बढ़ाता है, बल्कि शरीर में जमा सुस्ती और मानसिक थकान को भी जड़ से खत्म करता है।
पुरुषों में यह शारीरिक क्षमता और स्टैमिना को बेहतर बनाता है, जबकि महिलाओं के लिए यह आयरन का बेहतरीन स्रोत है, जो एनीमिया जैसी गंभीर समस्या में खून की कमी को पूरा करता है।
सर्दियों के मौसम में इसका महत्व और भी बढ़ जाता है क्योंकि यह शरीर के आंतरिक तापमान को बनाए रखता है। छुहारे वाला दूध पीने से जोड़ों की जकड़न में आराम मिलता है और श्वसन तंत्र को मजबूती मिलती है, जिससे सूखी खांसी और सर्दी-जुकाम जैसी दिक्कतें पास नहीं फटकतीं।
यह नींद की गुणवत्ता में सुधार कर तनाव को कम करने में भी सहायक है। बच्चों और बुजुर्गों के स्वास्थ्य के लिए भी यह एक अनिवार्य टॉनिक है। जहाँ बढ़ते बच्चों में यह मानसिक विकास और ऊर्जा का स्तर बढ़ाता है, वहीं बुजुर्गों में यह कैल्शियम की आपूर्ति कर हड्डियों को खोखला होने से बचाता है।
त्वचा विशेषज्ञों की मानें तो इसका नियमित सेवन त्वचा के रूखेपन को खत्म कर चेहरे पर एक नैसर्गिक चमक और कसावट लाता है।










