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मसल रिकवरी के लिए बेस्ट हैं ये देसी शाकाहारी डाइट, आज ही रूटीन में करें शामिल

शरीर की मजबूती और मांसपेशियों की रिकवरी के लिए प्लांट-बेस्ड प्रोटीन मांसाहारी स्रोतों के मुकाबले अधिक सुरक्षित और प्रभावी विकल्प बनकर उभरा है। शाकाहारी आहार न केवल कोलेस्ट्रॉल के जोखिम को कम करता है बल्कि फाइबर के जरिए शरीर की ऊर्जा प्रणाली को भी बेहतर बनाए रखता है।

Published On: April 5, 2026 3:34 AM
Plant Based Protein Vs Meat Protein

HIGHLIGHTS

  • मांसाहारी प्रोटीन में मौजूद हाई कोलेस्ट्रॉल और खराब वसा हृदय रोगों का खतरा बढ़ाते हैं।
  • बादाम और अंकुरित दालें कैल्शियम और प्रोटीन के मामले में दूध व मीट का सटीक विकल्प हैं।
  • शरीर के कुल वजन के प्रति किलोग्राम पर 1 ग्राम प्रोटीन का सेवन स्वास्थ्य के लिए अनिवार्य है।

हेल्थ डेस्क, 05 अप्रैल 2026 (दून हॉराइज़न)। मांसपेशियों की मजबूती और शारीरिक विकास के लिए प्रोटीन (Plant Based Protein Vs Meat Protein) को सबसे अनिवार्य तत्व माना जाता है, लेकिन इसे प्राप्त करने के स्रोतों को लेकर अब वैश्विक नजरिया तेजी से बदल रहा है।

जिम जाने वाले युवाओं और एथलीट्स के बीच लंबे समय से यह धारणा रही है कि बिना अंडे या मीट के मसल रिकवरी मुमकिन नहीं है, जबकि हकीकत इसके उलट है।

वैज्ञानिक शोध और आहार विशेषज्ञों के अनुसार, पौधों से प्राप्त प्रोटीन यानी ‘प्लांट-बेस्ड प्रोटीन’ शरीर के अंगों की कार्यप्रणाली के लिए मांसाहारी प्रोटीन की तुलना में कहीं अधिक सुपाच्य और लाभकारी साबित हो रहा है।

मीट और रेड मीट के सेवन से शरीर में खराब वसा (सैचुरेटेड फैट) और कोलेस्ट्रॉल की मात्रा बढ़ती है, जो सीधे तौर पर दिल की बीमारियों का कारण बनती है।

इसके विपरीत, शाकाहारी स्रोतों में कोलेस्ट्रॉल शून्य होता है और इनमें मौजूद फाइबर शरीर के विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने में मदद करता है।

दूध और डेयरी उत्पादों को अक्सर कैल्शियम का इकलौता जरिया मान लिया जाता है, लेकिन बड़ी आबादी लैक्टोज असहिष्णुता (Lactose Intolerance) से जूझ रही है, जिससे उन्हें पाचन की गंभीर समस्याएं होती हैं।

ऐसे में बादाम कैल्शियम का एक उत्कृष्ट वैकल्पिक स्रोत बनकर उभरा है। वहीं, प्रोटीन की कमी को पूरा करने के लिए अंकुरित दालों, सोयाबीन और टोफू का सेवन मांस के मुकाबले अधिक शुद्ध ऊर्जा प्रदान करता है।

प्रोटीन की सही मात्रा का निर्धारण आपके शरीर के वजन पर निर्भर करता है। एक सामान्य मानक के अनुसार, यदि किसी व्यक्ति का वजन 50 किलोग्राम है, तो उसे दैनिक आधार पर कम से कम 50 ग्राम प्रोटीन की आवश्यकता होती है।

इस जरूरत को पूरा करने के लिए केवल डाइट में बदलाव ही काफी है। मूंग की दाल को अंकुरित करके खाने, मूंग का चीला, टोफू सलाद, और राजमा या बीन्स की टिक्की जैसे विकल्प न केवल स्वादिष्ट हैं बल्कि पोषण से भी भरपूर हैं।

सूखे मेवे, बीज, हरी सब्जियां, कच्ची मूंगफली और अनाज को मिलाकर एक संतुलित चार्ट तैयार किया जा सकता है। यह ध्यान रखना आवश्यक है कि प्लांट-बेस्ड डाइट शरीर को भारीपन नहीं देती और वर्कआउट के बाद मांसपेशियों की मरम्मत तेजी से करती है।

हालांकि, यदि आपको किसी विशेष खाद्य पदार्थ से एलर्जी है, तो आहार में बड़ा बदलाव करने से पहले किसी विशेषज्ञ या डॉक्टर से परामर्श जरूर लें।


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Rama Pun

रमा पुन 'दून हॉराइज़न' में हेल्थ और लाइफस्टाइल संपादक के रूप में अपनी अहम जिम्मेदारी निभा रही हैं। स्वास्थ्य, फिटनेस, खानपान और मानसिक स्वास्थ्य (Mental Health) के विषयों पर उनकी पकड़ बेहद मजबूत है। रमा का फोकस हमेशा मेडिकल एक्सपर्ट्स की पुख्ता सलाह और वैज्ञानिक शोध पर आधारित (Evidence-based) खबरें लिखने पर रहता है। उनका स्पष्ट मानना है कि सेहत से जुड़ी कोई भी जानकारी शत-प्रतिशत प्रामाणिक होनी चाहिए। अपनी आकर्षक और तथ्यपरक लेखनी से वे पाठकों को एक स्वस्थ, तनावमुक्त और संतुलित जीवनशैली अपनाने के लिए निरंतर प्रेरित और जागरूक करती हैं।

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