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Unani Treatment For Weakness : ज्यादा व्यायाम भी पहुंचा सकता है नुकसान, यूनानी चिकित्सा से समझें संतुलन

यूनानी चिकित्सा पद्धति में स्वस्थ जीवन के लिए शरीर की गति और आराम के बीच संतुलन को 'हरकत-ओ-सुकून बदनी' के नाम से अनिवार्य माना गया है।

Published On: February 19, 2026 3:54 PM
Unani Treatment For Weakness

HIGHLIGHTS

  • यूनानी चिकित्सा में शरीर की सही गति (हरकत) और आराम (सुकून) का संतुलन ही अच्छे स्वास्थ्य का आधार है।
  • शारीरिक गतिविधियों से होने वाली सफाई को 'तनकिया' कहा जाता है, जो अंगों को स्वस्थ रखने में मदद करती है।
  • विश्राम के समय शरीर की आंतरिक शक्ति भोजन पचाने, ऊतकों की मरम्मत और ऊर्जा संचय का कार्य करती है।
  • व्यायाम का तरीका व्यक्ति के मिजाज (गर्म या ठंडा) और मौसम के अनुसार बदलना चाहिए।
  • अत्यधिक व्यायाम या लगातार बैठे रहने (आलस्य) दोनों ही शरीर के लिए नुकसानदेह बताए गए हैं।

Unani Treatment For Weakness : यूनानी चिकित्सा पद्धति स्वास्थ्य को केवल बीमारी की अनुपस्थिति नहीं, बल्कि शरीर और मन के बीच एक सूक्ष्म संतुलन मानती है। इस प्राचीन पद्धति में स्वस्थ जीवन का सबसे महत्वपूर्ण मंत्र ‘हरकत-ओ-सुकून बदनी’ को बताया गया है। इसका सरल अर्थ है शरीर की सही गति और आवश्यक आराम के बीच का सामंजस्य।

विशेषज्ञों का मानना है कि शरीर को गतिशील रहना चाहिए, लेकिन साथ ही समय पर पर्याप्त विश्राम भी उतना ही अनिवार्य है। यह संतुलन न केवल हमें शारीरिक रूप से फिट रखता है, बल्कि मानसिक शक्ति को भी बनाए रखने में मदद करता है।

तनकिया और आंतरिक ऊर्जा का विज्ञान

जब हम हल्की या मध्यम शारीरिक गतिविधि करते हैं, तो शरीर में जमा व्यर्थ पदार्थ और अवशेष बाहर निकलने लगते हैं। यूनानी चिकित्सा में इस शुद्धिकरण प्रक्रिया को ‘तनकिया’ कहा जाता है। यह सफाई त्वचा और शरीर के आंतरिक अंगों को बेहतर तरीके से कार्य करने के योग्य बनाती है। दूसरी ओर, जब हम आराम करते हैं, तो शरीर की आंतरिक शक्ति पूरी तरह सक्रिय हो जाती है।

विश्राम के इसी समय में हमारा शरीर भोजन को पचाने, क्षतिग्रस्त ऊतकों की मरम्मत करने और भविष्य के लिए ऊर्जा जमा करने का काम करता है। यही वह समय है जब शरीर को रोगों से लड़ने के लिए कुदरती अवसर मिलता है।

स्वभाव और मौसम के अनुसार व्यायाम

यूनानी चिकित्सा का एक अनूठा पहलू यह है कि यह हर व्यक्ति के लिए एक जैसा नियम लागू नहीं करती। उम्र, लिंग, शारीरिक बनावट और स्वभाव (मिजाज) के अनुसार व्यायाम और आराम का तरीका अलग-अलग हो सकता है। उदाहरण के तौर पर, जिनका मिजाज गर्म है, उन्हें गर्मियों में बहुत भारी कसरत के बजाय हल्की गतिविधियों पर ध्यान देना चाहिए, जबकि सर्दियों में वे अधिक सक्रिय रह सकते हैं। इ

सी तरह, ठंडे मिजाज वाले लोगों को सर्दियों में हल्की और गर्मियों में नियमित शारीरिक गतिविधि अपनानी चाहिए। यह पद्धति सलाह देती है कि व्यक्ति को अपनी प्रकृति पहचानकर ही जीवनशैली चुननी चाहिए।

स्वस्थ रहने के व्यावहारिक उपाय

स्वस्थ रहने के लिए कुछ बहुत ही सरल लेकिन असरदार तरीके अपनाए जा सकते हैं। प्रतिदिन सुबह या शाम टहलना, हल्का दौड़ना, योग या स्ट्रेचिंग करना शरीर की सफाई और ताकत दोनों के लिए जरूरी है। आलस्य सबसे बड़ा दुश्मन है; इसलिए लंबे समय तक एक ही जगह बैठे रहने से बचना चाहिए।

यदि काम ऐसा है जिसमें बैठना मजबूरी हो, तो थोड़ी-थोड़ी देर में उठकर स्ट्रेचिंग करनी चाहिए। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि व्यायाम उतना ही करें जितना शरीर झेल सके, क्योंकि अत्यधिक थकावट ऊर्जा को पूरी तरह समाप्त कर सकती है। पर्याप्त नींद और छोटे ब्रेक शरीर को रिकवर करने का मौका देते हैं।


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Rama Pun

रमा पुन 'दून हॉराइज़न' में हेल्थ और लाइफस्टाइल संपादक के रूप में अपनी अहम जिम्मेदारी निभा रही हैं। स्वास्थ्य, फिटनेस, खानपान और मानसिक स्वास्थ्य (Mental Health) के विषयों पर उनकी पकड़ बेहद मजबूत है। रमा का फोकस हमेशा मेडिकल एक्सपर्ट्स की पुख्ता सलाह और वैज्ञानिक शोध पर आधारित (Evidence-based) खबरें लिखने पर रहता है। उनका स्पष्ट मानना है कि सेहत से जुड़ी कोई भी जानकारी शत-प्रतिशत प्रामाणिक होनी चाहिए। अपनी आकर्षक और तथ्यपरक लेखनी से वे पाठकों को एक स्वस्थ, तनावमुक्त और संतुलित जीवनशैली अपनाने के लिए निरंतर प्रेरित और जागरूक करती हैं।

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