वाशिंगटन, 19 फरवरी 2026। (India US Trade Tariff 2026) वाशिंगटन और नई दिल्ली के बीच व्यापारिक रिश्तों में तल्खी कम होने का नाम नहीं ले रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से भारतीय वस्तुओं पर लगाए जा रहे भारी टैरिफ को लेकर अब अमेरिका के भीतर ही विरोध के स्वर तेज हो गए हैं। अमेरिकी सांसद ब्रैड शर्मन ने दावा किया है कि ट्रंप प्रशासन भारत के खिलाफ कड़े आर्थिक प्रतिबंध और टैरिफ लगाने के लिए महज बहाने तलाश रहा है। शर्मन के अनुसार, भारत को एक रणनीतिक साझेदार होने के बावजूद व्यापारिक मोर्चे पर अलग-थलग कर निशाना बनाया जा रहा है, जो दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों के लिए चिंताजनक है।
रूसी तेल का बहाना और भेदभावपूर्ण नीति
सांसद ब्रैड शर्मन ने तर्क दिया कि राष्ट्रपति ट्रंप रूसी तेल खरीद को आधार बनाकर भारत पर दबाव डाल रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि जब हंगरी जैसा देश अपना 90 फीसदी तेल रूस से आयात कर रहा है और उस पर कोई टैरिफ नहीं है, तो भारत को क्यों घेरा जा रहा है? शर्मन ने स्पष्ट किया कि चीन भी रूस से भारी मात्रा में तेल खरीद रहा है, लेकिन भारत पर जिस तरह के विशिष्ट प्रतिबंध लगाए जा रहे हैं, वे तर्कसंगत नहीं हैं। आंकड़ों के मुताबिक, भारत अपनी जरूरत का मात्र 21 प्रतिशत तेल रूस से लेता है, फिर भी उसे व्यापारिक दंड का सामना करना पड़ रहा है।
भारतीय निर्यात में भारी गिरावट के आंकड़े
वाणिज्य मंत्रालय द्वारा जारी ताजा आंकड़ों ने व्यापारिक चिंताओं को और बढ़ा दिया है। जनवरी 2026 में अमेरिका को होने वाला भारतीय वस्तु निर्यात 21.77 प्रतिशत घटकर महज 6.6 अरब अमेरिकी डॉलर रह गया है। इससे पहले पिछले साल के सितंबर, अक्टूबर और दिसंबर महीनों में भी निर्यात में गिरावट दर्ज की गई थी। हालांकि, नवंबर में 22.61 प्रतिशत की मामूली बढ़त देखी गई थी, लेकिन वर्तमान स्थिति काफी नाजुक बनी हुई है। वहीं दूसरी ओर, जनवरी में अमेरिका से भारत का आयात 23.71 प्रतिशत बढ़कर 4.5 अरब डॉलर तक पहुंच गया है।
टैरिफ में बदलाव और अंतरिम समझौता
गौरतलब है कि अमेरिका ने बीते साल 27 अगस्त से भारतीय उत्पादों पर 50 प्रतिशत तक का भारी शुल्क थोप दिया था। हाल ही में दोनों देशों के बीच एक अंतरिम व्यापार समझौते पर सहमति बनी है। इसके तहत 7 फरवरी से अमेरिका ने भारतीय वस्तुओं पर लागू 25 प्रतिशत का दंडात्मक शुल्क हटा दिया है और जवाबी शुल्क को भी 25 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया है। बावजूद इसके, विशेषज्ञ इसे भारतीय निर्यातकों के लिए पर्याप्त राहत नहीं मान रहे हैं।
अमेरिकी जनता पर बढ़ता आर्थिक बोझ
फेडरल रिजर्व बैंक ऑफ न्यूयॉर्क के अर्थशास्त्रियों के विश्लेषण में एक चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है। रिपोर्ट के अनुसार, इन टैरिफ का 90 प्रतिशत वित्तीय बोझ अमेरिकी उपभोक्ताओं और स्थानीय व्यापारियों को ही उठाना पड़ रहा है। ‘यूएसए टुडे’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, टैक्स फाउंडेशन का अनुमान है कि 2025 में इन शुल्कों के कारण हर अमेरिकी परिवार पर 1000 डॉलर का अतिरिक्त बोझ पड़ा। यह आर्थिक भार साल 2026 के अंत तक बढ़कर 1300 डॉलर प्रति परिवार होने का अनुमान है, जिससे ट्रंप की टैरिफ नीति पर घरेलू स्तर पर भी सवाल उठने लगे हैं।











