Women Shivling Pooja Niyam : अक्सर लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि क्या महिलाएं शिवलिंग की पूजा कर सकती हैं या नहीं।
कई बार पुरानी धारणाओं के कारण लोग मानते हैं कि महिलाओं को शिवलिंग स्पर्श नहीं करना चाहिए। धार्मिक ग्रंथों और शिवमहापुराण की मानें तो ऐसा बिल्कुल नहीं है।
शास्त्रों में महिलाओं को भी पूर्ण रूप से शिवपूजन का अधिकार दिया गया है। अगर सही नियमों का पालन किया जाए, तो महिलाएं न सिर्फ मंदिर में बल्कि घर में भी शिवलिंग की सेवा और जलाभिषेक कर सकती हैं।
धार्मिक ग्रंथों में क्या लिखा है?
शिवमहापुराण और काशीखंड जैसे ग्रंथों में स्पष्ट लिखा है कि भगवान शिव की पूजा का अधिकार हर भक्त को है। शास्त्रों के अनुसार, मां लक्ष्मी ने भी सौभाग्य और समृद्धि पाने के लिए पार्थिव (मिट्टी के) शिवलिंग की श्रद्धापूर्वक पूजा की थी।
इसी तरह मां पार्वती ने कठिन तपस्या के दौरान शिवलिंग की पूजा करके ही भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त किया था।
घुश्मेश्वर ज्योतिर्लिंग से जुड़ी पौराणिक कथा
शिवपुराण में घुश्मा नाम की एक शिवभक्त महिला की कथा आती है। घुश्मा रोज नियम से शिवलिंग बनाकर उनका पूजन और विसर्जन करती थीं। उनकी निष्ठा से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें दर्शन दिए और वरदान मांगने को कहा।
घुश्मा के निवेदन पर महादेव वहीं स्थापित हो गए, जिन्हें आज हम 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक ‘घुश्मेश्वर ज्योतिर्लिंग’ के रूप में जानते हैं।
इसके अलावा अनसूया, सुमति और सीमंतिनी जैसी कई सतियों की कथाएं प्रमाण हैं कि महिलाएं हमेशा से शिवभक्त रही हैं।
सूतक काल में कैसे करें पूजन?
अगर घर में बच्चे का जन्म हुआ हो या सूतक का समय चल रहा हो, तो उस दौरान शिवलिंग को स्पर्श करने की मनाही होती है। ऐसे समय में 10 दिनों तक स्त्री को केवल मानसिक रूप से शिव का ध्यान और पूजन करना चाहिए।
10 दिन पूरे होने और शुद्धि के बाद कुल परंपरा के अनुसार पुनः शिवलिंग की नियमित पूजा शुरू की जा सकती है।
घर में शिवलिंग रखने के जरूरी नियम
घर में शिवलिंग रखा जा सकता है, लेकिन इसके लिए कुछ मर्यादाओं का ध्यान रखना बेहद जरूरी है:
सही धातु का चयन: शिवपुराण में ब्रह्मा जी के अनुसार घर में सोने, चांदी, तांबे, पारे (पारद) या मिट्टी का छोटा शिवलिंग रखा जा सकता है।
आकार का ध्यान: घर के मंदिर में अंगूठे के आकार से बड़ा शिवलिंग नहीं रखना चाहिए।
नियमित सेवा: यदि आप घर में शिवलिंग रख रहे हैं, तो रोज जल चढ़ाना और साफ-सफाई रखना अनिवार्य है। शिवलिंग को कभी खाली या बिना जल अर्पित किए न छोड़ें।
स्थान की पवित्रता: जिस स्थान पर शिवलिंग स्थापित हो, वहां स्वच्छता और सात्विकता का विशेष ध्यान रखें।
भगवान शिव भाव और भक्ति के भूखे हैं। यदि मन में सच्ची श्रद्धा हो और नियमों का पालन किया जाए, तो हर कोई महादेव की कृपा प्राप्त कर सकता है।
















