नई दिल्ली, 05 अप्रैल 2026 (दून हॉराइज़न)। आयकर विभाग ने वित्त वर्ष 2025-26 की कमाई पर टैक्स रिटर्न दाखिल करने की कवायद तेज करते हुए असेसमेंट ईयर 2026-27 के लिए सभी आईटीआर फॉर्म (ITR-1 से ITR-7) अधिसूचित कर दिए हैं।
इस साल टैक्सपेयर्स को पिछले साल की तरह लंबा इंतजार नहीं करना होगा, क्योंकि विभाग ने अप्रैल महीने के भीतर ही ई-फाइलिंग पोर्टल पर यूटिलिटीज सक्रिय करने की पूरी तैयारी कर ली है। जानकारों का दावा है कि इस बार नियमों में तकनीकी स्पष्टता होने के कारण फाइलिंग प्रक्रिया पिछले साल के मुकाबले कहीं अधिक सुचारू रहेगी।
इस बार सबसे क्रांतिकारी बदलाव उन मध्यमवर्गीय करदाताओं के लिए है जिनके पास दो रिहायशी संपत्तियां हैं। विभाग की नई अधिसूचना के मुताबिक, अब दो हाउस प्रॉपर्टी से आय प्राप्त करने वाले व्यक्ति भी सरल ‘ITR-1 (सहज)’ फॉर्म का उपयोग कर सकेंगे।
इससे पहले ऐसे करदाताओं को ITR-2 या ITR-3 जैसे जटिल फॉर्म्स का सहारा लेना पड़ता था, जिसमें विस्तृत विवरण भरने में काफी समय और मेहनत खर्च होती थी। हालांकि, यह छूट उन लोगों को नहीं मिलेगी जिनकी कुल आय 50 लाख रुपये से अधिक है या जिनका कैपिटल गेन 1.25 लाख रुपये की सीमा पार कर गया है।
देश में 1 अप्रैल 2026 से ‘नया आयकर अधिनियम 2025’ आधिकारिक तौर पर प्रभावी हो चुका है, जिसने 1961 के पुराने कानून को बदला है। लेकिन करदाताओं को यह समझना होगा कि इस साल जो रिटर्न दाखिल किया जा रहा है, वह वित्त वर्ष 2025-26 (प्रीवियस ईयर) से संबंधित है।
इसलिए तकनीकी रूप से यह फाइलिंग पुराने ‘आयकर अधिनियम 1961’ के प्रावधानों और पुरानी शब्दावली के आधार पर ही संपन्न होगी। व्यक्तिगत करदाताओं के लिए बिना किसी लेट फीस के अपना विवरण जमा करने की अंतिम समय सीमा 31 जुलाई 2026 तय की गई है।

सैलरीड क्लास यानी नौकरीपेशा वर्ग को फाइलिंग शुरू होने के बावजूद थोड़ा धैर्य रखना होगा। कंपनियों के लिए फॉर्म-16 जारी करने की वैधानिक समय सीमा 15 जून है। चूंकि फॉर्म-16 में टीडीएस कटौती और सटीक वेतन का ब्योरा होता है, इसलिए विशेषज्ञों की सलाह है कि वेतनभोगी कर्मचारी जून के मध्य के बाद ही अपना रिटर्न भरें। डेटा मैचिंग में होने वाली किसी भी गलती से बचने के लिए एनुअल इंफॉर्मेशन स्टेटमेंट (AIS) और फॉर्म 26AS का मिलान करना अनिवार्य है।
लॉटरी, घुड़दौड़ या बिजनेस इनकम वाले करदाताओं के लिए नियम अब भी सख्त बने हुए हैं। यदि आपकी आय व्यापारिक गतिविधियों से है या आपने शेयर बाजार में शॉर्ट टर्म/लॉन्ग टर्म ट्रांजेक्शन के जरिए मुनाफा कमाया है, तो आप ITR-1 का लाभ नहीं उठा पाएंगे। विभाग ने स्पष्ट किया है कि सरलीकरण का उद्देश्य केवल छोटे और मध्यम स्तर के व्यक्तिगत करदाताओं को राहत देना है, जबकि जटिल वित्तीय पोर्टफोलियो वालों को विस्तृत फॉर्म ही भरने होंगे।










