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कानपुर का 4200 साल पुराना जगन्नाथ मंदिर, जिसकी 14 फीट मोटी दीवारें बताती हैं कैसा रहेगा मानसून

कानपुर के बेहटा बुजुर्ग गांव में स्थित प्राचीन जगन्नाथ मंदिर बारिश से करीब एक हफ्ते पहले ही मानसून की सटीक भविष्यवाणी कर देता है। इस मंदिर के गर्भगृह की छत से टपकने वाली बूंदों के आकार से स्थानीय किसान बारिश की तीव्रता का अंदाजा लगाते हैं।

कानपुर का 4200 साल पुराना जगन्नाथ मंदिर, जिसकी 14 फीट मोटी दीवारें बताती हैं कैसा रहेगा मानसून

HIGHLIGHTS

  • कानपुर से करीब 40 किलोमीटर दूर बेहटा बुजुर्ग गांव में स्थित है भगवान जगन्नाथ का यह मंदिर।
  • गर्भगृह के गुंबद पर उभरने वाली पानी की बूंदों का आकार तय करता है कि बारिश कैसी होगी।
  • पहली बारिश जमीन पर गिरते ही मंदिर की छत रहस्यमयी तरीके से पूरी तरह सूख जाती है।

Kanpur Jagannath Temple : उत्तर प्रदेश के भीतरगांव ब्लॉक स्थित बेहटा बुजुर्ग गांव का प्राचीन जगन्नाथ मंदिर आधुनिक मौसम विज्ञान के लिए आज भी एक अनसुलझी पहेली बना हुआ है। जब मौसम विभाग के सैटेलाइट मॉनसून का सटीक अनुमान लगाने में संघर्ष करते हैं, तब इस रहस्यमयी मंदिर के गर्भगृह की छत बारिश से करीब एक हफ्ते पहले ही टपकने लगती है।

हैरत की बात यह है कि जैसे ही असल में पहली बारिश जमीन पर गिरती है, छत का टपकना रहस्यमयी तरीके से पूरी तरह बंद हो जाता है और पत्थर सूख जाते हैं।

स्थानीय किसान इस मंदिर को ‘मानसून मंदिर’ के नाम से पूजते हैं। उनका पूरा कृषि चक्र इसी मंदिर की भविष्यवाणी पर निर्भर करता है। गर्भगृह के गुंबद पर उभरने वाली बूंदों का आकार बारिश की तीव्रता का सीधा संकेत देता है। अगर पत्थर पर सिर्फ नमी आती है, तो इसका मतलब है कि बारिश कम होगी, लेकिन अगर बड़ी और साफ बूंदें टपकने लगें, तो यह अच्छी बारिश का पक्का प्रमाण माना जाता है।

इसी इशारे को समझकर 50 किलोमीटर के दायरे में रहने वाले 30 से अधिक गांवों के किसान अपने खेतों की जुताई शुरू कर देते हैं।

इतिहासकारों और पुरातत्वविदों के मुताबिक, बौद्ध स्तूप या रथ के आकार वाले इस मंदिर की दीवारें करीब 14 फीट मोटी हैं और इसके बाहरी हिस्से पर कमल के पत्तों और मोर की अनूठी नक्काशी है। कुछ विशेषज्ञ इसके अंतिम जीर्णोद्धार को 11वीं सदी का मानते हैं और इसे गुप्त काल से जोड़कर देखते हैं, जबकि स्थानीय लोगों का दावा है कि इसका इतिहास 4,200 साल पुराना है।

पुरातत्व विभाग से लेकर कृषि मौसम वैज्ञानिक तक कई बार इस घटना का अध्ययन कर चुके हैं, लेकिन 14 फीट मोटी दीवारों के बीच भीषण गर्मी में छत से पानी टपकने के पीछे का वैज्ञानिक कारण आज तक कोई नहीं खोज पाया है। भगवान जगन्नाथ, बलदाऊ और बहन सुभद्रा को समर्पित यह मंदिर आस्था और विज्ञान के बीच की एक ऐसी सीमा है, जहां विज्ञान के तर्क अक्सर शांत हो जाते हैं।


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Gudiya Sagar

गुड़िया सागर 'दून हॉराइज़न' की मल्टीमीडिया और ट्रेंडिंग न्यूज़ प्रोड्यूसर हैं। वे करियर, वायरल खबरों और वीडियो जर्नलिज्म में विशेष विशेषज्ञता रखती हैं। डिजिटल मीडिया के बदलते ट्रेंड्स और युवाओं की पसंद को समझना गुड़िया की सबसे बड़ी ताकत है। सरकारी नौकरियों, शिक्षा और करियर से जुड़ी हर अहम जानकारी वे पूरी फैक्ट-चेकिंग के बाद ही युवाओं तक पहुंचाती हैं। इंटरनेट पर वायरल हो रही भ्रामक खबरों की सच्चाई (Fact Check) सामने लाने और वीडियो फॉर्मेट में निष्पक्ष खबरें पेश करने के लिए गुड़िया को पत्रकारिता जगत में विशेष रूप से जाना जाता है।

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