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गोपेश्वर जिला अस्पताल में भर्ती मजदूरों ने बताई टनल के भीतर की आपबीती, 3 अभी भी लापता

चमोली के पीपलकोटी में टीएचडीसी की जल विद्युत परियोजना टनल में भूस्खलन और अचानक पानी भरने से 7 मजदूरों की जान चली गई। हादसे में घायल 14 श्रमिकों का गोपेश्वर जिला अस्पताल में इलाज चल रहा है और लापता 3 कर्मियों की खोजबीन जारी है।

7 Workers Dead as Water and Debris Inundate THDC Tunnel in Chamoli

HIGHLIGHTS

  • टनल में अचानक पानी भरने से 7 मजदूरों की मौत
  • गोपेश्वर अस्पताल में 14 घायल मजदूर कराए गए भर्ती
  • टनल के भीतर 3 मजदूर अब भी बताए जा रहे लापता
  • टनल के 1800 मीटर अंदर हुआ था भारी जल रिसाव

दून हॉराइज़न, चमोली (14 अगस्त 2026): पीपलकोटी में अलकनंदा नदी तट पर बन रही टीएचडीसी की विष्णुगाड-पीपलकोटी जल विद्युत परियोजना टनल में भारी मलबा और पानी भर गया। गुरुवार शाम हुए इस भीषण हादसे में 22 मजदूर सीधे मलबे और सैलाब की चपेट में आ गए।

एसडीआरएफ की रेस्क्यू टीमों ने मौके से 7 शव बरामद किए हैं। 14 गंभीर रूप से घायल श्रमिकों को गोपेश्वर स्थित जिला अस्पताल पहुंचाया गया है। टनल के भीतर फंसे 3 लापता मजदूरों की तलाश के लिए राहत अभियान जारी है।

निर्माणाधीन टनल के 1,800 मीटर के बिंदु पर एक कमजोर भू-भाग अचानक भरभराकर गिर पड़ा। चट्टानी मलबा ढहते ही सुरंग के ऊपरी हिस्से में रुका भारी जलभराव अत्यधिक वेग के साथ भीतर आ घुसा। काम कर रहे किसी भी श्रमिक को भागने तक का रास्ता नहीं मिला। चंद पलों में सुरंग का बड़ा हिस्सा दलदल और जलसैलाब में तब्दील हो गया।

गोपेश्वर जिला अस्पताल के सर्जिकल वार्ड में भर्ती मजदूर सदमे की स्थिति में हैं। कई श्रमिकों के हाथ-पैर टूट चुके हैं और सिर पर गंभीर चोटें आई हैं। वार्ड में किसी की सांसें उखड़ रही हैं तो कोई टनल में गूंजे उस धमाके को याद कर कांप रहा है।

पंजाब के तरनतारन जिले के 47 वर्षीय सबीर सिंह का जबड़ा पूरी तरह टूट चुका है। दर्द से कराहते सबीर ने बताया कि टनल के ऊपरी हिस्से में अचानक तेज धमाका हुआ था। अगले ही सेकेंड पानी की एक विशाल दीवार ने सबको अपनी चपेट में ले लिया। मजदूर हवा में उछलकर पत्थरों पर जा गिरे। सबीर किसी तरह बहते मलबे के किनारे एक लोहे के पाइप को पकड़कर टिके रहे।

छत्तीसगढ़ के कोंडागांव निवासी 20 वर्षीय सुनील दीवान भी अस्पताल में उपचाराधीन हैं। सुनील हादसे के समय टनल के पीपलकोटी छोर की ओर ड्रिलिंग का काम देख रहे थे। उन्होंने बताया कि आंखों के सामने ही कई साथी पानी के गहरे भंवर में समा गए। टनल में रोशनी की व्यवस्था चंद सेकेंड में पूरी तरह ठप हो गई थी। चारों ओर सिर्फ चीखें और मलबे की गड़गड़ाहट सुनाई दे रही थी।

झारखंड के विनोद रुआना के अनुसार टनल के भीतर पहले विस्फोट जैसी तीव्र ध्वनि पैदा हुई। तुरंत बाद अनियंत्रित गति से पानी का रेला आया और सब कुछ बहा ले गया।

झारखंड के ही श्रमिक दीना बगैरा के दोनों पैर मलबे में दबकर बुरी तरह जख्मी हो गए हैं। दीना ने बताया कि अचानक हुए इस प्रहार से टनल के सपोर्टिंग गार्डर झुक गए थे।

हिमाचल प्रदेश के रहने वाले घायल श्रमिक तिलक राज ने बताया कि जलप्रवाह टनल के ठीक 1,800 मीटर अंदर वाले हिस्से में फूटा था। तेज प्रवाह के कारण वहां रखी मशीनें और लोहे के भारी उपकरण भी बह गए।

पीपलकोटी की इसी टीएचडीसी परियोजना में 30 दिसंबर 2025 को भी एक भीषण टक्कर हुई थी। उस वक्त शिफ्ट बदलाव के दौरान मजदूरों को ला रही लोको ट्रेन दूसरी मालवाहक लोको ट्रेन से सीधे भिड़ गई थी। उस घटना के समय ट्रेन में लगभग 110 लोग सवार थे, जिसमें 88 मजदूर घायल हुए थे। अब भूस्खलन और जलप्रवाह के नए हादसे ने परियोजना क्षेत्र में काम कर रहे मजदूरों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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Harpreet Singh

हरप्रीत सिंह पिछले 10 वर्षों से 'दून हॉराइज़न' के साथ जुड़े हुए हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में एक दशक का अनुभव रखने वाले हरप्रीत की उत्तराखंड और अन्य राज्यों की खबरों पर गहरी पकड़ है. उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा में उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय से एमबीए (MBA) की डिग्री हासिल की है. इसके अलावा, उन्होंने भारतीय विद्या भवन, मुंबई से पब्लिक रिलेशंस (जनसंपर्क) में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा भी पूरा किया है. अपने अनुभव और शिक्षा के माध्यम से वे पाठकों तक सटीक और विश्लेषणात्मक खबरें पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

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