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चमोली में भालू के हमले से बचने के फेर में खाई में गिरीं दो महिलाएं, दोनों की हुई दर्दनाक मौत

उत्तराखंड के चमोली में पोखरी ब्लॉक के नैल गांव में भालू के खौफ से भागते हुए दो महिलाएं 300 मीटर गहरी खाई में जा गिरीं। अस्पताल ले जाते वक्त दोनों ने दम तोड़ दिया।

Published On: September 5, 2026 5:07 PM
chamoli bear attack

HIGHLIGHTS

  • चमोली के नैल गांव में घास काटने गई देवरानी-जेठानी की दर्दनाक मौत।
  • अचानक सामने आए भालू से जान बचाने के फेर में 300 मीटर नीचे गिरीं।
  • सुबह 8:30 बजे की घटना; हायर सेंटर श्रीनगर ले जाते वक्त दूसरी महिला ने दम तोड़ा।

दून हॉराइज़न, गोपेश्वर/देहरादून (5 सितंबर): सीमांत जनपद चमोली के पर्वतीय गांवों में मानव-वन्यजीव संघर्ष (Human-Wildlife Conflict) ने एक बार फिर भयानक रूप ले लिया है। पोखरी ब्लॉक की ग्राम पंचायत नैल के सिदेली तोक में शुक्रवार सुबह भालू के हमले से बचने की कोशिश में दो ग्रामीण महिलाएं अनियंत्रित होकर गहरी ढलान से फिसल गईं।

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300 मीटर नीचे खाई में गिरने से दोनों गंभीर रूप से जख्मी हुईं और इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया। मृतकों की शिनाख्त विमला देवी (55 वर्ष), पत्नी चंद्रशेखर नेगी और लक्ष्मी देवी (42 वर्ष), पत्नी गजेंद्र नेगी के तौर पर हुई है। आपस में दोनों रिश्ते में देवरानी-जेठानी थीं। इस हृदयविदारक घटना के बाद पूरे इलाके में वन विभाग के खिलाफ जबर्दस्त आक्रोश है।

सुबह 8:30 बजे जंगल की ओर गई थीं दोनों, अचानक हुआ सामना

हादसा शुक्रवार सुबह उस वक्त हुआ जब रोजमर्रा की तरह दोनों महिलाएं मवेशियों के लिए चारा-पत्ती जुटाने गांव से सटे सिदेली तोक की ढलान पर पहुंची थीं। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, घना झाड़ीदार इलाका होने के चलते झाड़ियों में घात लगाए बैठा जंगली भालू एकाएक उनके बिल्कुल करीब आ धमका।

भालू को अपनी ओर लपकता देख दोनों बदहवास होकर उल्टे पांव भागीं, लेकिन तीखी ढलान और पथरीली जमीन पर संतुलन बिगड़ गया। देखते ही देखते दोनों करीब 300 मीटर गहरी पथरीली खाई में समा गईं। पहाड़ी से पत्थरों के गिरने और चीखने की आवाज सुनकर पास के खेतों में काम कर रहे ग्रामीण लाठी-डंडे लेकर दौड़े, जिसके बाद भालू जंगल की ओर भाग निकला।

सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से श्रीनगर रेफर, रास्ते में तोड़ा दम

ग्रामीणों ने तत्परता दिखाते हुए घटना की सूचना स्थानीय प्रशासन को दी। खबर मिलते ही तहसीलदार रामकिशोर ध्यानी और वन विभाग के दारोगा मोहन बर्त्वाल दलबल के साथ मौके पर पहुंचे। खाई से रेस्क्यू कर दोनों को बेहद नाजुक हालत में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) पोखरी पहुंचाया गया।

अस्पताल में विमला देवी को डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। वहीं गंभीर रूप से जख्मी लक्ष्मी देवी को प्राथमिक मरहम-पट्टी के बाद तत्काल बेस अस्पताल, श्रीनगर गढ़वाल के लिए रेफर किया गया। लेकिन किस्मत को कुछ और मंजूर था; एंबुलेंस से श्रीनगर ले जाते वक्त रास्ते में ही लक्ष्मी देवी की सांसें भी थम गईं। पोखरी सीएचसी में तैनात डॉ. शनि चौधरी ने विमला देवी के शव का पोस्टमॉर्टम किए जाने की पुष्टि की है।

सामान्य तौर पर ऐसे हादसों में वन महकमा मृतक आश्रितों को फौरी राहत राशि के साथ अनुग्रह राशि (Ex-gratia) जारी करने की विधिक प्रक्रिया शुरू करता है, जिसकी फाइल तहसील प्रशासन तैयार कर रहा है।

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Harpreet Singh

हरप्रीत सिंह पिछले 10 वर्षों से 'दून हॉराइज़न' के साथ जुड़े हुए हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में एक दशक का अनुभव रखने वाले हरप्रीत की उत्तराखंड और अन्य राज्यों की खबरों पर गहरी पकड़ है. उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा में उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय से एमबीए (MBA) की डिग्री हासिल की है. इसके अलावा, उन्होंने भारतीय विद्या भवन, मुंबई से पब्लिक रिलेशंस (जनसंपर्क) में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा भी पूरा किया है. अपने अनुभव और शिक्षा के माध्यम से वे पाठकों तक सटीक और विश्लेषणात्मक खबरें पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

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