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Nagrasu Gurudwara Dispute : पंजाब से आए विशेष दल की बातचीत के बाद माने निहंग, विवाद हुआ खत्म

उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में नगरासू गुरुद्वारे की छत पर चढ़े पांचों निहंग सिख पंजाब से आए प्रतिनिधिमंडल की मध्यस्थता के बाद नीचे उतरने को राजी हो गए हैं. कर्णप्रयाग में 16 जून को स्थानीय लोगों और निहंग सिखों के बीच हुई हिंसक झड़प और गिरफ्तारियों के विरोध में यह पूरा बवाल खड़ा हुआ था.

Nagrasu Gurudwara Dispute : पंजाब से आए विशेष दल की बातचीत के बाद माने निहंग, विवाद हुआ खत्म

HIGHLIGHTS

  • नगरासू गुरुद्वारे की छत से पांचों निहंग सिख नीचे उतरे.
  • पंजाब से आए विशेष दल की बातचीत के बाद सुलझा मामला.
  • दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी प्रतिनिधिमंडल ने सीएम धामी से की मुलाकात.
  • 16 जून को कर्णप्रयाग में तलवारबाजी के बाद भड़का था गुस्सा.

Nagrasu Gurudwara Dispute : उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है जहां बदरीनाथ हाईवे पर स्थित नगरासू गुरुद्वारा की छत पर बीते कई दिनों से कब्जा जमाए बैठे पांचों निहंग सिख आखिरकार नीचे उतरने के लिए तैयार हो गए हैं. पंजाब से आज विशेष रूप से निहंग सिखों का एक दल नगरासू गुरुद्वारा पहुंचा था जिसके सदस्यों ने सीधे छत पर जाकर मोर्चा संभाले पांचों निहंगों से बंद कमरे में लंबी वार्ता की.

इस मान-मनौव्वल और रणनीतिक बातचीत के बाद निहंगों का गुस्सा शांत हुआ और उन्होंने अपना हठ छोड़ नीचे आने का फैसला किया जिसके बाद प्रशासन ने राहत की सांस ली है. माहौल की संवेदनशीलता को देखते हुए पूरे गुरुद्वारे के इर्द-गिर्द भारी मात्रा में सिक्योरिटी फोर्स का कड़ा पहरा बैठाया गया है ताकि दोबारा कानून व्यवस्था न बिगड़े.

इधर इस पूरे कर्णप्रयाग निहंग सिख विवाद मामले पर दिल्ली सिख गुरुद्वारा मैनेजमेंट कमेटी (DSGMC) के प्रेसिडेंट हरमीत सिंह कालका का बड़ा बयान आया है जिसमें उन्होंने बताया कि कमेटी का एक उच्च स्तरीय डेलीगेशन उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मुलाकात कर चुका है.

सिख डेलीगेशन ने सीएम धामी के सामने 16 जून को कर्णप्रयाग में हुई हिंसक घटना का पूरा कच्चा चिट्ठा रखा और पुलिसिया कार्रवाई पर अपनी आपत्ति दर्ज कराई. मुख्यमंत्री इस पूरे घटनाक्रम की पल-पल की रिपोर्ट खुद मॉनिटर कर रहे हैं और उन्होंने सिख समाज की चिंताओं को बेहद गंभीरता से सुना है.

डीजीपी द्वारा कल घोषित किए गए एक्शन प्लान के तहत पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के लिए एक विशेष कमेटी का गठन कर दिया गया है. हरमीत सिंह कालका के मुताबिक उन्हें शासन स्तर से पूरा भरोसा मिला है कि इस मामले में जल्द से जल्द कड़ी कार्रवाई होगी और पुलिस दोनों पक्षों द्वारा दर्ज कराई गई क्रॉस FIR पर निष्पक्षता से विधिक कार्रवाई करेगी.

सिखों के प्रतिनिधिमंडल को मुख्यमंत्री की तरफ से यह आश्वासन भी दिया गया है कि जिन पुलिस अधिकारियों ने निहंग युवक के साथ बेरहमी से मारपीट की थी, उन्हें बख्शा नहीं जाएगा बल्कि उन सभी से कड़ी पूछताछ कर विभागीय व कानूनी एक्शन लिया जाएगा.

इस पूरे बवाल की शुरुआत 20 जून की शाम को हुई थी जब निहंग सिखों का एक जत्था अचानक नगरासू गुरुद्वारे में दाखिल हुआ था. इन लोगों ने परिसर के भीतर जमकर हंगामा काटना शुरू कर दिया जिसके बाद स्थानीय सेवादारों ने तुरंत स्थिति बिगड़ती देख लोकल पुलिस को फोन घुमा दिया.

पुलिस की गाड़ियां जैसे ही गुरुद्वारा परिसर में दाखिल हुईं, हंगामा कर रहे निहंग सिख भड़क गए और अपनी तलवारें चमकाते हुए सीधे नगरासू गुरुद्वारे की सबसे ऊपरी छत पर जा चढ़े. निहंगों ने इस दौरान गुरुद्वारे के दो स्थानीय सेवादारों को बंधक बनाकर कमरे में डाल दिया था जिन्हें बाद में पुलिस के दबाव के कारण छोड़ना पड़ा लेकिन खुद निहंग ऊपरी मंजिल पर डटे रहे.

स्थिति नियंत्रण से बाहर जाती देख नगरासू गुरुद्वारे के बाहर उत्तराखंड पुलिस के जवानों के साथ-साथ भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) की टुकड़ियों को तैनात कर पूरे इलाके की घेराबंदी कर दी गई थी. पुलिस और स्थानीय प्रशासन के आला अधिकारियों द्वारा लाउडस्पीकर से की गई घंटों की समझाइश के बाद शुरुआती चरण में दो निहंग सिख छत से नीचे उतर आए थे जिन्होंने रुद्रप्रयाग प्रशासन के सामने अपनी गलती मानते हुए माफी मांगी थी जिसके बाद प्रशासन ने उन्हें कानूनी औपचारिकताएं पूरी कर उनके घर रवाना कर दिया था.

इसके बाद दो अन्य निहंग सिख जब नीचे रसोई से खाना लेने आए तो घात लगाकर बैठी पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए उनमें से एक को तुरंत दबोच लिया था लेकिन इसके बावजूद पांच कट्टरपंथी निहंग ऊपरी मंजिल पर कब्जा जमाए बैठे थे जिन्हें आज पंजाब से आए दल ने समझा-बुझाकर नीचे उतारा.

दरअसल इस पूरे बवाल की असली जड़ कर्णप्रयाग में हुआ पुराना विवाद है जिससे निहंग सिख बेहद आक्रोशित थे. बीती 16 जून को बाइकों पर सवार होकर कुछ निहंग सिख हेमकुंड साहिब के पवित्र दर्शन कर वापस पंजाब लौट रहे थे कि तभी कर्णप्रयाग के मुख्य बाजार में किसी मामूली बात को लेकर स्थानीय दुकानदारों और लोगों से उनकी तीखी बहस हो गई. देखते ही देखते यह बहस खूनी संघर्ष में तब्दील हो गई और दोनों तरफ से लाठी-डंडे चलने लगे.

इस हिंसक मारपीट के दौरान एक निहंग सिख ने गुस्से में आकर अपनी म्यान से तलवार निकाल ली और भीड़ पर ताबड़तोड़ हमला कर दिया जिससे स्थानीय बाजार के कई लोग गंभीर रूप से घायल हो गए थे. स्थानीय जनता के आक्रोश को देखते हुए पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मौके से तीन निहंग सिखों को गिरफ्तार कर हवालात भेज दिया था और तभी से पूरे पहाड़ी क्षेत्र का माहौल सांप्रदायिक और सामाजिक रूप से बेहद तनावपूर्ण बना हुआ है.

नगरासू गुरुद्वारे में घुसे निहंगों की मुख्य मांग भी यही थी कि कर्णप्रयाग पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए उनके साथियों को तत्काल बिना शर्त रिहा किया जाए जिससे यह गतिरोध और ज्यादा पेचीदा हो गया था. इस पूरे नगरासू गुरुद्वारा विवाद की गूंज दिल्ली से लेकर पंजाब तक सुनाई दी है और पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने खुद इस संवेदनशील विषय पर उत्तराखंड के सीएम पुष्कर सिंह धामी से फोन पर लंबी बातचीत कर सौहार्दपूर्ण समाधान निकालने का अनुरोध किया था.


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Harpreet Singh

हरप्रीत सिंह पिछले 10 वर्षों से 'दून हॉराइज़न' के साथ जुड़े हुए हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में एक दशक का अनुभव रखने वाले हरप्रीत की उत्तराखंड और अन्य राज्यों की खबरों पर गहरी पकड़ है. उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा में उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय से एमबीए (MBA) की डिग्री हासिल की है. इसके अलावा, उन्होंने भारतीय विद्या भवन, मुंबई से पब्लिक रिलेशंस (जनसंपर्क) में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा भी पूरा किया है. अपने अनुभव और शिक्षा के माध्यम से वे पाठकों तक सटीक और विश्लेषणात्मक खबरें पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

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