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Uttarakhand Pilgrimage Growth : यमुनोत्री धाम में टूटा पुराना रिकॉर्ड, इस साल 2 अगस्त तक 6.54 लाख से ज्यादा यात्रियों ने किए दर्शन

उत्तराखंड में वर्ष 2026 की पहली छमाही के दौरान प्रमुख धार्मिक स्थलों पर आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में भारी उछाल दर्ज किया गया है। मानसखण्ड मंदिरमाला मिशन और बेहतर आधारभूत सुविधाओं के चलते चारधाम के साथ-साथ राज्य के अन्य पौराणिक मंदिरों में भी रिकॉर्ड भीड़ उमड़ रही है।

Yamunotri Shrine Sets New Record, Over 6.54 Lakh Pilgrims Visit Till August 2

HIGHLIGHTS

  • जागेश्वर और त्रियुगीनारायण में भक्तों की संख्या ढाई गुना बढ़ी
  • यमुनोत्री में 2 अगस्त तक रिकॉर्ड 6,54,958 यात्रियों ने दर्शन किए
  • बद्रीनाथ में 100 दिनों में 15,52,021 तीर्थयात्री पहुंचे
  • कैंची धाम में छह महीनों में 24.34 लाख श्रद्धालु आए

देहरादून, 3 अगस्त, 2026 (दून हॉराइज़न)।

Uttarakhand Pilgrimage Growth : उत्तराखंड के प्रमुख धार्मिक और पौराणिक स्थलों में श्रद्धालुओं की आवक में इस साल अत्यधिक बढ़ोतरी दर्ज की गई है। पर्यटन विभाग के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2026 की पहली छमाही में राज्य के प्रसिद्ध मंदिरों में आने वाले दर्शनार्थियों का आंकड़ा पिछले तमाम वर्षों के मुकाबले कई गुना बढ़ चुका है। चारधाम यात्रा के अलावा कुमाऊं और गढ़वाल के स्थानीय पौराणिक स्थलों पर तीर्थयात्रियों का भारी हुजूम देखा जा रहा है।

अल्मोड़ा जिले में स्थित जागेश्वर धाम और रुद्रप्रयाग के त्रियुगीनारायण मंदिर में इस वर्ष पहली छमाही के भीतर ही श्रद्धालुओं की संख्या ढाई गुना तक पहुंच गई है। पर्यटन विभाग की रिपोर्ट बताती है कि जनवरी से जून 2026 के बीच जागेश्वर धाम में 1,74,119 तीर्थयात्री दर्शन के लिए पहुंचे। पिछले साल 2025 की इसी अवधि में यह आंकड़ा महज 67,875 दर्ज किया गया था। इस अप्रत्याशित बढ़ोतरी से स्थानीय कारोबारियों और पंडित-पुरोहितों में खासा उत्साह है।

चंपावत जिले के प्रसिद्ध पूर्णागिरि धाम में भी श्रद्धालुओं का तांता लगा हुआ है। इस साल जून महीने तक पूर्णागिरि धाम में 20,91,788 श्रद्धालुओं ने शीश नवाया है। बीते वर्ष 2025 की पहली छमाही में यहां आने वाले यात्रियों का आंकड़ा 14,35,290 था, जो इस बार करीब डेढ़ गुना अधिक दर्ज हुआ है। दर्शनार्थियों की सुविधा के लिए मार्ग पर नए पैदल शेड और पीने के पानी के प्रबंध किए गए हैं।

श्रीनगर स्थित सिद्धपीठ धारी देवी मंदिर में भी भक्तों की भीड़ बीते वर्ष की तुलना में लगभग दोगुनी हो गई है। वर्ष 2026 में जून तक धारी देवी मंदिर में 5,42,626 श्रद्धालुओं ने दर्शन किए। वर्ष 2025 में इसी समयावधि के दौरान 2,83,275 लोग ही मंदिर पहुंचे थे। अलकनंदा नदी के तट पर स्थित इस धाम में अब दूर-दराज के राज्यों से सीधी बसों और टैक्सियों का परिचालन बढ़ा है।

रुद्रप्रयाग के पौराणिक त्रियुगीनारायण मंदिर में शादी-विवाह के पंजीकरण और दर्शन के लिए आने वाले लोगों की संख्या में भारी उछाल आया है। इस वर्ष शुरुआती छह महीनों में 3,40,385 श्रद्धालु यहां पहुंचे हैं। जबकि पिछले साल 2025 की इसी अवधि में यह संख्या 1,36,120 थी। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शिव-पार्वती के विवाह स्थल के रूप में प्रसिद्ध इस जगह पर पर्यटकों की बढ़ती संख्या से होमस्टे क्षेत्र को बड़ा सहारा मिला है।

उत्तरकाशी जिले में स्थित यमुनोत्री धाम की यात्रा बेहद कठिन चढ़ाई वाली मानी जाती है, लेकिन इसके बावजूद इस साल नया इतिहास रच गया है। चालू यात्रा काल में 2 अगस्त 2026 तक यमुनोत्री में 6,54,958 यात्री मां यमुना के दर्शन कर चुके हैं। यह धाम के पूरे इतिहास में दर्ज हुआ अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है।

इससे पहले के सालों के आंकड़ों पर नजर डालें तो यमुनोत्री में वर्ष 2025 के दौरान 6,44,637 तीर्थयात्री आए थे। वर्ष 2024 में यह संख्या 5,15,067 थी, जबकि 2023 में 5,60,918 और 2022 में 6,21,504 लोगों ने दर्शन किए थे। महामारी के दौर यानी वर्ष 2021 में मात्र 33,331 लोग ही यमुनोत्री पहुंच सके थे। लगातार सुधरते रास्तों और सुरक्षा इंतजामों के कारण अब बुजुर्ग यात्री भी आसानी से मंदिर पहुंच रहे हैं।

बद्रीनाथ धाम की यात्रा भी इस वर्ष अपने पिछले सारे रिकॉर्ड पीछे छोड़ रही है। 31 जुलाई को बद्रीनाथ यात्रा के 100 दिन पूरे हो चुके हैं। इन शुरुआती 100 दिनों के भीतर 15,52,021 श्रद्धालुओं ने भगवान बद्रीविशाल के दर्शन कर लिए हैं।

बीते साल 2025 की बात करें तो इसी 100 दिनों की अवधि में 12,40,408 यात्रियों ने बद्रीनाथ धाम में माथा टेका था। इस तरह पिछले वर्ष के मुकाबले इस बार 3,11,613 अधिक श्रद्धालु बद्रीनाथ पहुंचे हैं। हाइवे के चौड़ीकरण और ऑल वेदर रोड के निर्माण के कारण बद्रीनाथ पहुंचने में लगने वाला समय अब काफी घट गया है।

पिथौरागढ़ जिले में चीन सीमा से सटे श्री आदि कैलाश धाम में भी शिव भक्तों का तांता लगा रहा। 1 मई 2026 को शुरू हुई यात्रा के शुरुआती दो महीनों में ही 52,441 श्रद्धालु आदि कैलाश के दर्शन कर चुके हैं। फिलहाल मानसूनी बारिश और भूस्खलन के खतरे को देखते हुए 1 जुलाई से इस यात्रा को अस्थायी रूप से रोक दिया गया है।

आदि कैलाश क्षेत्र में बुनियादी बदलाव का दौर वर्ष 2023 के अंत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दौरे के बाद शुरू हुआ। वर्ष 2022 से पहले तक पूरे साल में 2000 से भी कम लोग यहां पहुंच पाते थे। वर्ष 2023 में यह संख्या बढ़कर 10,025 हुई, 2024 में 29,352 और वर्ष 2025 में 36,526 यात्रियों ने आदि कैलाश के दर्शन किए। इस साल महज दो महीनों में 52 हजार से अधिक श्रद्धालुओं का पहुंचना सीमांत क्षेत्र के आर्थिक विकास का बड़ा संकेत माना जा रहा है।

नैनीताल जिले में स्थित प्रसिद्ध कैंची धाम में श्रद्धालुओं का हुजूम सभी पुराने अनुमानों को पीछे छोड़ चुका है। जनवरी से जून 2026 के दौरान बाबा नीब करौरी महाराज के आश्रम में 24,34,507 यात्री दर्शन के लिए पहुंचे। केवल जून के महीने में ही रिकॉर्ड 8,66,000 भक्तों ने कैंची धाम में हाजिरी लगाई, जिससे भवाली-नैनीताल मार्ग पर कई दिनों तक भारी ट्रैफिक देखा गया।

टिहरी जिले में ऋषिकेश के पास स्थित मुनिकीरेती, तपोवन और शिवपुरी क्षेत्र भी सैलानियों से गुलजार हैं। वर्ष 2026 में जनवरी से जून के बीच 15,97,439 पर्यटक इन इलाकों में पहुंचे हैं, जबकि बीते साल 2025 में यह संख्या 13,62,600 दर्ज की गई थी। इसके अलावा रुद्रप्रयाग के कार्तिक स्वामी मंदिर और टिहरी के सुरकंडा देवी मंदिर में भी दर्शनार्थियों की संख्या में भारी वृद्धि देखी गई है।

राज्य सरकार द्वारा शुरू किए गए मानसखण्ड मंदिरमाला मिशन के तहत कुमाऊं क्षेत्र के प्राचीन मंदिरों को आपस में जोड़ा जा रहा है। इसके तहत केदारनाथ और बद्रीनाथ की तर्ज पर अन्य धार्मिक स्थलों में भी बुनियादी ढांचे, चौड़ी सड़कों, पार्किंग और विश्राम गृहों का तेजी से विकास किया गया है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बातचीत में स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन के अनुसार उत्तराखंड को दुनिया की आध्यात्मिक राजधानी बनाने का संकल्प पूरा किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के प्राचीन और प्रमुख पौराणिक मंदिरों में तीर्थयात्रियों के लिए सभी आधुनिक सुविधाएं जुटाई जा रही हैं, ताकि यहां आने वाले भक्तों को सुगम और सुरक्षित वातावरण मिल सके।

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Harpreet Singh

हरप्रीत सिंह पिछले 10 वर्षों से 'दून हॉराइज़न' के साथ जुड़े हुए हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में एक दशक का अनुभव रखने वाले हरप्रीत की उत्तराखंड और अन्य राज्यों की खबरों पर गहरी पकड़ है. उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा में उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय से एमबीए (MBA) की डिग्री हासिल की है. इसके अलावा, उन्होंने भारतीय विद्या भवन, मुंबई से पब्लिक रिलेशंस (जनसंपर्क) में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा भी पूरा किया है. अपने अनुभव और शिक्षा के माध्यम से वे पाठकों तक सटीक और विश्लेषणात्मक खबरें पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

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