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LIC Unclaimed Amount : एलआईसी में फंसा है पुरानी पॉलिसी का पैसा? जानें अनक्लेम्ड राशि कैसे करें चेक

भारतीय जीवन बीमा निगम की पुरानी पॉलिसियों में फंसा अनक्लेम्ड पैसा निकालने के लिए नई ऑनलाइन प्रक्रिया उपलब्ध कराई गई है। पॉलिसीधारक पैन कार्ड और पॉलिसी नंबर दर्ज कर पोर्टल के माध्यम से अपना बकाया जांच सकते हैं।

LIC Unclaimed Amount : एलआईसी में फंसा है पुरानी पॉलिसी का पैसा? जानें अनक्लेम्ड राशि कैसे करें चेक

HIGHLIGHTS

  • 12 महीने से रुका पैसा अनक्लेम्ड श्रेणी में दर्ज होगा
  • 10 साल पुरानी राशि सीनियर सिटीजन वेलफेयर फंड स्थानांतरित
  • वेबसाइट पर पैन और पॉलिसी नंबर से सर्च करें
  • 15 से 30 दिनों में खाते में पहुंचेगी राशि

LIC Unclaimed Amount : भारतीय जीवन बीमा निगम की पॉलिसियों में लाखों लोगों की मैच्योरिटी और क्लेम की रकम बिना किसी दावे के अटकी पड़ी है। लोग बीमा पॉलिसी ले लेते हैं, लेकिन समय पूरा होने के बाद या प्रीमियम चुकाने के बाद कई बार रकम का दावा करना भूल जाते हैं। इस तरह की बिना दावे वाली राशि को निकालने के लिए नई और आसान व्यवस्था दी गई है।

बीमा नियामक विकास प्राधिकरण के तय नियमों के मुताबिक यदि किसी पॉलिसी की मैच्योरिटी या क्लेम राशि 12 महीने तक नहीं ली जाती है, तो उसे अनक्लेम्ड मान लिया जाता है। 12 महीने से अधिक समय तक पड़ी ऐसी राशि को संस्था अपने अलग खाते में बनाए रखती है।

यदि किसी पॉलिसी की अनक्लेम्ड रकम 10 साल तक ऐसे ही पड़ी रह जाती है, तो उस पैसे को सीनियर सिटीजन वेलफेयर फंड में ट्रांसफर कर दिया जाता है। हालांकि 10 साल बाद इस फंड में पैसा ट्रांसफर हो जाने के बावजूद पॉलिसीधारक या उनका कानूनी वारिस इस पर पूरा दावा ठोक सकता है।

अपनी पुरानी किसी भी पॉलिसी में बकाया रकम का पता लगाने के लिए आधिकारिक वेबसाइट licindia.in पर जाना होगा। वेबसाइट के होमपेज पर दिए गए ‘Unclaimed Amounts’ सेक्शन पर क्लिक करके अपनी जानकारी दर्ज करनी होती है।

खोज विकल्प में पॉलिसी नंबर, पॉलिसीधारक का पूरा नाम, जन्मतिथि और पैन नंबर डालकर सर्च बटन दबाना होता है। यदि पोर्टल पर कोई बकाया राशि दिखाई देती है, तो उसके विवरण को नोट कर लें।

जिन लोगों को ऑनलाइन सर्च में दिक्कत आ रही हो, वे सीधे अपनी नजदीकी शाखा में संपर्क कर सकते हैं। ऑनलाइन या ऑफलाइन ट्रैकिंग प्रक्रिया को पूरा करने के लिए पैन कार्ड सबसे अनिवार्य दस्तावेज माना गया है।

व्यक्तिगत मामलों में केवल पैन नंबर दर्ज करके ही सालों से फंसी मैच्योरिटी राशि की पूरी जानकारी सामने आ जाती है। 2 लाख रुपये या उससे अधिक की मैच्योरिटी राशि को केवल सही जानकारी दर्ज करके ट्रैक किया जा सकता है।

अटके हुए पैसे का दावा करने के लिए नजदीकी शाखा में जाना होगा या फिर ऑनलाइन पोर्टल पर लॉगिन करना होगा। इसके अलावा आधिकारिक ईमेल आईडी unclaimed@licindia.com पर भी विवरण भेजकर प्रक्रिया शुरू की जा सकती है।

शाखा या पोर्टल पर आवेदन करने के लिए सरेंडर या क्लेम फॉर्म के साथ एक औपचारिक अनुरोध पत्र भरना अनिवार्य होता है। इसके साथ ही पहचान प्रमाण के लिए [Aadhaar Redacted] या पासपोर्ट और पैन कार्ड की कॉपी लगाना जरूरी है।

भुगतान सीधे बैंक खाते में पाने के लिए एनईएफटी फॉर्म और बैंक का कैंसल्ड चेक संलग्न करना होता है। यदि आपके पास मूल पॉलिसी बॉन्ड उपलब्ध है, तो उसे भी आवेदन पत्र के साथ जमा करना पड़ेगा।

सभी दस्तावेज और क्लेम फॉर्म सही तरीके से सबमिट हो जाने के बाद 15 से 30 दिनों के भीतर रकम सीधे बैंक खाते में ट्रांसफर कर दी जाती है। अगर पैसा 10 साल पुराना होकर वेलफेयर फंड में चला गया है, तो आरबीआई की आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से भी सत्यापन किया जा सकता है।

दावा प्रक्रिया को पूरा करने के लिए आवश्यक दस्तावेजों की सूची तैयार रखनी चाहिए। इसमें मूल पॉलिसी बॉन्ड, पैन कार्ड, [Aadhaar Redacted], पते का प्रमाण और कैंसल्ड चेक शामिल हैं।

यदि मामला मृत्यु क्लेम का है, तो नॉमिनी का पहचान प्रमाण और नगर निगम या सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी मूल डेथ सर्टिफिकेट भी संलग्न करना होगा। इन सभी कागजात को स्कैन करके ऑनलाइन अपलोड किया जा सकता है, जिससे कागजी कार्रवाई पेपरलेस हो जाती है।

अक्सर लोग अपनी पुरानी पॉलिसियों के दस्तावेज खो देते हैं या सही शाखा तक नहीं पहुंच पाते। इस स्थिति से बचने के लिए हमेशा अपनी हर पॉलिसी का नंबर डायरी या डिजिटल रूप में सुरक्षित रखना चाहिए।

जिन पॉलिसियों को 10 साल से अधिक समय बीत चुका है, उनके लिए सीधे सीनियर सिटीजन वेलफेयर फंड पोर्टल पर जाकर सर्च करना बेहतर होता है। क्लेम प्रक्रिया के दौरान नियमानुसार टैक्स कट सकता है, लेकिन पूरी रकम ब्याज के साथ वापस मिलती है।

वरिष्ठ नागरिकों और महिला पॉलिसीधारकों के लिए अलग से विशेष सहायता डेस्क और हेल्पलाइन की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। समय रहते प्रक्रिया शुरू न करने पर प्रक्रिया थोड़ी लंबी हो सकती है।

बीमा कंपनी के पास इस समय अरबों रुपये की अनक्लेम्ड राशि दर्ज है। अपनी पुरानी पॉलिसियों की जांच करके कुछ ही देर में इस राशि पर पुनः दावा किया जा सकता है।

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Parul Sharma

पारुल शर्मा 'दून हॉराइज़न' के बिज़नेस सेक्शन की एक अनुभवी आर्थिक एवं व्यापार संवाददाता हैं। राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था, बैंकिंग सेक्टर और पर्सनल फाइनेंस उनकी मुख्य बीट (Beat) है। पारुल को मार्केट के उतार-चढ़ाव और कंज्यूमर ट्रेंड्स का सटीक विश्लेषण करने में खास महारत हासिल है। वह अपनी रिपोर्टिंग में हमेशा प्रामाणिक सरकारी आंकड़ों और विश्वसनीय स्रोतों का ही इस्तेमाल करती हैं। पारुल का मुख्य उद्देश्य बजट, टैक्स नियमों और निवेश से जुड़ी अहम खबरों को बिना किसी लाग-लपेट के सीधे पाठकों तक पहुंचाना है, जिससे आम आदमी का वित्तीय ज्ञान और अधिक मजबूत हो सके।

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