दून हॉराइज़न, नई दिल्ली (15 सितंबर): देश के पश्चिमी छोर से दक्षिण-पश्चिम मॉनसून (Weather Update) की विदाई की उलटी गिनती शुरू होने ही वाली थी कि एक साथ सक्रिय हुए तीन मौसमी सिस्टम ने विदाई की रफ्तार रोक दी है।
आमतौर पर 17 सितंबर के आसपास राजस्थान के जैसलमेर और बाड़मेर सीमा से मॉनसून पीछे हटना शुरू करता है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के ताजा बुलेटिन के अनुसार, इस बार 19 सितंबर से पहले विदाई के लिए परिस्थितियां पूरी तरह अनुकूल होती नहीं दिख रहीं। वजह साफ है—दक्षिण-पश्चिम राजस्थान, कच्छ और पाकिस्तान से सटे इलाके पर गहराया कम दबाव का क्षेत्र, जो अरब सागर से लगातार बादलों को खींच रहा है।
तीन सिस्टम सक्रिय, बंगाल से गुजरात तक नमी की सप्लाई
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, इस समय वायुमंडल में एक जटिल मौसमी चक्र बना हुआ है। मुख्य मॉनसून ट्रफ के अलावा कम दबाव वाले क्षेत्र से जुड़ी एक उप-ट्रफ और बंगाल की खाड़ी के ऊपरी हिस्से में बना चक्रवाती परिसंचरण (Cyclonic Circulation) एक साथ सक्रिय हैं। ये तीनों मिलकर बंगाल की खाड़ी और अरब सागर, दोनों तरफ से हवाओं में भारी नमी भर रहे हैं।
यही वजह है कि पिछले 24 घंटों के दौरान राजस्थान के उदयपुर, अजमेर, कोटा और जोधपुर संभाग में बादलों ने अच्छी खासी हाजिरी लगाई। सबसे ज्यादा बारिश उदयपुर के कोटड़ा इलाके में 88 मिलीमीटर दर्ज की गई। मौसम केंद्र जयपुर ने संकेत दिया है कि जब तक यह सिस्टम पश्चिमी दिशा में खिसक कर कमजोर नहीं पड़ता, तब तक सौराष्ट्र, कच्छ और दक्षिण राजस्थान के खेतों में पानी भरता रहेगा।
दिल्ली, पंजाब और हरियाणा में 17 सितंबर तक तेज बौछारें
उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में उमस भरी गर्मी झेल रहे लोगों के लिए आने वाले दो-तीन दिन राहत और आफत दोनों लेकर आ सकते हैं। जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, गिलगित-बाल्टिस्तान और मुजफ्फराबाद के ऊंचे इलाकों में 17 सितंबर को तेज गर्जना के साथ बारिश और आकाशीय बिजली गिरने की आशंका है।
लेकिन मैदानी इलाकों का हाल भी कमोबेश ऐसा ही रहेगा। दिल्ली-एनसीआर, पंजाब, चंडीगढ़ और हरियाणा के कई इलाकों में 15 से 17 सितंबर के बीच मध्यम से भारी बारिश का दौर देखने को मिलेगा। दिल्ली की सड़कों पर इस दौरान जलभराव और ट्रैफिक जाम की पुरानी समस्या फिर से सिर उठा सकती है। प्रशासन ने निचले इलाकों और खुले नालों के आसपास रहने वालों को सतर्क रहने को कहा है।
मध्य भारत में पारा गिरा, दक्षिण में तेज हवाओं का पहरा

मध्य भारत के राज्यों में भी बादलों का डेरा रहेगा। छत्तीसगढ़ में अगले 48 घंटों में हल्की से मध्यम बारिश और बिजली गिरने का पूर्वानुमान है। बीते दिन छत्तीसगढ़ के माना में पारा 33.2 डिग्री सेल्सियस तक चढ़ा, तो वहीं पेंड्रा रोड में न्यूनतम तापमान गिरकर 20 डिग्री सेल्सियस पर आ गया। राज्य में 19 से 21 सितंबर के बीच एक बार फिर मूसलाधार बारिश का दौर शुरू होने की संभावना है। ठीक इसी अवधि में ओडिशा भी भारी बारिश की चपेट में रहेगा।
उधर, मध्य प्रदेश में मौसम का मिजाज दो हिस्सों में बंटा रहेगा—पूर्वी मध्य प्रदेश में 15 से 17 सितंबर के बीच अधिकांश जगह पानी बरसेगा, जबकि पश्चिमी हिस्से में यह सिलसिला 17 से 19 सितंबर तक खिंचेगा। दक्षिण भारत की बात करें तो तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराईकल के तटीय इलाकों में 21 सितंबर तक 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज झोंकेदार हवाएं चलने की चेतावनी है, जिसके चलते मछुआरों को गहरे समंदर में न जाने की सलाह दी गई है। पूर्वोत्तर के असम, मेघालय, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश में भी भूस्खलन और नदी-नालों के उफान को देखते हुए स्थानीय प्रशासन अलर्ट पर है।









