नई दिल्ली, 05 अप्रैल 2026 (दून हॉराइज़न)। अहमदाबाद में हुए भीषण विमान हादसे के जख्म एक बार फिर हरे हो गए हैं, क्योंकि अपनों को खोने वाले परिवारों ने अब सीधे प्रधानमंत्री कार्यालय का दरवाजा खटखटाया है। करीब 30 प्रभावित परिवारों ने सामूहिक रूप से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर विमान के ‘ब्लैक बॉक्स’ और ‘कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर’ (CVR) के डेटा को सार्वजनिक करने की मांग उठाई है।
परिजनों ने इस पत्र की प्रतियां विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (AAIB), नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) और गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल को भी प्रेषित की हैं। पत्र में स्पष्ट रूप से पूछा गया है कि यह भीषण तबाही किसी तकनीकी खराबी की वजह से हुई थी या फिर इसके पीछे कोई बड़ी मानवीय भूल जिम्मेदार थी।
पीड़ितों का कहना है कि यदि सुरक्षा कारणों से ब्लैक बॉक्स के डेटा को पूरी तरह सार्वजनिक नहीं किया जा सकता, तो कम से कम इसे उन परिवारों के साथ निजी तौर पर साझा किया जाए जिन्होंने इस त्रासदी में अपना सब कुछ खो दिया है। उनका तर्क है कि पारदर्शिता से ही उन्हें वह मानसिक सुकून मिल पाएगा, जिसकी तलाश में वे पिछले कई महीनों से भटक रहे हैं।

हादसे की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 12 जून 2025 को अहमदाबाद से लंदन के लिए उड़ान भरने वाला एयर इंडिया का बोइंग 787 ड्रीमलाइनर विमान टेक-ऑफ के तुरंत बाद एक छात्रावास से टकरा गया था। इस प्रलयंकारी दुर्घटना में गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री विजय रुपाणी सहित विमान में सवार 241 यात्रियों की मौत हो गई थी, जबकि जमीन पर मौजूद 20 अन्य लोग भी इसकी चपेट में आकर जान गंवा बैठे थे।
हादसे में अपनी मां को खोने वाली किंजल पटेल ने प्रशासनिक ढिलाई पर गंभीर सवाल उठाए हैं। किंजल के मुताबिक, आधिकारिक वेबसाइट पर 25,000 से अधिक सामानों की सूची तो डाल दी गई है, लेकिन उनकी तस्वीरें इतनी धुंधली हैं कि पहचान करना लगभग नामुमकिन है। वहीं, अपनी मां, भाई और बेटी को खोने वाले रोमिन वोरा ने बताया कि संपर्क के लिए सिर्फ एक ईमेल आईडी दी गई है, जिस पर भेजे गए संदेशों का जवाब आने में 15-15 दिन लग जाते हैं।
एक अन्य पीड़ित निलेश पुरोहित ने व्यवस्था पर चोट करते हुए कहा कि उन्हें किसी मुआवजे या पैसे की लालसा नहीं है, बल्कि वे सिर्फ उस कड़वी सच्चाई को जानना चाहते हैं जिसकी वजह से उनका परिवार उजड़ गया। फिलहाल इस मामले की जांच AAIB कर रही है, जिसमें अमेरिकी विशेषज्ञ भी शामिल हैं क्योंकि दुर्घटनाग्रस्त विमान और उसके इंजन का निर्माण अमेरिका में हुआ था।









