देहरादून, 21 मई (दून हॉराइज़न)। उत्तराखंड के मैदानी और कुछ पर्वतीय इलाकों में अगले 48 घंटे भारी पड़ने वाले हैं। मौसम विज्ञान केंद्र ने राज्य के छह प्रमुख जिलों में तीव्र लू (Uttarakhand Weather Alert) चलने और तापमान में भारी बढ़ोतरी की आशंका जताई है। इस चेतावनी के बाद शासन से लेकर जिला प्रशासन तक पूरी तरह सतर्क हो गया है। आम जनता को तेज धूप और गर्मी से बचाने के लिए एडवायजरी जारी की गई है।
इन जिलों के लिए जारी हुआ अलर्ट
मौसम विभाग के अनुसार देहरादून, हरिद्वार, पौड़ी, उधम सिंह नगर, नैनीताल और उत्तरकाशी के कुछ हिस्सों में सूरज के तेवर बेहद तल्ख रहेंगे। मौसम विज्ञान केंद्र के निदेशक सीएस तोमर ने बताया कि अगले दो दिनों में मैदानी जिलों में अधिकतम तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर जा सकता है। वहीं, आमतौर पर ठंडे रहने वाले पर्वतीय क्षेत्रों में भी पारा 30 डिग्री सेल्सियस को पार करने के आसार हैं, जिससे पहाड़ों में भी तपिश महसूस होगी।
आपातकालीन परिचालन केंद्र सक्रिय, अस्पतालों को निर्देश
भीषण गर्मी की स्थिति को देखते हुए जिला प्रशासन ने आपातकालीन परिचालन केंद्र (कंट्रोल रूम) को चौबीस घंटे के लिए एक्टिव कर दिया है। हीट वेव से जुड़ी किसी भी शिकायत या आपातकालीन स्थिति में यहां संपर्क किया जा सकता है। इसके साथ ही स्वास्थ्य विभाग ने सभी सरकारी अस्पतालों और प्राथमिक चिकित्सा इकाइयों को अलर्ट मोड पर रहने के निर्देश दिए हैं ताकि हीट स्ट्रोक के मरीजों को तुरंत इलाज मिल सके।
डॉक्टरों की सलाह: दोपहर 12 से 4 बजे तक रहें सावधान
बाल रोग विशेषज्ञ डॉक्टर झा के मुताबिक, इस मौसम में विशेष रूप से बच्चों, बुजुर्गों और फील्ड में काम करने वाले लोगों को अतिरिक्त सावधानी बरतनी होगी। दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे के बीच जब धूप सबसे तेज होती है, तब बिना वजह बाहर निकलने से बचना चाहिए। जरूरी काम होने पर सिर को छाते या सूती कपड़े से ढककर ही निकलें और चेहरे पर मास्क या सूती रुमाल का इस्तेमाल करें।
चिकित्सकों ने शरीर में पानी की कमी न होने देने की हिदायत दी है। इस दौरान नींबू पानी, नारियल पानी, जलजीरा, तरबूज और खरबूजा जैसे मौसमी फलों का सेवन शरीर को सुरक्षित रखने में मददगार होता है।
आपातकालीन गाइडलाइन: इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज
अगर हीट वेव के दौरान किसी व्यक्ति में नीचे दिए गए लक्षण दिखते हैं, तो उसे तुरंत नजदीकी अस्पताल ले जाएं:

- शरीर का तापमान तेजी से बढ़ना या तेज बुखार आना।
- सिर में तेज दर्द और चक्कर आना।
- उल्टी होना या लगातार जी मिचलाना।
- अत्यधिक कमजोरी के कारण बेहोशी छाना।









