नई दिल्ली। सोशल मीडिया पर एक बार फिर ‘Lockdown in India’ शब्द तेजी से तैर रहा है। संसद के बजट सत्र के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक संबोधन को आधार बनाकर यह दावा किया जा रहा है कि देश 2020 जैसी स्थिति की ओर बढ़ रहा है। हकीकत यह है कि इन दावों में कोई दम नहीं है। प्रधानमंत्री ने केवल वैश्विक संकट के प्रति सतर्क रहने की बात कही थी, जिसे गलत संदर्भ में लिया जा रहा है।
संसद में बोलते हुए प्रधानमंत्री ने पश्चिम एशिया में जारी तनाव और अमेरिका-ईरान संघर्ष का जिक्र किया। उन्होंने याद दिलाया कि जिस तरह 2020 में कोरोना ने वैश्विक सप्लाई चेन को तोड़ दिया था, आज युद्ध के कारण तेल और गैस की आपूर्ति पर वैसा ही खतरा मंडरा रहा है।
पीएम ने कहा, “हमें फिर से उसी तरह तैयार रहने की जरूरत है।” उनके इस ‘तैयार रहने’ वाले जुमले को लोगों ने सीधे लॉकडाउन से जोड़ दिया, जबकि उनका इशारा आर्थिक आत्मनिर्भरता और ऊर्जा सुरक्षा की ओर था।

छह साल पहले 24 मार्च 2020 को जब देशव्यापी तालाबंदी हुई थी, तब उद्देश्य वायरस के संक्रमण को रोकना था। आज स्थिति पूरी तरह अलग है। मौजूदा संकट सामरिक और आर्थिक है, न कि मेडिकल। तेल की वैश्विक कीमतों में उछाल और सप्लाई रूट बाधित होने की आशंका के बीच सरकार ने वैकल्पिक इंतजाम शुरू कर दिए हैं। इसमें एलपीजी की जमाखोरी पर लगाम और घरेलू पीएनजी कनेक्शनों के विस्तार जैसे कदम शामिल हैं।
जानकारों का मानना है कि डोनाल्ड ट्रंप द्वारा युद्ध विराम के संकेतों के बाद वैश्विक बाजार में घबराहट कम हुई है। भारत के पास पर्याप्त रणनीतिक पेट्रोलियम रिजर्व (SPR) मौजूद है, जो किसी भी आपात स्थिति में हफ्तों तक देश की जरूरतें पूरी कर सकता है।
स्पष्ट है कि इंटरनेट पर ‘Lockdown in India’ सर्च करने वालों को डरने की जरूरत नहीं है। देश में किसी भी तरह की तालाबंदी की कोई योजना नहीं है और जनजीवन सामान्य बना रहेगा।









