नई दिल्ली/मुंबई, 05 अप्रैल 2026 (दून हॉराइज़न)। पश्चिम एशिया में युद्ध के बादलों और अमेरिका की विनाशकारी सैन्य कार्रवाई की धमकियों के बीच भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए सुखद खबर है। रणनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से भारत के 9वें एलपीजी टैंकर ‘ग्रीन आशा’ को सुरक्षित बाहर निकलने की मंजूरी मिल गई है।
भारतीय झंडे वाला यह विशाल पोत भारी मात्रा में रसोई गैस लेकर भारतीय बंदरगाहों की ओर बढ़ रहा है, जिससे देश में पिछले कुछ दिनों से बनी एलपीजी की कमी दूर होने की प्रबल संभावना है।
होर्मुज के रास्ते भारत आने वाला यह दूसरा बड़ा टैंकर है; इससे ठीक दो दिन पहले 3 अप्रैल को ‘ग्रीन सांवी’ को भी रास्ता दिया गया था। ‘ग्रीन सांवी’ अकेले 46 हजार टन एलपीजी लेकर भारत पहुंच रहा है। हालांकि, राहत की इन खबरों के बीच चुनौतियां अब भी कम नहीं हैं। भारतीय पोत ‘जग विक्रम’ अभी भी अनुमति मिलने के इंतजार में होर्मुज के पास ही खड़ा है।
शिपिंग प्रोटोकॉल के तहत, इन टैंकरों को चरणबद्ध तरीके से निकाला जा रहा है, जिसमें भारत के साथ ईरान के विशेष संबंधों के कारण कच्चे तेल और गैस वाले जहाजों को प्राथमिकता दी जा रही है।
ईरान ने अपनी नीति साफ कर दी है कि वह भारत के टैंकरों के लिए रास्ता बंद नहीं करेगा, लेकिन अमेरिका और इजरायल का समर्थन करने वाले देशों के लिए होर्मुज के दरवाजे पूरी तरह बंद रहेंगे। इस बीच, मुंबई में ‘BW TYR’ नामक टैंकर पहले ही सुरक्षित पहुंच चुका है। शिपिंग महानिदेशालय की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, होर्मुज के पास वर्तमान में 16 भारतीय जहाज फंसे हुए हैं।
इनमें से 5 जहाज शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (SCI) के हैं, जो सुरक्षा मंजूरी का इंतजार कर रहे हैं। भारतीय नौसेना और विदेश मंत्रालय ओमान की खाड़ी, अदन की खाड़ी और लाल सागर में मौजूद अपने जहाजों की स्थिति पर पल-पल की नजर बनाए हुए हैं।

खाड़ी क्षेत्र में न केवल भारत की ऊर्जा जरूरतें, बल्कि 20,500 भारतीय नाविकों की सुरक्षा भी दांव पर लगी है। इनमें से 504 नाविक विशुद्ध रूप से भारतीय ध्वज वाले जहाजों पर तैनात हैं। कूटनीतिक प्रयासों का ही नतीजा है कि 3 अप्रैल को विभिन्न शिपिंग कंपनियों ने 1130 नाविकों को सुरक्षित निकालने में सफलता हासिल की है।
भारत इस समय ईरान की सरकार के साथ उच्च स्तरीय वार्ता कर रहा है, और अब तक तेहरान का रुख नई दिल्ली के प्रति काफी सकारात्मक और नरम रहा है।
दूसरी ओर, अंतरराष्ट्रीय राजनीति में पारा अपने चरम पर है। डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा है कि तेहरान में हुए ‘भीषण हमले’ में ईरान के शीर्ष सैन्य नेतृत्व को खत्म कर दिया गया है। ट्रंप ने तेहरान को समझौते के लिए केवल 48 घंटे का समय दिया है।
उन्होंने दोटूक लहजे में कहा है कि अगर समय सीमा के भीतर होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह नहीं खोला गया, तो ईरान पर ‘चौतरफा आफत’ बरसेगी। ट्रंप का यह रुख संकेत देता है कि आने वाले दो दिन वैश्विक तेल और गैस बाजार के लिए बेहद महत्वपूर्ण होने वाले हैं।










