नई दिल्ली, 04 अप्रैल 2026 (दून हॉराइज़न)। केंद्र सरकार ने शनिवार को उन तमाम अटकलों और सोशल मीडिया पोस्ट पर लगाम लगा दी है जिनमें ईरान से भारत आने वाले कच्चे तेल के कार्गो को लेकर भ्रामक दावे किए जा रहे थे। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने आधिकारिक बयान जारी कर कहा कि भुगतान संबंधी समस्याओं के कारण तेल खेप को चीन भेजने की खबरें पूरी तरह से आधारहीन हैं।
पेट्रोलियम मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर स्पष्ट किया कि भारत की तेल कंपनियों को अपने व्यावसायिक लाभ और जरूरत के हिसाब से सप्लायर चुनने की पूरी छूट है। सरकार ने उन रिपोर्ट्स को ‘तथ्यात्मक रूप से गलत’ करार दिया जिनमें कहा गया था कि भुगतान न होने के कारण ईरान ने अपना रुख बदल लिया है।
असल में यह विवाद ‘पिंग शुन’ (Ping Shun) नामक एक तेल टैंकर से शुरू हुआ था। शिप ट्रैकिंग डेटा के हवाले से दावा किया गया कि अमेरिकी प्रतिबंधों के साये में ईरानी तेल ला रहा यह जहाज गुजरात के वाडिनार तट की ओर आ रहा था, लेकिन अचानक इसने अपनी मंजिल बदलकर चीन के डोंगयिंग (Dongying) की ओर रुख कर लिया।
बाजार के कुछ विश्लेषकों ने इस बदलाव को भारत और ईरान के बीच सख्त भुगतान शर्तों से जोड़कर पेश किया था। सरकार ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा कि जहाज का रूट बदलना एक सामान्य कमर्शियल और ऑपरेशनल फैसला हो सकता है।
तेल व्यापार के नियमों को समझाते हुए मंत्रालय ने कहा कि ‘बिल ऑफ लैंडिंग’ में अक्सर कई संभावित गंतव्यों का जिक्र होता है। समुद्र में यात्रा के दौरान बाजार की मांग और लॉजिस्टिक कारणों से जहाज अपनी मंजिल बदल सकते हैं, जिसे गलत तरीके से पेश किया जा रहा है।
मौजूदा वैश्विक तनाव और मध्य पूर्व (Middle East) में चल रहे संकट के बीच भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा को लेकर भी स्थिति स्पष्ट की है। मंत्रालय ने भरोसा दिलाया कि भारतीय रिफाइनरियों ने आने वाले महीनों के लिए कच्चे तेल की अपनी जरूरतें पहले ही सुरक्षित कर ली हैं।

एलपीजी की कमी को लेकर फैल रही अफवाहों पर भी सरकार ने कड़ा जवाब दिया है। सरकार ने पुष्टि की है कि 44 हजार मीट्रिक टन ईरानी एलपीजी लेकर ‘सी बर्ड’ (Sea Bird) नामक जहाज निर्धारित समय पर 2 अप्रैल को मैंगलोर पोर्ट पहुंच गया है।
वर्तमान में ‘सी बर्ड’ जहाज से माल उतारने की प्रक्रिया (Unloading) जारी है, जो तेल और गैस की निर्बाध सप्लाई का पुख्ता सबूत है। भारत वर्तमान में 40 से अधिक देशों से कच्चा तेल खरीद रहा है ताकि किसी भी एक भौगोलिक क्षेत्र पर निर्भरता कम की जा सके।
रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद से भारत ने तेल आयात के अपने पोर्टफोलियो को काफी विविधतापूर्ण बनाया है। इस रणनीति के तहत भारत अब न सिर्फ पारंपरिक ओपेक (OPEC) देशों, बल्कि अन्य वैकल्पिक स्रोतों से भी रिकॉर्ड मात्रा में कच्चा तेल आयात कर रहा है।










