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उत्तराखंड में पेट्रोल-डीजल बचाने को लेकर नई गाइडलाइन जारी, ऐसे बचाएं अपनी गाड़ी का ईंधन

उत्तराखंड परिवहन विभाग ने वैश्विक ईंधन संकट के बीच राज्य में पेट्रोल-डीजल की खपत कम करने के लिए 10 सूत्रीय जन-एडवाइजरी जारी की है। इस मुहिम का उद्देश्य आम वाहन चालकों की ड्राइविंग आदतों में सुधार कर ईंधन की बचत करना और पर्यावरण पर बढ़ते दबाव को कम करना है।

उत्तराखंड में पेट्रोल-डीजल बचाने को लेकर नई गाइडलाइन जारी, ऐसे बचाएं अपनी गाड़ी का ईंधन

HIGHLIGHTS

  • ट्रैफिक सिग्नल पर 30 सेकंड से ज्यादा रुकने की स्थिति में गाड़ी का इंजन बंद करने का सुझाव।
  • वाहन में 50 किलो अतिरिक्त वजन बढ़ने से ईंधन की खपत दो प्रतिशत तक बढ़ जाती है।
  • टायरों में हवा कम होने पर पेट्रोल-डीजल का खर्च 5 से 10 फीसदी तक बढ़ने की चेतावनी।
  • विभाग 'नो व्हीकल डे' और 'एक अफसर-एक वाहन' जैसे प्रशासनिक बदलावों पर भी कर रहा है काम।

देहरादून, 18 मई 2026 (दून हॉराइज़न)। वैश्विक स्तर पर गहराते ईंधन संकट के बीच उत्तराखंड सरकार ने राज्य में पेट्रोल और डीजल की खपत को नियंत्रित करने के लिए एक बड़ी जन-मुहिम शुरू की है। परिवहन विभाग ने इस दिशा में कदम बढ़ाते हुए आम जनता के लिए 10 व्यावहारिक सुझावों की एक विस्तृत एडवाइजरी जारी की है। शासन का मानना है कि इन उपायों को अपनाकर आम वाहन चालक अपने मासिक बजट को सुधारने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण में भी योगदान दे सकते हैं।

मुख्यमंत्री और परिवहन मंत्री के निर्देश पर बनी रणनीति

परिवहन उपायुक्त शैलेश कुमार तिवारी ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील को ध्यान में रखते हुए राज्य में ईंधन बचत को प्राथमिकता दी जा रही है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और परिवहन मंत्री प्रदीप बत्रा ने विभाग को एक किफायती, सुरक्षित और टिकाऊ परिवहन ढांचा तैयार करने के निर्देश दिए थे। इसी निर्देश के क्रम में यह गाइडलाइन तैयार की गई है, जो सीधे तौर पर आम लोगों की भागीदारी से जुड़ी है।

विभाग ने स्पष्ट किया है कि सरकारी प्रयासों के साथ-साथ जब तक आम नागरिक अपनी ड्राइविंग आदतों में बदलाव नहीं करेंगे, तब तक ईंधन संरक्षण का लक्ष्य हासिल करना मुमकिन नहीं है। सरकार इस पूरी मुहिम को एक जन-आंदोलन का रूप देने की तैयारी में है।

परिवहन विभाग के 10 व्यावहारिक सुझाव

परिवहन विभाग की ओर से जारी एडवाइजरी में गाड़ी के रखरखाव से लेकर ड्राइविंग के तरीकों को लेकर अहम जानकारियां साझा की गई हैं:

  • ड्राइविंग का तरीका बदलें: अचानक स्पीड बढ़ाने या बार-बार ब्रेक लगाने से ईंधन ज्यादा खर्च होता है। सड़क की स्थिति देखकर ही सही गियर का इस्तेमाल करें।
  • टायर प्रेशर की जांच: टायरों में हवा कम होने से ईंधन की खपत 5 से 10 फीसदी तक बढ़ जाती है। घर पर ही नियमित रूप से टायर प्रेशर चेक करते रहें।
  • एसी का सीमित इस्तेमाल: सफर के दौरान जरूरत न होने पर एसी बंद रखें। अगर एसी ऑन है, तो गाड़ी की खिड़कियां पूरी तरह बंद रखें।
  • रेड लाइट पर इंजन करें बंद: ट्रैफिक सिग्नल या कहीं भी 30 सेकंड से ज्यादा रुकना पड़े, तो वाहन का इंजन बंद कर दें। इससे माइलेज सुधरेगा और प्रदूषण भी घटेगा।
  • अनावश्यक वजन से बचें: गाड़ी के बूट स्पेस (डिक्की) को खाली रखें। वाहन में हर 50 किलोग्राम अतिरिक्त वजन बढ़ने पर ईंधन की खपत दो प्रतिशत तक बढ़ जाती है।
  • क्रूज कंट्रोल का सही प्रयोग: हाईवे पर गाड़ी चलाते समय क्रूज कंट्रोल का इस्तेमाल करने से माइलेज में 10 फीसदी तक सुधार होता है, हालांकि पहाड़ी रास्तों पर इसके प्रयोग से बचना चाहिए।
  • नेविगेशन का उपयोग: जाम वाले रास्तों और पीक आवर्स में यात्रा करने से बचें। छोटे और साफ रास्तों के लिए नेविगेशन ऐप की मदद लें।
  • समय पर सर्विसिंग: गाड़ी के एयर फिल्टर, इंजन ऑयल और स्पार्क प्लग को समय पर बदलवाएं। नियमित सर्विसिंग से इंजन बेहतर प्रदर्शन करता है।
  • कार पूलिंग को बढ़ावा: एक ही दिशा या दफ्तर जाने वाले लोग आपस में कार पूल कर सकते हैं। इससे व्यक्तिगत खर्च और कार्बन उत्सर्जन दोनों में कमी आएगी।
  • सार्वजनिक वाहनों को प्राथमिकता: निजी वाहनों के बजाय बस या अन्य सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करें। कम दूरी के लिए पैदल चलने या साइकिल का इस्तेमाल करने की आदत डालें।

प्रशासनिक स्तर पर भी लागू होंगे कड़े नियम

परिवहन विभाग केवल आम जनता को ही जागरूक नहीं कर रहा, बल्कि सरकारी तंत्र के भीतर भी ईंधन बचाने के लिए बड़े बदलावों की तैयारी है। विभाग के भीतर ‘एक अफसर-एक वाहन’ की नीति को कड़ाई से लागू किया जाएगा और वीआईपी काफिलों में कटौती करने की योजना है।

इसके साथ ही आने वाले दिनों में ‘नो व्हीकल डे’, नई ईवी (इलेक्ट्रिक व्हीकल) पॉलिसी को बढ़ावा देने, वर्क फ्रॉम होम और डिजिटल बैठकों के जरिए सरकारी दौरों को कम करने की रणनीति पर काम चल रहा है ताकि पर्यावरण अनुकूल परिवहन व्यवस्था को सुचारू रूप से लागू किया जा सके।


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Harpreet Singh

हरप्रीत सिंह पिछले 10 वर्षों से 'दून हॉराइज़न' के साथ जुड़े हुए हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में एक दशक का अनुभव रखने वाले हरप्रीत की उत्तराखंड और अन्य राज्यों की खबरों पर गहरी पकड़ है. उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा में उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय से एमबीए (MBA) की डिग्री हासिल की है. इसके अलावा, उन्होंने भारतीय विद्या भवन, मुंबई से पब्लिक रिलेशंस (जनसंपर्क) में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा भी पूरा किया है. अपने अनुभव और शिक्षा के माध्यम से वे पाठकों तक सटीक और विश्लेषणात्मक खबरें पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

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