दून हॉराइज़न, मुंबई (1 अक्टूबर) : सितंबर की तेज बिकवाली से थर्राई दलाल स्ट्रीट अब त्योहारी तिमाही के दम पर वापसी की राह तलाश रही है। हालांकि महीने के पहले कारोबारी दिन भी सूचकांकों पर दबाव बना रहा, मगर ऐतिहासिक आंकड़े निवेशकों को पूरी तरह मायूस नहीं होने देते। पिछले एक दशक का ट्रैक रिकॉर्ड बताता है कि भारतीय शेयर बाजार (Stock Market) के लिए अक्टूबर आमतौर पर रिकवरी लेकर आता है।
10 साल का ट्रेंड और फेस्टिव सीजन की उम्मीद
बीते 10 वर्षों के दौरान 7 बार निफ्टी 50 ने अक्टूबर में बढ़त के साथ क्लोजिंग दी है। ऐतिहासिक रूप से इस महीने सेंसेक्स और निफ्टी में करीब 1 प्रतिशत की औसत तेजी दर्ज की गई। वहीं मिडकैप 150 में 1 प्रतिशत और स्मॉलकैप 250 इंडेक्स में लगभग 1.4 प्रतिशत तक की बढ़त देखी गई है।
एसबीआई सिक्योरिटीज में फंडामेंटल रिटेल रिसर्च के हेड सन्नी अग्रवाल का विश्लेषण है कि त्योहारी सीजन आते ही ऑटोमोबाइल, जेम्स एंड ज्वैलरी और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स की बिक्री में उछाल आता है। वित्त वर्ष की दूसरी छमाही पारंपरिक तौर पर उपभोक्ता मांग के लिहाज से पहली छमाही से कहीं ज्यादा मजबूत रहती है, जिसका सीधा असर कॉरपोरेट अर्निंग्स पर पड़ता है।
विदेशी बिकवाली और कच्चे तेल की दोहरी चुनौती
इतिहास चाहे जितना मददगार दिखे, मौजूदा मैक्रो हालात आसान नहीं हैं। सितंबर का महीना भारतीय बाजारों के लिए मार्च के बाद का सबसे खराब दौर साबित हुआ, जहां सेंसेक्स और निफ्टी 6 फीसदी टूटे, मिडकैप में 6.6 फीसदी और स्मॉलकैप में 3.2 फीसदी की गिरावट आई। ब्रेंट क्रूड की चढ़ती कीमतें भारत के आयात बिल पर दबाव डाल रही हैं।
इसके साथ अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में मजबूती के चलते विदेशी संस्थागत निवेशक (FIIs) लगातार बिकवाली कर रहे हैं। कमजोर पड़ता रुपया भी सेंटीमेंट बिगाड़ रहा है। इविरस सिक्योरिटीज के डायरेक्टर तेजस शाह के मुताबिक, अक्टूबर यह तय करेगा कि हालिया गिरावट ने वैश्विक जोखिमों को पूरी तरह डिस्काउंट कर लिया है या फिर बाजार में और कंसोलिडेशन बाकी है।
23,100 पर कड़ा इम्तिहान, बैंकों के हाथ में कमान
हालिया गिरावट से पहले 23,000 का स्तर बाजार के लिए मजबूत सपोर्ट का काम कर रहा था। अब यही दायरा पलटकर 23,000 से 23,100 के बीच कड़ा रेजिस्टेंस (Technical Resistance) बन चुका है। बुधवार को निफ्टी 22,620 के आसपास बंद हुआ था। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि इंडेक्स के ओवरसोल्ड स्थिति में होने से तकनीकी बाउंस बैक आ सकता है, लेकिन सस्टेनेबल तेजी तभी बनेगी जब निफ्टी 23,100 के पार टिकेगा।
इसके बाद ही 23,600 का स्तर खुल पाएगा। इस पूरे समीकरण में सबसे अहम भूमिका प्राइवेट लेंडर्स की होगी, क्योंकि निफ्टी में वित्तीय सेवाओं और बैंकिंग का भार सबसे अधिक है। इसके अलावा अक्टूबर के दूसरे हफ्ते से शुरू होने वाले Q2 नतीजों की दिशा ही तय करेगी कि क्या कॉर्पोरेट ग्रोथ इन ऊंचे वैल्यूएशंस को संभाल पाएगी।




