चंडीगढ़, 05 अप्रैल 2026 (दून हॉराइज़न)। पंजाब सरकार के वरिष्ठ मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने अपनी ही पार्टी के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा है कि पंजाब की गंभीर सियासत फिल्मी डायलॉग के भरोसे नहीं चलाई जा सकती। रविवार को समाचार एजेंसी आईएएनएस से खास बातचीत के दौरान चीमा ने राघव चड्ढा के उस वीडियो पर पलटवार किया, जिसमें उन्होंने विरोधियों को ‘ट्रेलर’ दिखाने की बात कही थी।
चीमा ने दोटूक लहजे में कहा कि पंजाब के लोगों की वास्तविक सेवा करने के लिए चौबीसों घंटे काम करने का जज्बा और एक बड़ा दिल होना अनिवार्य है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि कुछ लोग केवल फिल्मी डायलॉगबाजी के जरिए अपनी राजनीतिक रोटियां सेकना चाहते हैं, जबकि राज्य के बुनियादी मसलों पर उनकी पकड़ शून्य है।
हरपाल सिंह चीमा ने राघव चड्ढा की संसदीय सक्रियता पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब पंजाब बाढ़ की विभीषिका झेल रहा था, तब सांसद ने इस पर आवाज नहीं उठाई। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि पंजाब सरकार का करोड़ों रुपया केंद्र सरकार ने रोक रखा है, लेकिन चड्ढा ने इस आर्थिक नाकेबंदी के खिलाफ सदन में कभी प्रभावी स्टैंड नहीं लिया।
मंत्री ने आगे जोड़ा कि भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव के कारण पंजाब के सीमावर्ती क्षेत्रों के किसानों और निवासियों को जो भारी आर्थिक नुकसान हुआ, उस पर भी राघव चड्ढा खामोश रहे। चीमा के मुताबिक, ये वो बड़े मुद्दे हैं जो पंजाब की अर्थव्यवस्था की रीढ़ को प्रभावित करते हैं, जबकि चड्ढा ने सदन में बेहद साधारण और कम महत्व वाले विषयों पर बात की।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह विवाद आम आदमी पार्टी के भीतर पंजाब बनाम दिल्ली की उस पुरानी बहस को फिर से हवा दे सकता है, जिसमें स्थानीय नेता बाहरी हस्तक्षेप को पसंद नहीं करते। हालिया आंकड़ों के अनुसार, पंजाब का ग्रामीण विकास फंड (RDF) और नेशनल हेल्थ मिशन का पैसा लंबे समय से केंद्र के पास लंबित है, जिसे लेकर राज्य सरकार लगातार संघर्ष कर रही है।
इससे पहले राघव चड्ढा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर अपनी पार्टी के उन साथियों को जवाब दिया था जिन्होंने उन पर संसद में पंजाब की अनदेखी का आरोप लगाया था। चड्ढा ने राज्यसभा के अपने भाषणों का एक क्लिप साझा करते हुए लिखा था कि यह तो सिर्फ ‘ट्रेलर’ है और ‘पिक्चर अभी बाकी है’।

चड्ढा ने अपनी पोस्ट में भावुक कार्ड खेलते हुए कहा था कि पंजाब उनके लिए केवल एक राजनीतिक मुद्दा नहीं है, बल्कि उनकी मिट्टी और आत्मा है। हालांकि, हरपाल सिंह चीमा के ताजा बयान ने यह साफ कर दिया है कि पार्टी के भीतर उनकी इस सफाई को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है और अंदरूनी कलह अब सार्वजनिक मंच पर आ चुकी है।








