चंडीगढ़, 05 अप्रैल 2026 (दून हॉराइज़न)। पंजाब की सियासत में उस वक्त नया मोड़ आ गया जब शिरोमणि अकाली दल (पुनर सुरजीत) के वरिष्ठ नेता बरजिंदर सिंह माखन ने शनिवार को अपने पद और पार्टी से नाता तोड़ लिया। पूर्व मंत्री स्वर्गीय तोता सिंह के बेटे माखन ने सोशल मीडिया पर एक विस्तृत पोस्ट साझा कर पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को कटघरे में खड़ा किया है।
Moga, 05 अप्रैल 2026 (दून हॉराइज़न)। बरजिंदर सिंह माखन ने अपने इस्तीफे में सीधा हमला पार्टी अध्यक्ष ज्ञानी हरप्रीत सिंह और दाखा से विधायक मनप्रीत सिंह अयाली पर बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि इन नेताओं ने पंथ यानी सिख समुदाय की भावनाओं के साथ खिलवाड़ किया है। माखन के मुताबिक, ये नेता पर्दे के पीछे से केंद्रीय एजेंसियों और पंजाब की वर्तमान आम आदमी पार्टी सरकार के साथ हाथ मिला चुके हैं।
गौरतलब है कि शिरोमणि अकाली दल (पुनर सुरजीत) का गठन पिछले साल (11 अगस्त 2025) सुखबीर सिंह बादल के खिलाफ बगावत करने वाले धड़े ने किया था। माखन का दावा है कि इस पूरी पार्टी का वजूद ही एक बड़ी साजिश के तहत खड़ा किया गया था ताकि मूल शिरोमणि अकाली दल को कमजोर किया जा सके। उन्होंने कहा कि अकाल तख्त साहिब का नाम लेकर लोगों को भावनात्मक रूप से जोड़ा गया, लेकिन असल मकसद कुछ और ही था।
बरजिंदर सिंह माखन ने विधायक मनप्रीत सिंह अयाली पर व्यक्तिगत निशाना साधते हुए कहा कि अयाली ने उन्हें अपनी बातों में फंसाकर पार्टी में शामिल किया था। उन्होंने आरोप लगाया कि जब भी पंजाब या पंथ के अधिकारों की बात आती थी, तो अयाली चुप्पी साध लेते थे। माखन के अनुसार, अयाली केवल सुखबीर बादल के खिलाफ बोलने के लिए सक्रिय रहते थे, लेकिन सरकार के खिलाफ एक शब्द नहीं कहते थे।
इसके अलावा, उन्होंने अकाल तख्त के पूर्व जत्थेदार और वर्तमान पार्टी अध्यक्ष ज्ञानी हरप्रीत सिंह पर भी गंभीर सवाल उठाए। माखन ने कहा कि ज्ञानी हरप्रीत सिंह केवल दिल्ली से ‘सिग्नल’ मिलने पर ही बयानबाजी करते थे। उन्होंने अपनी अंतरात्मा का हवाला देते हुए कहा कि अब वे इस साजिश का हिस्सा बनकर पंथ से सच नहीं छिपा सकते। माखन ने स्वीकार किया कि उन्हें उस पार्टी का हिस्सा बनने पर खेद है जिसे केवल अकाली दल को खत्म करने के लिए बनाया गया था।
इन तीखे आरोपों पर पलटवार करते हुए मनप्रीत सिंह अयाली ने अपनी सफाई पेश की। अयाली ने कहा कि राजनीति में किसी पर कीचड़ उछालना सबसे सरल कार्य है, लेकिन सच के रास्ते पर टिके रहना कठिन होता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे केवल पंथ के कल्याण और पंजाब की प्रगति के लिए निस्वार्थ भाव से काम कर रहे हैं। अयाली ने संकेत दिया कि सच की राह पर चलते समय कुछ करीबी साथ छोड़ सकते हैं, लेकिन उनका संकल्प अडिग है।









