नई दिल्ली, 09 अगस्त 2026 (दून हॉराइज़न)।
Ram Mandir Theft Case : कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने अयोध्या स्थित राम मंदिर के अंदर रखी संपत्ति की सुरक्षा को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि मंदिर परिसर से सोने की ईंट, सोने की रामचरितमानस, गहने, चांदी और नकदी जैसी चीजें गायब हुई हैं या उनका सही हिसाब नहीं है। इस पूरे मामले पर विपक्षी दल लगातार आक्रामक रुख अपनाए हुए हैं और सीधे तौर पर सरकार की मंशा पर सवाल उठा रहे हैं।
मल्लिकार्जुन खड़गे ने अपने वक्तव्य में स्पष्ट किया कि यह मुद्दा सबसे पहले उनकी पार्टी और सहयोगियों ने ही उठाया था। मंदिर के भीतर रखी बेशकीमती संपत्तियों की चोरी का दावा करते हुए उन्होंने कहा कि यह कोई सामान्य बात नहीं है। उन्होंने सवाल खड़ा किया कि मंदिर परिसर की देख-रेख में लगे लोगों के रहते यह सब कैसे संभव हुआ।

मंदिर ट्रस्ट के गठन की प्रक्रिया को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की स्थापना प्रधानमंत्री के स्तर पर की गई थी। ट्रस्ट के सदस्यों का चयन भी केंद्र सरकार के शीर्ष नेतृत्व द्वारा ही तय किया गया था।
खड़गे ने मंदिर के भव्य उद्घाटन और धार्मिक अनुष्ठानों का हवाला देते हुए पीएम मोदी पर निशाना साधा। उन्होंने याद दिलाया कि राम मंदिर का उद्घाटन, पहली पूजा की शुरुआत और मंदिर के शिखर पर ध्वजारोहण जैसे तमाम महत्वपूर्ण कार्य खुद प्रधानमंत्री ने अंजाम दिए थे। जब पूरा ढांचा और उसकी कमान सरकार के हाथों में तय हुई थी, तो जिम्मेदारी से पीछे नहीं हटा जा सकता।
संसद के भीतर इस मुद्दे पर जवाब देने से बचने का आरोप लगाते हुए खड़गे ने सवाल किया कि आखिर प्रधानमंत्री सदन में आकर बोलने से क्यों डर रहे हैं। उन्होंने मांग की कि प्रधानमंत्री को खुद संसद के पटल पर आकर पूरे घटनाक्रम की सच्चाई देश के सामने रखनी चाहिए।
ट्रस्ट में शामिल किए गए लोगों के चरित्र और उनकी पृष्ठभूमि पर भी खड़गे ने गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि उन्होंने किन-किन लोगों को ट्रस्ट का हिस्सा बनाया और उन पर किस तरह की जिम्मेदारियां थीं। जब तमाम निर्णय एक ही जगह से लिए गए थे, तो गड़बड़ियों का जवाब देने की नैतिक जिम्मेदारी भी उसी नेतृत्व की बनती है।
मंदिर की संपत्तियों की हिफाजत को लेकर खड़गे ने कुछ संदिग्ध बयानों का जिक्र किया, जहां यह कहा गया कि सामान निकालकर रख दिया गया है और वक्त आने पर इस्तेमाल किया जाएगा। उन्होंने पूछा कि आखिर यह बात किसने बोली और किस आधार पर बोली। ऐसे विरोधाभासी बयानों से लोगों के मन में भ्रम और आशंकाएं और ज्यादा गहरा गई हैं।
खड़गे ने दावा किया कि राम मंदिर और भगवान राम में आस्था रखने वाले करोड़ों श्रद्धालु इस पूरे घटनाक्रम से बेहद दुखी और परेशान हैं। जब किसी व्यक्ति की धार्मिक आस्था और भक्ति पर चोट पहुंचती है, तो वह किसी भी पद या व्यक्ति का लिहाज नहीं करता। धर्म के नाम पर लापरवाही या गड़बड़ी को कोई भी नागरिक स्वीकार करने को तैयार नहीं है।
जनता के आक्रोश का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि जब धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचती है, तो हर नागरिक सवाल उठाने के लिए खड़ा हो जाता है। यह देश के आम लोगों का मुद्दा बन चुका है और जनता सरकार से पारदर्शिता चाहती है। लोग चाहते हैं कि मंदिर के एक-एक सामान का सही हिसाब सार्वजनिक किया जाए।
विपक्ष की भूमिका पर बात करते हुए खड़गे ने कहा कि जनता यह अपेक्षा करती है कि विपक्षी दल इस तरह के गंभीर मुद्दों को पूरी ताकत से उठाएं। लोग चाहते हैं कि मंदिर की संपत्ति से जुड़ा मामला संसद में पूरी प्रखरता से गूंजे। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल जनता की इसी आवाज को मजबूती से उठा रहे हैं और सरकार से जवाब मांग रहे हैं।













