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Saif Ali Khan Bollywood Journey : चॉकलेटी बॉय से खूंखार विलेन तक, जब रिस्क लेकर सैफ अली खान ने पलट दी अपनी तकदीर

बॉलीवुड अभिनेता सैफ अली खान 16 अगस्त को अपना जन्मदिन मना रहे हैं। रोमांटिक और सपोर्टिंग किरदारों से करियर की शुरुआत करने वाले सैफ ने 'ओमकारा' के लंगड़ा त्यागी और बाद में कई यादगार नेगेटिव रोल्स के जरिए सिनेमा जगत में अपनी मजबूत पहचान बनाई है।

Published On: August 16, 2026 12:06 PM
Saif Ali Khan Bollywood Journey

HIGHLIGHTS

  • सैफ अली खान का जन्म 16 अगस्त 1967 को दिल्ली के पटौदी परिवार में हुआ था।
  • 1993 में फिल्म 'परंपरा' से डेब्यू करने के बाद उन्होंने 'आशिक आवारा' और 'मैं खिलाड़ी तू अनाड़ी' जैसी फिल्मों में काम किया।
  • 'हम साथ साथ हैं', 'दिल चाहता है' और 'कल हो ना हो' जैसी फिल्मों में सपोर्टिंग रोल से पहचान मजबूत की।
  • 2006 की फिल्म 'ओमकारा' में 'लंगड़ा त्यागी' के किरदार ने उनके करियर को एक नया मोड़ दिया।

Saif Ali Khan Bollywood Journey : बॉलीवुड में जब कोई एक्टर अपनी बनी-बनाई इमेज से बाहर निकलने की हिम्मत करता है, तो कई बार सिनेमा का इतिहास बदल जाता है।

सैफ अली खान की फिल्मी यात्रा भी कुछ ऐसी ही रही है। 90 के दशक में एक लवर बॉय के रूप में संघर्ष करने वाले सैफ ने जब ग्रे शेड और नेगेटिव किरदारों की ओर रुख किया, तो उन्होंने दर्शकों के साथ-साथ क्रिटिक्स को भी प्रभावित किया।

नवाब खानदान और शुरुआती पहचान

नई दिल्ली में मशहूर क्रिकेटर मंसूर अली खान पटौदी और दिग्गज अदाकारा शर्मिला टैगोर के घर जन्मे सैफ पर शुरू से ही एक खास पहचान का दबाव था। उन्होंने 1993 में फिल्म ‘परंपरा’ से अपने अभिनय करियर की शुरुआत की।

शुरुआती दौर में ‘आशिक आवारा’ जैसी फिल्मों से उन्होंने रोमांटिक हीरो बनने की कोशिश की। हालांकि, सोलो हीरो के रूप में उन्हें वह सफलता नहीं मिल पा रही थी, जिसकी उन्हें तलाश थी।

सपोर्टिंग रोल से मिला बड़ा सहारा

जब सोलो लीड के तौर पर फिल्में खास नहीं चलीं, तो सैफ ने दो-हीरो वाली फिल्मों का रास्ता चुना। 90 के दशक में ‘मैं खिलाड़ी तू अनाड़ी’ और ‘कच्चे धागे’ जैसी फिल्मों में उनके काम को काफी सराहा गया।

इसके बाद ‘हम साथ-साथ हैं’, ‘दिल चाहता है’ और ‘कल हो ना हो’ जैसी मल्टी-स्टारर फिल्मों ने यह साबित कर दिया कि वे स्क्रीन पर अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराने का हुनर जानते हैं।

‘हम तुम’ और ‘परिणीता’ जैसी फिल्मों से उन्होंने अपनी सोलो पहचान भी मजबूत की।

‘लंगड़ा त्यागी’ और करियर का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट

साल 2004 में आई फिल्म ‘एक हसीना थी’ में सैफ ने पहली बार नेगेटिव टच वाला किरदार निभाया, जिससे लोगों को उनके नए अंदाज का पता चला।

लेकिन साल 2006 में विशाल भारद्वाज की फिल्म ‘ओमकारा’ उनके करियर का सबसे बड़ा मोड़ साबित हुई।

इस फिल्म में ‘लंगड़ा त्यागी’ के रोल में उनका अभिनय इतना गहरा और प्रभावी था कि इसने भारतीय सिनेमा में खलनायकी की परिभाषा बदल दी।

आज के दौर के सबसे भरोसेमंद विलेन

‘ओमकारा’ की सफलता के बाद सैफ ने लगातार लीक से हटकर किरदार चुने। ‘रेस’ सीरीज में उनके स्टाइलिश अंदाज के बाद, ‘ताण्हाजी: द अनसंग वॉरियर’ में उदयभान सिंह राठौड़ का खूंखार किरदार हो या ‘आदिपुरुष’ और ‘देवरा’ जैसी बड़े बजट की फिल्में, सैफ ने हर बार नेगेटिव किरदारों में जान फूंकी है।

निजी जिंदगी का सफर

सैफ की पहली शादी अभिनेत्री अमृता सिंह से हुई थी, जिनसे उनके दो बच्चे सारा अली खान और इब्राहिम अली खान हैं।

बाद में दोनों अलग हो गए। इसके बाद सैफ ने अभिनेत्री करीना कपूर से शादी की, जिनसे उनके दो बेटे तैमूर और जहांगीर हैं।

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Ganga

गंगा 'दून हॉराइज़न' में धर्म और ज्योतिष संवाददाता के पद पर कार्यरत हैं। उन्हें वैदिक ज्योतिष, पंचांग, व्रत-त्योहार और वास्तु शास्त्र का गहरा ज्ञान और वर्षों का अनुभव है। गंगा का उद्देश्य सिर्फ दैनिक राशिफल बताना नहीं, बल्कि धर्म और अध्यात्म से जुड़ी सटीक, शोध-आधारित और प्रामाणिक जानकारी आम जनमानस तक पहुंचाना है। वह ज्योतिषीय गणनाओं और धार्मिक मान्यताओं का गहराई से विश्लेषण करती हैं। उनकी तथ्यपरक लेखनी पाठकों को अंधविश्वास से दूर रखकर एक सकारात्मक मार्गदर्शन प्रदान करती है, जिससे वे डिजिटल पाठकों के बीच एक बेहद भरोसेमंद नाम बन गई हैं।

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