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Sawan Amavasya Date : सावन अमावस्या पर शिवजी की पूजा के साथ जरूर करें ये काम, पितर भी होंगे प्रसन्न

सावन मास की कृष्ण पक्ष की अमावस्या को हरियाली अमावस्या के रूप में श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस दिन भगवान शिव की पूजा के साथ-साथ पितरों के निमित्त तर्पण और दान करने से जीवन में सुख-शांति आती है।

Published On: August 11, 2026 9:41 AM
Sawan Amavasya Date

Sawan Amavasya Date : सनातन परंपरा में सावन महीने की अमावस्या का विशेष धार्मिक महत्व माना गया है। इसे हरियाली अमावस्या के नाम से भी जाना जाता है।

यह दिन देवों के देव महादेव की आराधना के साथ-साथ अपने पूर्वजों (पितरों) का स्मरण करने और उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का सबसे उत्तम अवसर होता है।

मान्यता है कि इस दिन किया गया दान और तर्पण सीधे पितरों तक पहुंचता है, जिससे घर-परिवार में सुख, समृद्धि और शांति का वास होता है।

सावन अमावस्या की तिथि और शुभ मुहूर्त

शास्त्रों के अनुसार, अमावस्या का व्रत और पूजन हमेशा उदया तिथि में करना उत्तम माना जाता है।

इस बार श्रावण मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि की शुरुआत 12 अगस्त को तड़के 01:52 बजे हो रही है, जो उसी दिन रात 11:06 बजे तक रहेगी।

ऐसे में 12 अगस्त को ही हरियाली अमावस्या का व्रत, स्नान, दान और पितृ पूजन किया जाएगा।

पितृ तर्पण की आसान और सही विधि

अमावस्या के दिन पितरों को तृप्त करने के लिए तर्पण करने का विधान है। अगर आप घर पर ही तर्पण कर रहे हैं, तो इस विधि का पालन करें:

स्नान और संकल्प: सुबह सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र पहनें। इसके बाद मन को शांत रखकर अपने पितरों का ध्यान करें।

तर्पण की दिशा: पूजा के स्थान या किसी पवित्र जलस्रोत के पास दक्षिण दिशा की ओर मुख करके बैठें।

सामग्री: एक पात्र में साफ जल लें। उसमें थोड़े काले तिल, कुशा और ताजे फूल मिला लें।

अंजलि अर्पित करना: हाथ में जल लेकर अपने पितरों का नाम और गोत्र बोलते हुए श्रद्धापूर्वक अंजलि से जल अर्पित करें।

अगर किसी कारणवश आपके लिए विधिवत तर्पण करना संभव न हो, तो केवल शांत मन से दक्षिण दिशा की ओर देखकर हाथ जोड़ें और अपने पूर्वजों को याद करते हुए जल अर्पित कर दें।

जीवन में सुख-समृद्धि के लिए करें ये आसान उपाय

सावन की हरियाली अमावस्या पर कुछ पारंपरिक उपाय करने से घर की नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और मानसिक शांति मिलती है।

1. पंचबलि का भोजन निकालें

भोजन बनाने के बाद सबसे पहले गाय, कौए और कुत्ते के लिए भोजन का एक हिस्सा अलग निकालें। किसी भूखे या जरूरतमंद व्यक्ति को आदरपूर्वक भोजन कराना भी बेहद पुण्यदायी माना जाता है।

2. पीपल के वृक्ष की पूजा

पितृ दोष या जीवन की अन्य रुकावटों से राहत के लिए अमावस्या के दिन पीपल के पेड़ की पूजा करें। शाम के समय पीपल के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं और पेड़ की परिक्रमा करें।

3. भगवान शिव का जलाभिषेक

चूंकि यह सावन का महीना है, इसलिए इस दिन शिवलिंग पर जल और बेलपत्र चढ़ाना न भूलें। जलाभिषेक के साथ महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें और अपने परिवार की भलाई के लिए प्रार्थना करें।

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Ganga

गंगा 'दून हॉराइज़न' में धर्म और ज्योतिष संवाददाता के पद पर कार्यरत हैं। उन्हें वैदिक ज्योतिष, पंचांग, व्रत-त्योहार और वास्तु शास्त्र का गहरा ज्ञान और वर्षों का अनुभव है। गंगा का उद्देश्य सिर्फ दैनिक राशिफल बताना नहीं, बल्कि धर्म और अध्यात्म से जुड़ी सटीक, शोध-आधारित और प्रामाणिक जानकारी आम जनमानस तक पहुंचाना है। वह ज्योतिषीय गणनाओं और धार्मिक मान्यताओं का गहराई से विश्लेषण करती हैं। उनकी तथ्यपरक लेखनी पाठकों को अंधविश्वास से दूर रखकर एक सकारात्मक मार्गदर्शन प्रदान करती है, जिससे वे डिजिटल पाठकों के बीच एक बेहद भरोसेमंद नाम बन गई हैं।

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