Surya Arghya Niyam : सुबह-सुबह भगवान सूर्य को अर्घ्य देना हमारी दैनिक जीवनशैली और धार्मिक परंपरा का एक अहम हिस्सा है। सूर्य को ग्रहों का राजा माना गया है, जो हमारी सेहत, आत्मविश्वास, मान-सम्मान और करियर के सीधे कारक हैं।
कई बार लोग जल देते समय केवल सादा पानी इस्तेमाल करते हैं या अनजाने में ऐसी चीजें मिला देते हैं, जो ज्योतिषीय दृष्टि से सही नहीं मानी जातीं।
अगर आप अपनी पूजा का पूरा फल पाना चाहते हैं, तो जल में मिलाई जाने वाली चीजों का ध्यान रखना बहुत जरूरी है।
अर्घ्य के जल में क्या-क्या मिलाना शुभ होता है?
जब भी आप तांबे के लोटे में जल लें, तो उसमें सूर्य देव की प्रिय चीजें मिलाएं। इससे आपकी मनोकामनाएं जल्दी पूरी होती हैं:
लाल चंदन या रोली: जल में रोली या लाल चंदन मिलाने से समाज में पद-प्रतिष्ठा बढ़ती है और खून से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं में राहत मिलती है।
लाल फूल: लाल फूल सकारात्मक ऊर्जा और आत्मबल का प्रतीक है। इसे जल में डालकर अर्घ्य देने से आपका आत्मविश्वास बढ़ता है और रुके हुए काम बनने लगते हैं।
गुड़: गुड़ का संबंध सूर्य और मंगल दोनों से है। जल में थोड़ा सा गुड़ मिलाकर चढ़ाने से रिश्तों में मिठास आती है और पारिवारिक कलह शांत होती है।
गेहूं: करियर में तरक्की और घर में धन-धान्य की वृद्धि के लिए जल में गेहूं के कुछ दाने मिलाना बहुत फलदायी माना जाता है।

हल्दी (विशेष परिस्थितियों में): हल्दी बृहस्पति का प्रतीक है। अगर शादी में देरी हो रही हो या सेहत ठीक न रहती हो, तो गुरुवार के दिन जल में चुटकी भर हल्दी मिलाकर अर्घ्य दें।
जल में भूलकर भी न डालें ये चीजें
जिस तरह कुछ चीजें सूर्य देव को प्रसन्न करती हैं, ठीक वैसे ही कुछ सामग्रियां ऐसी हैं जिन्हें अर्घ्य के जल में नहीं डालना चाहिए:
दूध और अक्षत (चावल): इनका संबंध चंद्रमा से है। चंद्रमा और सूर्य का स्वभाव अलग है, इसलिए इन्हें अर्घ्य जल में मिलाने से बचें।
नमक: रविवार के दिन नमक का सेवन और सूर्य पूजा में इसका प्रयोग वर्जित माना गया है।
तेल और घी: तेल और घी का संबंध शनि और राहु से है। सूर्य के साथ इन विरोधी स्वभाव वाले ग्रहों की चीजें चढ़ाने से प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
रोज और रविवार के अर्घ्य में क्या अंतर है?
सामान्य दिनों में आप रोली, लाल फूल, गुड़ या सादे जल से अर्घ्य दे सकते हैं। लेकिन रविवार का दिन सूर्य देव का विशेष दिन होता है। इस दिन मांगी गई मनोकामनाएं जल्दी फलित होती हैं।
अगर आपकी कुंडली में पितृ दोष है, बहुत अधिक मानसिक तनाव रहता है या सेहत से जुड़ी गंभीर समस्या है, तो रविवार, संक्रांति, अमावस्या या पितृ पक्ष के दिन जल में काले तिल मिलाकर अर्घ्य दें।
ध्यान रखें कि काले तिल वाला यह उपाय रोज नहीं करना चाहिए, इसे केवल विशेष दिनों पर ही आजमाएं।
सूर्य देव को जल अर्पित करते समय बर्तन को सिर के ऊपर रखें और गिरती हुई जलधारा के बीच से सूर्य के दर्शन करें। साथ ही ‘ॐ सूर्याय नमः’ या सूर्य मंत्र का धीमी आवाज में जाप करें।















